July 23, 2024 |

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सपा विधायक मनोज पांडेय ने अखिलेश की पीठ में क्यों छूरा भोंका? जानिए…

Sachchi Baten

विजिलेंस की खुली जांच चल रही है ऊंचाहार के सपा विधायक पूर्व मंत्री मनोज पांडेय के खिलाफ

-गोपनीय जांच में आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर खुली जांच के लिए योगी सरकार ने दिया था आदेश

राजेश पटेल, लखनऊ (सच्ची बातें)। राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को उसके ही कुछ विधायकों ने पीठ में छूरा भोंका। ऐसा उन्होंने स्वेच्छा से नहीं किया। चर्चा है कि इनको डराया गया। मजबूरी में इन विधायकों ने अपनी पार्टी के प्रति विश्वासघात किया।

अपनी पार्टी से विश्वासघात करने वालों में रायबरेली के ऊंचाहार से सपा विधायक पूर्व मंत्री मनोज पांडेय का भी नाम शामिल है। गोपनीय जांच में उनके पास आय से अधिक संपत्ति की शिकायत प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर इसी योगी सरकार के कार्यकाल में 2021 फरवरी में विजिलेंस को खुली जांच का आदेश दिया था। तभी से इनके खिलाफ खुली जांच चल रही है। इस जांच में अभी तक क्या हुआ, यह तो नहीं पता। लेकिन राज्यसभा चुनाव में मनोज पांडेय को नतमस्तक करने के लिए ब्रह्मास्त्र के रूप में इसे प्रयोग कर लिया गया। यह ऐसा ब्रह्मास्त्र है, इसके सामने आत्मसमर्पण न करने पर लोकसभा चुनाव के पहले ही मनोज पांडेय की मुश्किलें बढ़ सकती थीं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बयान दिया कि जो डर गए हैं या जिनको किसी प्रकार के लाभ का लालच है, वे भाजपा के पक्ष में खड़े हो गए हैं।

मंत्री पद का दुरुपयोग

रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक रहे मनोज पांडेय सपा के कद्दावर मंत्रियों में से एक थे। वो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री थे। पांडेय सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी नेता हैं। उन पर मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाते हुए 2019 में शिकायत की गई थी। विजिलेंस ने इसकी गोपनीय जांच की, जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री की भूमिका गड़बड़ पाई थी।

खुली जांच की मांगी थी अनुमति

विजिलेंस ने शासन को गोपनीय रिपोर्ट भेजते हुए पूर्व मंत्री की संपत्तियों की पड़ताल के लिए खुली जांच की अनुमति मांगी थी। शासन ने अनुमति दे दी थी। विजिलेंस सूत्रों का कहना है कि पूर्व मंत्री की जांच में उनके नाम कई बेशकीमती संपत्तियों का खुलासा हुआ है। रायबरेली, लखनऊ समेत अन्य जिलों में कई बेनामी संपत्तियां भी सामने आईं हैं। जांच में ये भी पता चला कि पूर्व मंत्री ने रायबरेली में दलितों की पट्टे की जमीनें भी हड़पी हैं।

मनोज पांडेय को सीएम ने मंत्री पद से किया था बर्खास्त

मनोज पांडेय पार्टी का ब्राह्मण चेहरा थे और मंत्रिमंडल में बड़ी हैसियत रखते थे। हालांकि, रायबरेली में पंचायत चुनाव और एमएलसी चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनकी स्थिति काफी कमजोर हो गई थी। उन्हें सीएम रहे अखिलेश यादव ने मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था।

विधानसभा में पूर्व मंत्री की कुर्सी के नीचे मिला था विस्फोटक

विधानसभा सत्र के दौरान 12 जुलाई 2017 की सुबह मनोज पांडेय की कुर्सी के नीचे पीईटीएन विस्फोटक पाउडर मिलने से हड़कंप मच गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में यूपी एटीएस को जांच के आदेश दिए थे। यूपी एटीएस ने पूर्व मंत्री से विस्फोटक मामले में पूछताछ भी की थी। मनोज पांडेय पर रायबरेली में अवैध असलहा रखने और अपहरण समेत 3 मुकदमे दर्ज हैं। रायबरेली में पांच लोगों की हत्या के मामले में भी उनका नाम आया था।

आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर जांच की प्रगति की जानकारी लेने जाएंगे विजिलेंस ऑफिस

आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार सपा विधायक मनोज कुमार पांडेय का भाजपा को वोट दिया जाना मुख्य रूप से उनके विरुद्ध प्रचलित विजिलेंस जांच के संबंध में हुआ परस्पर समझौता बताया गया है।

जानकारी के अनुसार मनोज पांडेय के खिलाफ 2019 में विजिलेंस की गोपनीय जांच शुरू हुई, जिसमें उनके मंत्री रहने के दौरान अर्जित उनकी कई बेशकीमती संपत्तियों का पता लगा। इनमें रायबरेली‚ लखनऊ समेत आधा दर्जन शहरों में उनकी संपत्तियों की जानकारी शामिल थी। गोपनीय जांच के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2021 में उनके खिलाफ खुली जांच की अनुमति दी थी।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि तब से यह खुली जांच इसी प्रकार शायद लंबित है और इसी जांच के कारण पर पाला बदलने का निर्णय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह तथ्य प्रथमदृष्ट्या राजनीतिक शुचिता के खिलाफ हैं। अतः आजाद अधिकार सेना 29 फरवरी को विजिलेंस कार्यालय जाकर इस जांच की प्रगति की जानकारी प्राप्त कर इसके संबंध में अग्रिम कार्रवाई करेगी।


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