July 23, 2024 |

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मेजर पिता से दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन मिली विरासत में कनिका को

Sachchi Baten

राष्ट्रीय वालीबॉल प्रतियोगिता:

मिर्जापुर की कनिका की यूपी टीम ने जीता रजत पदक

-उड़ीसा के भुवनेश्वर में 22 से 26 दिसंबर के बीच आयोजित थी राष्ट्रीय विद्यालयीय वॉलीबाल प्रतियोगिता
-गोला फेंक में भी कनिका का नेशनल के लिए हुआ था चयन
-चार बार नेशनल खेल चुकी है कनिका

अदलहाट, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। कनिका की दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन व परिश्रम का कोई सानी नहीं है। उसमें राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा बिखेरने की पूरी संभावना दिख रही है। वॉलीबाल व गोला फेंक दोनों पर उसकी समान  पकड़ है। वह अदलहाट के पास घरवासपुर गांव की रहने वाली है। उसके पिता सुरेश कुमार बीएसएफ में मेजर थे।

कनिका स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में उड़ीसा के भुवनेश्वर में 22 से 26 दिसंबर के बीच संपन्न हुई राष्ट्रीय विद्यालयीय वालीबॉल प्रतियोगिता के सब जूनियर वर्ग में उत्तर प्रदेश की टीम से प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के लिए रजत पदक जीतने में कामयाब रही। फाइनल में आल इंडिया सीबीएससी स्कूल के साथ हुए रोमांचक मुकाबले में नेट अटैकर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी कनिका और उसकी टीम ने अंतिम क्षण तक लड़ाई लड़ी।लेकिन अंत में सीबीएससी स्कूल की टीम ने पलटवार करते हुए रोमांचक मैच में यूपी की टीम को 26 -25, 25-23 के अंतर से हराकर फाइनल की विजेता बनी।

ये खिलाड़ी अपनी शानदार खेल प्रदर्शन के बदौलत देश के कोने- कोने से स्पर्धा में भाग लेने आए खिलाड़ियों, उनके कोच व मैनेजरों को कल हमारा होगा का संदेश देने में सफल रहे।

कनिका एसजीएस पब्लिक स्कूल सेमरा में कक्षा आठ की छात्रा है। उसने अपने खेल का सफर 2020 में स्कूल से जो प्रारंभ किया, उसके बाद इन तीन वर्षों में कनिका ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सरदार पटेल इंटर कॉलेज कोलना के फील्ड पर तथा घर पर अपने मेजर पिता के संरक्षण में पसीना बहाकर जो कड़ी मेहनत की, आज उसी का नतीजा है कि कनिका लगातार शिखर की ओर आगे बढ़ रही है। और वॉलीबाल के साथ ही गोला फेंक की भी बेहतरीरन खिलाड़ी है।

कनिका कहती है कि उसका सपना केवल खेलना नहीं है, बल्कि यूपी व देश के लिए मेडल जीतकर अपने सपने को साकार करना है। टीम कोच पूजा राय आदर्श कन्या गर्ल्स कॉलेज इंटर का़ॉलेज गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) ने बताया कि टीम फाइनल में अच्छा खेली। दुर्भाग्य से हम स्वर्ण पदक नहीं जीत पाए। कनिका की इस कामयाबी पर मंडलीय क्रीड़ा सचिव राजवन पटेल, जनपदीय क्रीड़ा सचिव प्रवीण कुमार सिंह, प्रधान प्रदीप पटेल, सत्येंद्र सिंह आदि ने बधाई दी है।

चार बार नेशनल खेल चुकी है कनिका
छोटे से गांव से निकलकर जिस प्रकार कनिका ने कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाई है, वह किसी से छिपी नहीं है। छोटी सी उम्र में चार बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी कामयाबी है। सब जूनियर वर्ग में गोला फेंक और वॉलीबाल में पिछले वर्ष के साथ ही इस वर्ष भी दोनों ही प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर चुकी है।


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