July 23, 2024 |

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फिर अटक गया जमालपुर में राजकीय महिला डिग्री कॉलेज का शिलान्यास

Sachchi Baten

अपना दल एस-भाजपा गठबंधन के कनफुसवा कार्यकर्ताओं ने किया बंटाधार

-मिर्जापुर-भदोही की पूर्व सांसद स्व. फूलन देवी ने सबसे पहले जमालपुर में बालिकाओं की उच्च शिक्षा की वकालत की थी

राजेश कुमार दुबे, जमालपुर/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। जमालपुर के लोगों को बहुत उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पहले राजकीय महिला महाविद्यालय का शिलान्यास हो जाएगा। लेकिन, अपना दल एस-भाजपा गठबंधन के कुछ कनफुसवा कार्यकर्ताओं ने सब बंटाधार कर दिया। इन कार्यकर्ताओं में श्रेय की ऐसी होड़ मची कि शिलान्यास ही नहीं हो सका।

राजकीय महिला महाविद्यालय की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति का श्रेय लेने के लिए इस तरह से जमालपुर में निकाला गया था जुलूस।

 

खबर विस्तार से…

1952 से लेकर 1996 तक शिक्षा के प्रति जागरूकता कम रही। 1997 में दस्यु सुन्दरी सांसद फूलन देवी ने जमालपुर के श्रीमती देवकली इण्टर मीडिएट कॉलेज के मैदान में एक जनसभा के दौरान गरीब बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का मंच से एलान किया था। कहा था कि गरीब की बेटी पढ़ेगी तो समाज का विकास होगा। जब इसकी भनक तत्कालीन शिक्षा मंत्री क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सिंह को हुई तो जमालपुर में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए जमीन का न होना कहना शुरू कर दिया। कनफुसवा कार्यकर्ता उस समय भी  थे।

नतीजा, कनफुसवा कार्यकर्ताओं के चलते 2012 में ओमप्रकाश सिंह चुनाव ही हार गए। वर्ष 2012 में जगदम्बा पटेल चुनार के विधायक चुने गए। उन्होंने ईमानदारी से डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया और सफल भी रहे। सांसद बालकुमार पटेल, विधायक जगदम्बा पटेल के कार्यकाल के दौरान जमालपुर में चकबंदी के दौरान जमीन उपलब्ध हो गई। लेकिन, शासन से स्वीकृति नहीं दिला सके।

सांसद अनुप्रिया पटेल जब से जिले की सांंसद बनी हैं, तब से वह इसके लिए प्रयासरत हैं। 2017 में विधायक बनने के बाद अनुराग सिंह भी जमालपुर में राजकीय बालिका डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री की चौखट पर हाजिरी लगाते रहे।  येन केन प्रकारेण वर्ष 2024 आते-आते धन स्वीकृत हो गया।

सांसद अनुप्रिया पटेल और विधायक अनुराग सिंह ने इसके लिए खुले मंच से एलान तो नहीं किया कि उन्होंने ही राशि स्वीकृत कराई। लेकिन, भाजपा अपना दल एस गठबंधन के कनफुकवा कार्यकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पर चिट्ठी पत्री जारी कर सांसद व विधायक को आमने-सामने लाने का हर संभव प्रयास किया गया।

इनमें शामिल होने वाले प्रमुख कार्यकर्ता वहीं रहे, जो सांसद और  विधायक के क्षेत्र में आने पर सबसे पहले अगवानी करते हैं, नारेबाजी करते हैं और जरा सी धूप व हल्की बरसात होने से पहले छाता का प्रबंध कर उसी छतरी के नीचे साथ-साथ चार कदम चलकर अपने को सबसे नजदीक होने का दिखावा करते हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि डिग्री कॉलेज का शिलान्यास लोकसभा चुनाव के पहले न हो, इसके लिए एक कद्दावर नेता ने पूरा जोर लगा दिया था, ताकि इस चुनाव में उसका लाभ न लिया जा सके। नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं थी कि मुख्यमंत्री इसका शिलान्यास नहीं करते। जिस तरह से ऑनलाइन विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया, इसका भी कर सकते थे।

हालांकि आम लोगों को पता है कि इसके लिए किसका प्रयास सफल रहा। पूरी उम्मीद थी कि 2024 लोकसभा चुनाव से पूर्व जमालपुर में डिग्री कॉलेज का शिलान्यास हो जाएगा। कनफुसवा कार्यकर्ताओं ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों शिलान्यास का दावा भी किया, जो नहीं हो सका।

जमालपुर की जनता बहुत जागरूक है। यहां के कम लोग ही खुलकर नेतागिरी करते हैं। ज्यादातर लोग सिर्फ समझने का काम करते हैं। उचित समय पर उचित माध्यम से जवाब देते हैं। इस मामले में भी जिसने खलनायकी है, उसे भी जवाब जरूर मिलेगा। बराबर मिलेगा।


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