July 24, 2024 |

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कर्नाटकः कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी का किवाड़, पढ़िए पूरी स्टोरी…

Sachchi Baten

1977 में सत्ता गंवाने के बाद कर्नाटक से ही शुरू हुई थी कांग्रेस की वापसी

-कांग्रेस का नारा था : एक शेरनी सौ लंगूर-चिकमगलूर चिकमगलूर

 

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। कांग्रेस के लिए कर्नाटक हमेशा लकी रहा है। इसने साबित किया है यह राज्य कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी का दरवाजा है। 1977 में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस की वापसी की पटकथा इसी राज्य ने लिखी थी।

1977 की जनता पार्टी की लहर में कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई थी। खुद इंदिरा गांधी भी रायबरेली से हार चुकी थीं। उनको राजनारायण ने करीब 52 हजार मतों से हराया था। देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। कभी इंदिरा के ही सहयोगी रहे मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने थे।

इस हार से इंदिरा गांधी विचलित नहीं हुईं। हालांकि लोग कहने लगे थे कि अब कांग्रेस सत्ता में कभी वापस नहीं लौटेगी। इन सब बातों की चिंता किए बगैर इंदिरा गांधी देश भर के दौरे पर निकल पड़ीं। उसी समय बिहार के नालंदा जिले के बेलछी में एक घटना हुई थी। इसमें आठ दलितों समेत 11 की मौत हुई थी। इंदिरा गांधी ने इस गांव का दौरा करने का निश्चय किया।

इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर बिहार के नालंदा जिले के बेलछी गांव जातीं।

हाथी पर सवार होकर बिहार के बेलछी गांव जातीं इंदिरा गांधी (फोटो गूगल से)

 

बरसात का मौसम था। गांव में जाने के लिए नदी को पार करना पड़ता था। इंदिरा गांधी को हाथी पर बैठाकर नदी पार कराया गया। इस क्रम में उनकी साड़ी भीग गई थी। गांव में पहुंची तो दलित महिलाओं ने उनको एक साड़ी दी, जिसे एक झोपड़ी में उन्होंने बदला था। इस एक घटना दलितों के मन में इंदिरा गांधी के प्रति श्रद्धा बढ़ गई। नारा लगने लगा-आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा को बुलाएंगे। इंदिरा तेरे अभाव में हरिजन मारे जाते हैं।

दलित समाज में जोश को देखकर इंदिरा गांधी को सत्ता में वापसी की उम्मीद की हल्की सी किरण दिखाई दी। उन्होंने सत्ता में वापसी की योजना बनानी शुरू कर दी। इसके लिए कर्नाटक को ही केंद्र में रखा। चिकमगलूर के सांसद डीबी गौड़ा से इस्तीफा दिलवाकर सीट खाली कराई गई।

1978 में उपचुनाव हुआ। कांग्रेस (आइ) से इंदिरा गांधी खुद प्रत्याशी बनीं। वहां की जनता ने इनको जिता दिया। इसी के साथ कांग्रेस की सत्ता में वापसी की शुरुआत हो गई। 1978 में ही कर्नाटक विधानसभा का भी चुनाव हुआ। इसमें भी जीत कांग्रेस की हुई थी। नारा लगा था- एक शेरनी सौ लंगूर-चिकमगलूर चिकमगलूर।

इधर 2014 से कांग्रेस सत्ता के बाहर है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया। ऐसे समय में कांग्रेस के अलंबरदारों को इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी की रणनीति याद आई और उस पर काम करना शुरू किया। देश भर में पप्पू घोषित किए जा चुके राहुल गांधी ने अपनी इमेज बदलने के लिए भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत दक्षिण भारत से ही की। यह यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर तक की थी। इसमें लाखों लोग जुड़े। इस यात्रा ने राहुल गांधी के प्रति जनता में परसेप्शन को बदल दिया। इसके बाद कर्नाटक विधानसभा का चुनाव हुआ और कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों से राहुल गांधी की पप्पू वाली छवि समाप्त हो गई। अब उनको कोई पप्पू नहीं कहता। छवि परिवर्तन के बाद कांग्रेस की 2024 के चुनाव बाद सत्ता में वापसी होगी या नहीं, यह तो समय बताएगा, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के साथ 28 दल जुड़े हैं, उससे आशा की किरण तो दिखाई ही देने लगी है।

 

 

 


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