July 16, 2024 |

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MIRZAPUR : सिंचाई विभाग में 6 करोड़ से अधिक के घोटाले का प्रोजेक्ट, जानिए विस्तार सेे..

Sachchi Baten

अहरौरा कमांड की नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए 6 करोड़ से अधिक का प्रोजेक्ट मंजूर

चौकिया माइनर के किसानों का आरोप, उनसे राय लिए बिना बना दिया लूट का प्रस्ताव

जब नहरें बनी थीं, उस समय उनकी सिंचाई क्षमता 60 फीसद थी, अब बढ़कर हो गई है 120 प्रतिशत

राजेश पटेल, चुनार (सच्ची बातें)। सिंचाई विभाग के भी कारनामे अजीब हैं। इसके अभियंता आपदा में अवसर की तलाश में हमेशा रहते हैं। जब चुनार के विधायक ओमप्रकाश सिंह प्रदेश के सिंचाई मंत्री थे तो जमालपुर वालों ने भोका व गरई की सफाई को देखा है। पानी होने के बावजूद भोका नाला की सफाई की गई थी। इसमें सिर्फ किनारे छीले गए थे। गरई नदी की चौड़ाई मात्र छह मीटर दर्शाकर अभियंताओं ने इसकी खुदाई में बड़ा खेल किया था। मौजूदा चौड़ाई में से छह मीटर घटा दीजिए। कितने का घोटाला हुआ होगा, आप अंदाज लगा सकते हैं।

लूट की यही कहानी फिर दोहराने की तैयारी है। जमालपुर ब्लॉक के ही ओड़ी गांव निवासी स्वतंत्रदेव सिंह प्रदेश के सिंचाई मंत्री हैं। क्षेत्र के जागरूक किसानों ने विभिन्न माध्यमों से इस क्षेत्र की सिंचाई की समस्या से अवगत कराते हुए निदान के उपाय सुझाए थे। वह पत्र जब सिंचाई खंड चुनार के मिर्जापुर ऑफिस पहुंचा तो अधिकारियों को मानो यह चेक मिल गया।

सोचा कि मंत्री जी के क्षेत्र का है। जो योजना बना देंगे, वह पास कर ही देंगे। आनन-फानन में मनमाने ढंग से छह करोड़ रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट बना दिया। इस धन से बेलहर राजवाहा, बिकसी व चौकिया माइनर के सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

सुदृढ़ीकरण में कुछ स्थानों पर लाइनिंग, डौला निर्माण के साथ तटबंध के क्षतिग्रस्त स्थानों पर मरम्मत कराने आदि कार्य शामिल किए गए हैं। क्या-क्या काम होने चाहिए, ताकि टेल तक समुचित सिंचाई हो सके। आश्चर्य की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे सिंचाई की समस्या का स्थाई निजात हो सके। सब लूटने-खाने वाली योजनाएं हैं। मिट्टी के काम में कितनी लूट होती है, यह कौन नहीं जानता।

बढ़ानी होगी नहरों की सिंचन क्षमता

चौकिया माइनर का निर्माण 1960 से पहले हुआ था। अहरौरा बांध का निर्माण तो 1960 में हुआ. अहरौरा बाद बनने के पहले अंग्रेजों के समय बनाए गए डोंगिया बाद से चौकिया क्षेत्र की सिंचाई होती थी। पहले यह माइनर मनऊर गांव तक ही थी। इसके बाद ढेबरा तक आई। चरगोड़ा के किसानों द्वारा आवाज उठाए जाने पर नहर को सिलौटा में नाले तक लाया गया। उस समय कितनी खेती होती थी, कितने रकबे की सिंचाई होती है। इस समय इस मामले में स्थिति क्या है। इसका आंकलन किए बिना कैसे कोई योजना बनाई जा सकती है। इसी माइनर से शेरवां व देवरिल्ला को लिए भी नहर निकाल दी गई। हेड जस का तस है। देवरिल्ला माइनर का निर्माण करीब 36 साल पहले शुरू हुआ था. लेकिन आज तक इसका निर्माण पूरा नहीं नहीं हो सका है।

नहर जब बनी थी, उस समय सिंचाई क्षमता 60 फीसद ही थी। अब 120 प्रतिशत हो गई है। ऐसे में अब यदि नहर की चौड़ाई नहीं बढ़ाई जाएगी तो पूरी सिंचाई संभव है ही नहीं। चरगोड़ा गांव के जागरूक किसान महेंद्रनाथ सिंह ने बताया कि नहरों की चौड़ाई को बढ़ाना आवश्यक है। इसके साथ ही हेड को भी और चौड़ा करना होगा। पंसाल से नहर चलने की स्थिति में जहां-जहां पानी छलकता है, वहां तटबंध को ऊंचा और मजबूत करना होगा।

नहर के दोनों किनारों की लाइनिंग जरूरी है। बेड लेबल के गायब पत्थरों को लगाना होगा। हर साल सिल्ट सफाई के नाम पर जेसीबी से खोदाई के दौरान बेड लेबल के सारे पत्थर नष्ट हो गए। सिर्फ सरकारी धन को लूटने के लिए नहर में सिल्ट सफाई का नाटक किया जाता है। सही मायने में बेड लेबल से देखा जाए तो कहीं भी सिल्ट है नहीं। बल्कि गहराई मानक से ज्यादा हो गई है।

क्योंकि चौकिया माइनर की लंबाई बढ़ी है। शाखाएं निकली हैं। जहां छह इंच के कुलाबे थे, वहां एक फीट की ह्यूम पाइप लगा दी गई है। ज्यादा सिंचाई होगी तो ज्यादा पानी भी चाहिए। ऐसी स्थिति में नहर और हेड की चौड़ाई बढ़ाए बिना सिंचाई की समस्या का अंत हो ही नहीं सकता। यही स्थिति बिकसी माइनर तथा बेलहर राजवाहा की भी है।

रही बात बिकसी माइनर की तो अभी भी इसके टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। 35 क्यूसेक क्षमता की मुड़हुआ नहर निकाली गई है। इसके चलते आगे पानी जाता ही नहीं है। गरई नदी में चैनल न बनाए गए होते तो नीचे के किसान आज भी पानी के लिए तरसते रहते।

महेंद्र नाथ सिंह ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि सिर्फ सरकारी धन की लूट के लिए योजना बनाई गई है। कहा कि योजना बनाते समय किसानों  की राय न लेना ही लूट का संकेत है। सिंह ने कहा कि विभाग एक बैठक करे, उसमें चौकिया माइनर के टेल के किसानों को भी बुलाकर उनसे राय ले। उसके आधार पर ही कार्य योजना बनाई जाए। उधर सिंचाई विभाग के एक अभियंता ने बताया कि अभी देर नहीं हुई है। किसान अपना प्रस्ताव दें, उसका परीक्षण करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।

 


Sachchi Baten

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