July 24, 2024 |

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लोकसभा चुनाव-2024ः भाजपा के गले की फांस बनेगी ‘मोदी की गारंटी’ ?

Sachchi Baten

धान के समर्थन मूल्य 3100 रुपये के लिए यूपी में आंदोलन की सुगबुगाहट

-राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विस चुनाव में भाजपा ने जारी किया था ‘मोदी की गारंटी’

-किसान सम्मान निधि को भी दोगुना करने की उठी मांग

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। क्या ‘मोदी की गारंटी’ भारतीय जनता पार्टी के गले की फांस बनने वाली है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के किसानों में जो सुगबुगाहट है, उससे तो यही प्रतीत होता है। पांच राज्यों के चुनाव बीत चुके हैं। परिणाम घोषित हो गए हैं। घोषणा पत्र ‘मोदी की गारंटी’ का जोरदार असर रहा। ट्विस्ट इसमें यह है कि यूपी के किसानों के बीच से भी उसी गारंटी की मांग उठने लगी है। लोकसभा चुनाव सिर पर है। गेंद सत्तारूढ़ भाजपा के पाले में है। जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पहले यदि केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारें ‘मोदी की गारंटी’ को लागू नहीं करतीं तो ‘जुमला’ ही कहा जाने लगेगा। यह नुकसानदेह हो सकता है।

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र ‘मोदी की गारंटी’ में किसान सम्मान निधि और किसान कल्याण योजना के दायरे में आने वाले किसानों को सालाना 12,000 रुपये देने का वादा किया है। इसी तरह से छत्तीसगढ़ में ‘दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर योजना’ लॉन्च कर इसके तहत किसानों को सालभर में 10 हजार रुपये देने की बात कही गयी है। राजस्थान में भी किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12 हजार रुपये सालाना देने की गारंटी है।

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी अपने संकल्प पत्र में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद करने को कहा है। धान के समर्थन मूल्य के साथ ही बोनस का भुगतान एकमुश्त करने का वादा है। वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 का बकाया बोनस 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस यानी राष्ट्रीय सुशासन दिवस 25 दिसंबर को करने की घोषणा की है।

किसान सम्मान निधि की राशि दोगुनी करने में आधा योगदान राज्य सरकार का होगा। इन घोषणाओं के कारण जब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला तो उत्तर प्रदेश में भी इसकी मांग होने लगी।

भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के मुख्य महासचिव बजरंगी सिंह कुशवाहा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान सौतेली संतान नहीं हैं। वे भी अन्य राज्यों के किसानों की ही तरह पसीना से जमीन को सींचकर अन्न का उत्पादन करते हैं।

खाद, बीज, मजदूरी, जोताई, परिवहन, सिंचाई, दवा आदि का खर्च बराबर ही है। फिर, समर्थन मूल्य में भेदभाव क्यों। भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए जो वादा किया है, उसे इन राज्यों के साथ उत्तर प्रदेश ही नहीं, भाजपा शासित सभी राज्यों में लागू होना चाहिए।

कुशवाहा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में तो इसी सीजन से 3100 रुपये प्रति कुंतल की दर से धान का भुगतान सरकार को करना चाहिए। जो किसान धान बेच चुके हैं और उनका भुगतान डीबीटी के माध्यम से हो चुका है, उनके खाते में फिर से शेष राषि भेजी जानी चाहिए। किसान सम्मान निधि की राशि को उत्तर प्रदेश में दोगुना किया जाए। कुशवाहा ने कहा कि उनका संगठन भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) इस मुद्दे पर गंभीर चिंतन कर रहा है। जरूरत पड़ने पर सड़कों पर भी उतर सकते हैं।

लोकसभा चुनाव सिर पर है। ऐसे में इन घोषणाओं को यथा शीघ्र छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व राजस्थान में ही नहीं, भाजपा शासित सभी राज्यों में लागू करने की मांग को विपक्ष मुद्दा बना सकता है। यदि किसानों के संगठन भी सड़क पर उतरे तो भाजपा के लिए परेशानी का कारण हो सकता है। ‘मोदी की गारंटी’ पर जनता कितना विश्वास करती है, यह स्पष्ट हो गया। लेकिन जनता भी अब गारंटी चाहेगी। सिर्फ इन तीनों राज्यों की नहीं, अपितु भाजपा शासिल सभी राज्यों में। इनमें उत्तर प्रदेश भी है। ऐसे में यहां के किसानों की ओर से की जा रही यह मांग गलत तो नहीं ही है।

 

 

 

 


Sachchi Baten

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