July 19, 2024 |

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मिर्जापुर के इस गांव में कार से आना-जाना मना है, जानिए क्यों ?

Sachchi Baten

रेत का ठीकेदार खा गया रोड को ही, परेशान ग्रामीणों ने नारा दिया ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’

-सड़क के कारण ही हैसियत के बावजूद कार नहीं खरीद पा रहे सीखड़ ब्लॉक के धन्नूपुर उर्फ गोविंदपुर के लोग

-मुख्य सड़क से गांव की तीन किमी दूरी तय करने में आ जाती है छठी के दूध की याद

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। मिर्जापुर जिले के सीखड़ ब्लॉक के धन्नूपुर उर्फ गोविंदपुर के गांव की सड़क को रेत का ठीकेदार खा गया। उसे जिले के एक दबंग माननीय का संरक्षण था। अब सड़क के नाम पर सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे बचे हैं। आलम यह है कि  चुनार-कछवा मुख्य  मार्ग से तीन किलोमीटर  की दूरी तय करने में गर्मी में आधा घंटा से ज्यादा समय लगता है। बरसात में क्या हाल हाेता है, इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं।

करीब दो साल पहले इस गांव के एक दामाद नई कार से आ रहे थे। उनकी कार का चैंबर टूट गया। एक और रिश्तेदार की कार का बोनट ही टूट गया। कल्पना कर सकते हैं कि गड्ढे कितने खतरनाक हैं। तभी से इस गांव के लोगों ने अपने-अपने रिश्तेदारों से कह दिया है कि छोटे पहिए वाले वाहन से यहां न आएं। सड़क की स्थिति यह है कि अत्यंत आवश्यक एम्बुलेंस की सेवा मिलने में भी इसी सड़क के कारण देर होती है।

 

 

इस गांव में एक हजार के आसपास मतदाता हैं। स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए झूरी लाल बिंद की जाति के लोग करीब 75 फीसद हैं।। यादव मतदाता करीब 70, मांझी 150 तथा पटेल जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 130 है।

ग्रामीणों ने बताया कि गंगा में रेत खनन का पट्टा था। पट्टाधारक को जिले के एक माननीय का संरक्षण प्राप्त था। रात भर में करीब 200 ट्रक, हाइवा व डंपर निकलते थे। रोड तो उस क्षमता की थी नहीं, लिहाजा खतम हो गई। कोई विरोध का साहस जुटाता था तो उसे धमकियां मिलती थीं। एक बार इसी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चुनार-कछवा मार्ग को जाम किया तो कछवा थाने की पुलिस सभी को थाना पर उठा ले गई थी। बाद में शाम को छोड़ा। किस शर्त पर छोड़ा, यह तो कोई बताने को तैयार नहीं है, लेकिन अब सड़क पर उतरने को कोई तैयार नहीं है।

लोकसभा चुनाव के समय उनको अपनी तकलीफ हुक्मरानों तथा चुने गए जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने के लिए एक मात्र उपाय मतदान का बहिष्कार समझ में आया। सो इसकी सूचना चुनार-कछवा मार्ग पर एक फ्लैक्स लगाकर दे दी है। इस पर लिखा है- रोड नहीं तो वोट नहीं। समस्त धन्नूपुर ग्रामवासी।

थोड़ा सा इस सड़क के बारे में

यह सड़क ऐसी नहीं थी। जब से रेत खनन का ठेका हुआ, तभी से इसकी दुर्गति शुरू हुई। इस वर्ष तो अभी तक गंगा में रेत खनन का पट्टा नहीं हुआ जब  खनन होता था, तब हर रात सैकड़ों ट्रक, डंपर, ट्रैक्टर निकलते थे। उसी के कारण आज यह सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि इस गांव में आने-जाने से लोग बचते हैं। गांव के बाशिंदों की तो मजबूरी है। कोई और रास्ता भी नहीं है। चुनार-कछवा मुख्य मार्ग  पर जहां से धन्नूपुर के लिए सड़क है। वहीं पर फ्लैक्स टंगवा दिया गया है। उस पर लिखा है-रोड नहीं तो वोट नहीं। ताकि जन प्रतिनिधि देखें और अफसर भी।

 

 

 


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