July 23, 2024 |

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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह में कर्मयोगी सम्मानित

Sachchi Baten

छात्रों में राष्ट्र प्रेम की भावना का विकास कर रही है दूरस्थ शिक्षा: प्रो. बंशगोपाल सिंह

-सांस्कृतिक संध्या में आल्हा, बिरहा और कजरी की बही रसधार

प्रयागराज (सच्ची बातें)। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ के अवसर पर बृहस्पतिवार दो नवंबर को अटल प्रेक्षागृह में रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। मिर्जापुर की लोक गायिका उर्मिला श्रीवास्तव एवं दल द्वारा प्रस्तुत कजरी और महोबा के जितेन्द्र कुमार चौरसिया एवं दल द्वारा आल्हा गायन समारोह के आकर्षण का केन्द्र बिन्दु रहा। इसके साथ ही ब्रज संस्कृति पर आधारित नृत्य एवं गायन और अवधि संस्कृति मैं बिरहा गायन का लोगों ने खूब आनंद उठाया।

 

समारोह का सीधा प्रसारण विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल से प्रसारित किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय ने अपनी विकास यात्रा की विगत 25 वर्षों की सुनहरी यादों को ताजा और साझा किया। जहां शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने पूर्व सहयोगियों से मिलकर काफी आनंदित हुए।

दीपावली से पूर्व ही विश्वविद्यालय में दीपावली का उल्लास नजर आया। एक तरफ विश्वविद्यालय के सभी भवन आकर्षक रोशनी से जगमगाहट बिखेर रहे थे, वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह अपनी चिरपरिचित मुस्कुराहट से आगन्तुकों का खैर मकदम कर रहीं थीं।

इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर बंश गोपाल सिंह, कुलपति, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ने कहा कि शिक्षा से वंचित वर्ग के लिए दूरस्थ शिक्षा अहम भूमिका निभा रही है। दूरस्थ शिक्षा छात्रों में राष्ट्र प्रेम की भावना तथा कौशल का विकास कर रही है। दूरस्थ शिक्षा की चुनौतियों का सामना करने के लिए धैर्य एवं एकाग्रता की आवश्यकता है।

 

 

सारस्वत अतिथि डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि शिक्षा के विस्तार के साथ ही गुणात्मक शिक्षा होनी चाहिए। शिक्षा केवल विषय को पढ़ाने के लिए नहीं वरन शिक्षार्थियों के अंदर राष्ट्रवाद का संचार भी होना चाहिए।

 

 

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर कल्पलता पांडेय, पूर्व कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया ने कहा कि आज पूरे विश्व को आवश्यकता है कि दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारत देश में ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जिससे शिक्षा सबके द्वारा तक पहुंचे। दूरस्थ शिक्षा यह कार्य बखूबी कर रही है।

अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि इस पल का सभी को बेसब्री से इंतजार था। आज अटल प्रेक्षागृह इन 25 वर्षों की यात्रा के सहयात्रियों का साक्षी बना।विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के लिए यह अवसर उन्नत शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार और समृद्धि की ओर एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

प्रोफेसर सिंह ने कहा कि आज यह विश्वविद्यालय 25 वर्षों की उपलब्धियां के साथ 26 वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्यों के अनुकूल देश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन का सुअवसर भी है। यह सुअवसर विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के फलक पर विशिष्ट पहचान और स्थान दिलाने के साथ ही देश को विश्वगुरु के रूप में ख्याति दिलाएगा।

कुलपति प्रोफेसर सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य यही है कि यह विश्वविद्यालय ऐसी युवा शक्तियों का निर्माण कर सके जो समतापरक और प्रबुद्ध मानव समाज के प्रति समर्पित हों। साथ ही देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की गौरव गरिमा को आगे बढ़ाने में अपनी सुयोग्य भूमिका का निर्वाह करें। इससे पूर्व प्रारंभ में कुलपति प्रोफेसर सिंह ने रजत जयंती समारोह में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के शुभकामना संदेश को पढ़कर सुनाया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ गौर, विशिष्ट तिथि प्रोफेसर पांडे तथा कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह द्वारा शिक्षार्थी सूचना प्रबंधन प्रणाली एल आई एम एस का उद्घाटन किया गया। इससे शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक वृद्धि होगी। अतिथियों ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रोफेसर श्रुति एवं डॉ गौरव संकल्प द्वारा संपादित पुस्तक डाइमेंशन्स ट्रेंड्स एंड चैलेंजेस तथा डॉ आनंदानंद त्रिपाठी एवं डॉ त्रिविक्रम तिवारी द्वारा संपादित पुस्तक ई गवर्नेंस एंड डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज इन इंडिया का विमोचन किया।

रजत जयंती समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों प्रोफेसर आशुतोष गुप्ता, प्रोफेसर जेपी यादव, डॉ दिनेश सिंह, डॉ संजय सिंह, डॉ यू एन तिवारी, डॉ स्मिता अग्रवाल, डॉ गौरव संकल्प, डॉ शिवेंद्र कुमार सिंह, सीमा सिंह प्रोग्रामर, इंदू भूषण पांडेय, दिलीप त्रिपाठी, अवनीश चंद्र, मोहितोष कुमार, डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र, प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, अभिमन्यु, गुलाब बिन्द, बसंत मौर्य, उमेश चन्द्र पांडेय, कुश प्रकाश पाल, राजू बारी, रामानंद यादव एवं मो. इमरान का सम्मान किया गया।

रजत जयंती समारोह के कार्यक्रम निदेशक प्रोफेसर पी पी दुबे ने अतिथियों का स्वागत किया तथा समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की। समारोह का संचालन प्रोफेसर श्रुति और डॉ देवेश रंजन त्रिपाठी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने किया।
रजत जयंती समारोह को यादगार बनाने के लिए हिंदुस्तानी अकादमी के सहयोग से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में महोबा के जितेंद्र कुमार चौरसिया एवं दल द्वारा आल्हा गायन की प्रस्तुति की गई।

मथुरा के अशोक, निलेश एवं दल द्वारा ब्रज संस्कृति पर मनोहरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। मिर्जापुर की श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव और दल ने कजरी गायन ने समारोह में रंगत ला दी। सुल्तानपुर के बृजेश सिंह दल द्वारा अवधि संस्कृति की बिरहा गायन की प्रस्तुति पर लोग वाह वाह करते रहे।। सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय भाषा उत्सव के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय तथा हिंदुस्तानी अकादमी, प्रयागराज के सहयोग से आयोजित किया गया।

आमंत्रित कलाकारों को अतिथियों के साथ कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह एवं हिंदुस्तानी अकादमी के सचिव श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कलाकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन सह निदेशक डॉ दिनेश सिंह ने किया। समारोह में कौशल्या नंद गिरि, पूर्व वित्त अधिकारी ए के सिंह पूर्व कुलसचिव डॉ एके सिंह, प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।


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