July 24, 2024 |

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लालबहादुर को शास्त्री बनाने में बड़ी भूमिका थी रामसखी सिंह की, जानिए पूरी कहानी

Sachchi Baten

लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर विशेष…

जमालपुर ब्लॉक के शेखापुर निवासी रामसखी सिंह छोटा भाई मानकर लालबहादुर शास्त्री की पढ़ाई में हर तरह की मदद की

रामसखी सिंह से उम्र में दो साल छोटे थे लालबहादुर शास्त्री, एक ही कमरे में रहकर दोनों ने की काशी विद्यापीठ में पढ़ाई

राजेश पटेल, जमालपुर/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनको भी याद करना जरूरी हो गया है, जिन्होंने पढ़ाई में उनकी मदद की। इनका नाम रामसखी सिंह शास्त्री था। रामसखी सिंह उम्र में लालबहादुर शास्त्री से दो साल बड़े थे। इसलिए उनको छोटा भाई मानते थे। पढ़ाई के दौरान करमे में साथ रखते थे। भोजन व कपड़े के साथ किताब-कापी का भी खर्च रामसखी सिंह ही वहन करते थे।

 

जानते हैं विस्तार से…

सभी जानते हैं कि लालबहादुर शास्त्री का बचपन काफी गरीबी में बीता था। गरीबी इतनी कि जूते तक नहीं खरीद पाते थे। भरी दोपहरी में अंगारों जैसी तपती सड़क पर नंगे पांव ही स्कूल जाते थे। नाव के पैसे न होने के कारण तैरकर गंगा पार करके बनारस जाते थे।

इधर जमालपुर ब्लॉक के शेखापुर गांव के निवासी रामसखी सिंह का परिवार बहुत ही समृद्ध था। ये भी पढ़ाई के लिए बनारस चले गए। उम्र में छोटे लालबहादुर शास्त्री का कष्ट इनको देखा नहीं गया तो बनारस में ही अपने साथ रहने की पेशकश की। शास्त्री जी तैयार हो गए। दोनों साथ रहने लगे। रामसखी सिंह घर से चावल, दाल आदि ले जाते थे। दोनों का भोजन साथ ही बनता था।

लोग बताते हैं कि उम्र में दो साल बड़े होने के कारण उसी हिसाब से लालबहादुर शास्त्री से कक्षा में भी आगे थे। सो, अपनी पढ़ी हुई किताबें वे लालबहादुर शास्त्री जी को दे दिया करते थे। कापी व अन्य सामान भी खरीद देते थे। उन्होंने शास्त्री जी को छोटा भाई मानते हुए आश्वस्त कर दिया था कि आपको पढ़ाई में आने वाले खर्च के बारे में नहीं सोचना है।

दोनों ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि हासिल की। डिग्री मिलने के बाद रामसखी सिंह भी रामसखी सिंह शास्त्री हो गए। दोनों पर गांधी जी के विचारों का वड़ा प्रभाव था। लिहाजा महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए।  कई बार जेल जाना पड़ा।

बाद में यही लालबहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने तथा जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इनके ऊपर स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।

 

 

इधर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वतंत्रता के 25 वर्ष पूरे होने पर 1972 में 15 अगस्त को एक ताम्रपत्र सौंपा। बता दें कि लालबहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को तथा रामसखी सिंह शास्त्री का जन्म 15 अप्रैल 1902 को हुआ था। रामसखी सिंह का निधन 13 अक्टूबर 1980 को हुआ।

 


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1 Comment
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