July 24, 2024 |

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लोकसभा चुनाव 2024ः मिर्जापुर से नहीं, फूलपुर से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार

Sachchi Baten

जेडीयू के सर्वे में फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला

 

फूलपुर सीट का जातीय समीकरण भी पूरी तरह नीतीश के लिए मुफीद

 

नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा

 

मनोज तिवारी, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया के संयोजक न बन सके हों, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड ने उन्हें 2024 के चुनाव में पीएम फेस के तौर पर पेश करने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। इसके तहत पार्टी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को यूपी की उस फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ाने का मन बनाया है, जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद हुआ करते थे। जेडीयू ने उनके चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर सीट पर न सिर्फ कई स्तर पर सर्वे कराया है, बल्कि पार्टी के एक सांसद, एमएलसी और बिहार के मंत्री को यहां सियासी ज़मीन तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई है।

 

जेडीयू के सर्वे के जो नतीजे आए हैं, उससे जेडीयू खासी उत्साहित है। नीतीश की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने बातचीत में उनके फूलपुर से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे सियासी मंथन को खुले तौर पर कबूल भी किया है। नीतीश कुमार फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर न सिर्फ खुद को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा साबित कर सकेंगे, बल्कि वह पीएम मोदी को सीधी टक्कर देने की भी जुगत में रहेंगे।

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा, जबकि यूपी समेत उत्तर भारत की तमाम सीटों पर इसका असर देखने को मिलेगा।

ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हुआ तो नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में बिहार की नालंदा के साथ ही यूपी की फूलपुर सीट से भी ताल ठोंकते हुए नज़र आ सकते हैं। इस सीट पर नीतीश कुमार के सजातीय कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। यहां अब तक नौ बार कुर्मी प्रत्याशी सांसद चुने गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद रह चुके हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को नीतीश को फूलपुर में समर्थन करने में कोई गुरेज भी नहीं होगा।

फूलपुर में सियासी संभावनाएं तलाशने का ज़िम्मा बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार और नीतीश कुमार के बेहद करीबी एमएलसी संजय सिंह को दिया गया। जेडीयू ने मंत्री श्रवण कुमार को यूपी का प्रभारी भी बनाया हुआ है। श्रवण कुमार ने से फोन पर बताया कि प्रयागराज जिले में अभी उन्होंने पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं किया है, लेकिन वह पिछले दिनों फूलपुर गए ज़रूर हैं। उनके मुताबिक़ फूलपुर में तमाम लोगों ने उनसे नीतीश कुमार को यहां से चुनाव लड़ाने की बात कही। श्रवण कुमार के मुताबिक इस बारे में अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है। उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही फिर से प्रयागराज जाने वाले हैं।

फूलपुर में सर्वे कराने की ज़िम्मेदारी नीतीश के करीबी एमएलसी संजय सिंह को दी गई है। फोन पर बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पार्टी तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है। कई जगहों पर लोगों की राय ली गई है। लोग अगर चाहते हैं कि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें तो इस पर विचार ज़रूर होगा। संजय सिंह के मुताबिक़ यूपी की कई दूसरी सीटों से भी नीतीश कुमार के लिए डिमांड आई है। बिहार के नालंदा से सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी यहां के तमाम लोगों से फोन पर बातचीत कर फीडबैक लिया है। वह दिल्ली में भी यूपी की सियासत से जुड़े कई लोगों से मुलाकात कर चुके हैं। जेडीयू की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव नीरज पटेल भी कई बार फूलपुर का दौरा कर लोगों का मन टटोल चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक़ इन सभी नेताओं को फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है।

यूपी से चुनाव लड़कर नीतीश कुमार अपने ऊपर लगे बिहार के नेता के ठप्पे से भी छुटकारा पाकर खुद को एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना चाहेंगे। सूत्रों के मुताबिक नीतीश को यहां से चुनाव लड़ाने का फैसला अनायास ही नहीं, बल्कि खूब सोच-समझकर लिया गया है। दरअसल प्रयागराज को देश में सियासत के बड़े केंद्र के तौर पर जाना जाता है. पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह यहां से सांसद चुने जाने के बाद देश के प्रधानमंत्री बने तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी-चंद्रशेखर और गुलज़ारी लाल नंदा ने यहीं से सियासत की बारीकियां सीखीं।

फूलपुर सीट का जातीय समीकरण भी पूरी तरह नीतीश के लिए मुफीद है। यहां कुर्मी वोटर तीन लाख के करीब हैं। इसके साथ ही यादव और मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। यानी फूलपुर से चुनाव लड़कर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सियासी संदेश दिया जा सकता है। इस जातीय गणित के सहारे ही फूलपुर सीट से अब तक नौ कुर्मी सांसद चुने गए हैं। मौजूदा समय में भी यहां से कुर्मी समुदाय की बीजेपी नेता केशरी देवी पटेल ही सांसद हैं। अकेले फूलपुर ही नहीं, बल्कि आस-पास की तकरीबन दो दर्जन सीटों पर कुर्मी वोटर मजबूत स्थिति में हैं।

फूलपुर में विधानसभा की पांच सीटें हैं। इनमें से सोरांव और फूलपुर में कुर्मी वोटर ही पिछड़ों में सबसे ज़्यादा हैं। फाफामऊ और इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर भी कुर्मियों की संख्या निर्णायक है. इलाहाबाद उत्तरी में संख्या औसत है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांच विधानसभा सीटों में से चार पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि सोरांव सीट से सपा की गीता पासी चुनाव जीती थीं. हालांकि बाकी चारों सीटों पर सपा मजबूती से लड़ी थी। नीतीश कुमार साल 2016 में फूलपुर में किसानों का एक बड़ा कार्यक्रम कर चुके हैं। प्रयागराज में नार्थ सेंट्रल रेलवे ज़ोन का हेडक्वार्टर बनाने का श्रेय भी नीतीश कुमार को ही जाता है। नीतीश उस वक़्त रेल मंत्री हुआ करते थे।


Sachchi Baten

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