July 24, 2024 |

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हम आधुनिक बनें, लेकिन पश्चिम की नक़ल नहीं करें, पढ़िए जानकारीपरक आलेख

Sachchi Baten

आधुनिकता की उलझनें

 

(Entanglements of Modernity)

 

आचार्य निरंजन सिन्हा

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यदि कोई व्यक्ति डार्विन के उद्विकास के सिद्धांत (Theory of Evolution) को  जानता है और समझता भी है, फिर भी ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करता है, और तदनुसार व्यवहार भी करता है, तो वह आधुनिकता की उलझनों में उलझा हुआ है|

यदि कोई व्यक्ति जानता है कि विश्व के सभी वर्तमान मानव एक ही व्यक्ति (होमो सेपियन्स) की संताने हैं, और यह भी जानता है कि सभी विभिन्नता उस समय के तत्कालीन पारितंत्र यानि पर्यावरण में बचे रहने के लिए प्राकृतिक अनुकूलन का ही परिणाम है, और फिर भी वह जाति एवं प्रजाति की भिन्नताओं में विश्वास करता है, तो वह अवश्य ही आधुनिकता की उलझनों में उलझा हुआ है|

यदि कोई व्यक्ति विज्ञान के मूल तत्वों को जानता है और फिर भी आत्मा (आत्म नहीं) एवं पुनर्जन्म में विश्वास रखता है और

सम्बन्धित पाखण्ड, ढोंग, अंधविश्वास को अपनाता भी है, तो वह अवश्य ही आधुनिकता की उलझनों में फंसा हुआ है|

और सबसे बड़ी बात यह है कि, यदि किसी व्यक्ति को आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) करना नहीं आता है, यानि इसकी समझ नहीं है, तो वह व्यक्ति अवश्य ही आधुनिकता की ओर नहीं चल रहा है, और वह अभी आधुनिकता की उलझनों में उलझा हुआ है| ऐसा व्यक्ति इसीलिए किसी भी शब्द, वाक्य या सन्दर्भ के सतही (Superficial) अर्थ और उसका निहित (Implied) अर्थ की भिन्नता को नहीं समझ पाता है| अर्थात उसे अभिव्यक्ति के शब्दों, वाक्यों एवं सन्दर्भों की संरचनात्मक बनावट (Sructural Construct) की समझ नहीं है, और इसीलिए वह आधुनिक होने की समझ रख कर भी उसमे उलझा हुआ है|

तो आधुनिकता (Modernity) क्या है और उसकी उलझने (Entanglement) क्या है? क्या यह पश्चिमीकरण (Westernisation) ही है, या कोई भिन्न अवधारणा है?

आधुनिकता एक ऐसी अवधारणा है, जिसे अधिकतर लोग जाने समझे बिना ही आधुनिक होने का दावा करते हैं, या आधुनिक होना समझ लेते हैं| दरअसल पश्चिमीकरण यानि पश्चिम का नक़ल यानि अनुकरण को ही आधुनिकीकरण समझने का भ्रम पाल लेते हैं| आधुनिकीकरण पश्चिमीकरण की अपेक्षा ज्यादा निरपेक्ष अवधारणा है, यानि पश्चिमीकरण एक सापेक्षिक अवधारणा है| इस गोलानुमा (Spherical) पृथ्वी पर पश्चिम का होना एक सन्दर्भ बिंदु के सापेक्ष होगा, जो सन्दर्भ बिंदु के सापेक्ष बदलता हुआ हो सकता है| हालाँकि पश्चिमीकरण अवधारणा पश्चिम जगत के अनुकरण करने के लिए प्रयुक्त है, जिसमे यूरोप एवं अमेरिका की संस्कृति का अनुकरण शामिल माने जाते हैं| और इसीलिए आधुनिकीकरण अवधारणा किसी क्षेत्र विशेष से बंधा हुआ नहीं है| अर्थात सभी आधुनिक व्यक्ति सिर्फ पश्चिम का ही हो, या सभी पश्चिमी व्यक्ति ही आधुनिक हो, ऐसा पूर्ण रुपेण संभव नहीं है|

इस तरह पश्चिमीकरण पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण है, जबकि आधुनिकीकरण अपनी संस्कृति को वैज्ञानिकता के अनुरूप ढालना है| ये दोनों यानि पश्चिमीकरण एवं आधुनिकीकरण किसी समाज की गत्यात्मकता (Dynamism) को समझने का उपकरण है, या अवधारणा है| समाज की गत्यात्मकता ही स्वाभाविक रूप में संस्कृति में बदलाव या रूपांतरण है| पश्चिमीकरण की अवधारणा प्रोफेसर मैसूर नरसिंघाचार श्रीनिवास ने और आधुनिकीकरण की अवधारणा डैनियल लर्नर ने दिया है| किसी को पश्चिमी बनने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता है, परन्तु किसी को आधुनिक बनने के लिए उसे सजग, सतर्क एवं निश्चित वैज्ञानिक प्रयास करना ही होगा| मतलब आधुनिक बनने के लिए ज्ञान यानि बुद्धिमत्ता की जरुरत होती है, और इसीलिए बहुत से डिग्रीधारी एवं पदधारी कोट पेंट पहनकर ही आधुनिक हो जाना समझ लेते हैं, जबकि उनके पास इसका ज्ञान एवं समझ ही नहीं होता है|

आधुनिकीकरण जहां समाज के लोगों का जीवन, संस्कार, मूल्य, आदर्श, संस्कृति, शिक्षा आदि को वैज्ञानिक बनाकर बेहतर बनाता है, वही पश्चिमीकरण मात्र पश्चिमी समाज एवं जीवन शैली का अनुकरण मात्र है| उदाहरण स्वरुप पश्चिम में ठण्ड के कारण भोजन करने में काँटा चम्मच का प्रयोग किया जाता है, और उसका गर्म देशों में भी उपयोग करना पश्चिमीकरण है, आधुनिकीकरण नहीं है| यह एक अलग बात है कि अधिकतर पश्चिमी देश विकसित हैं, और इसीलिए वहां आधुनिकीकरण भी बहुत हद तक सामानांतर क्रियान्वित है| इसी कारण बहुत से लोगों को पश्चिम का अनुकरण करना ही आधुनिकीकरण लग जाता है| दरअसल उनमे आलोचनात्मक चिंतन की कमी होती है| आधुनिकीकरण में विरासत की बहुत से अंधविश्वास, ढोंग एवं पाखंड को छोड़ना होता है, जबकि पश्चिमीकरण में पश्चिम के नक़ल करने से शुरू होता है|

इस तरह, आधुनिकता एक संस्कृति है, यानि जीवन जीने की शैली है, जिसमे मानवता, वैज्ञानिकता, प्रकृति यानि सम्पूर्ण परितंत्र, न्याय, शांति, विकास और स्थिरता को लक्षित कर जीवन अग्रसर होता है| आधुनिकता की उलझनें इसलिए अपने वजूद में हैं, क्योंकि हम पश्चिम का नक़ल कर अपने को आधुनिक समझ लेते हैं| जहाँ आधुनिकता होगी, वहाँ मानवता होगी| अर्थात वहाँ सभी मानवों में कोई नकारात्मक विभाजनकारी आधार नहीं होगा, चूँकि सभी एक ही होमो सेपियंस की संतान हैं| वैज्ञानिकता से तात्पर्य सभी विचारों, आदर्शो एवं व्यवहारों में कार्य- कारण सम्बन्ध होगा, तार्किकता होगी, तथ्यशीलता होगा और विवेकशीलता होगी| आधुनिक होने का एक आधुनिक शर्त यह है कि उसे अवश्य ही प्रकृति से प्रेम होगा, यानि पारितंत्र के संरक्षण एवं स्थिरता के लिए समर्पित भी होगा| वह अवश्य ही न्यायवादी होगा, यानि उसे समानता, समता, स्वतन्त्रता एवं बंधुत्व में विश्वास भी होगा| वह शांति प्रेमी होगा, यानि सहअस्तित्व उसके जीवन का आधार होगा| वह स्थिरता के साथ विकास का समर्थक भी होगा| वैसे वैज्ञानिकता एक व्यापक अवधारणा है, जो परंपरागत अंधविश्वास, ढोंग, पाखण्ड, भेदभाव से दूर प्रगतिशील विचारों, व्यवहारों एवं आदर्शों का व्यक्ति होगा|

अब तक स्पष्ट हो गया कि आधुनिकीकरण क्या है? आधुनिकीकरण की उलझने क्या है? समझ गए हैं| मैं किसी को भी यह भी नहीं कह रहा हूँ, कि कोई या आप भी आधुनिक ही हो जाइए| आप यथावत भी बने रह सकते हैं, लेकिन अपने भविष्य को यानि अगली पीढ़ी को तो आगे बढ़ने देने में सहयोग कीजिए, यानि आगे बढ़ने दीजिए| हमारी अगली पीढ़ी ही हमारे समाज, राष्ट्र एवं सम्पूर्ण मानवता का भविष्य हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर बहुत कुछ समझना है, बदलना  है, और कई चुनौतियों को स्वीकार भी करना है| आधुनिकता सभी समस्याओं का समाधान है, क्योंकि इसमें ज्ञान है, विज्ञान है, मानवता है, न्याय है, तर्क है, प्रगति है, समृद्धि है, शांति है, स्थायित्व है|

आइए, हम आधुनिक बने, लेकिन पश्चिम का नक़ल नहीं करें|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(सिन्हा जी के अन्य आलेख आप niranjan2020.blogspot.com पर देख सकते हैं|)


Sachchi Baten

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