July 24, 2024 |

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सिंचाई खंड चुनारः गरई नदी से बेहया साफ करने में इतनी बेहयाई ? आप भी देखें और पढ़ें..

Sachchi Baten

  1. मकसद गरई की सफाई नहीं, सरकारी खजाने पर हाथ साफ करने का

-गरई नदी में किलोमीटर 54 से 58 तक की सफाई में सरकारी धन की जमकर हुई लूट

-बिना फाइनेंसियल बिड पास हुए ही काम कराना घोर आश्चर्यजनक

ग्राउंड जीरो से राजेश पटेल (सच्ची बातें)। गरई नदी को नाला बनाने का मकसद अब धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहा है। किलोमीटर 40 से 58 तक में सफाई के नाम पर करीब 50 लाख रुपये की लूट का अनुमान है। अभियंताओं की बेहयाई देखकर नदी में खड़े बेहया उनको मुंह चिढ़ा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि इस बार की सफाई की उच्चस्तरीय जांच हो तो अधिशासी अभियंता से लेकर अवर अभियंता और ठीकेदार तक की गर्दन नप सकती है।

इस वर्ष गरई की सफाई दो चरणों में कराई गई है। पहले चरण में किमी 40 से 54 तक। दूसरे में 54 से 58 तक। शनिवार 29 जुलाई को यह रिपोर्टर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। किलोमीट 54 बिकसी पुल से शुरू होता है। 58 हुसेनपुर बीयर के पास है। बिकसी पुल से दक्षिण तरफ जितनी दूर तक दिखाई दे रहा है, या जहां तक पैदल पहुंचा जा सकता है, वहां तक की सफाई तो ठीक है। करीब 100 मीटर तक तली की सफाई दिख रही है, लेकिन  वह भी नाम मात्र की। देखें फोटो…

 

लेकिन इसके आगे बढ़ते ही सिंचाई विभाग की बेहयाई दिखने लगती है। न तो तली साफ की गई है, न किनारे के बेहया। पशुओं के आने-जाने से तटबंध पर जहां कट हो गया है, उसे भी ठीक नहीं किया जा सका है। ठेक जहां के तहां हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि करीब एक माह पहले दो दिन में काम समाप्त कर दिया गया। देखिए फोटो…

 

 

 

बिकसी चट्टी पर रहने वाले लोगों ने बताया कि सफाई कहां हुई है। कोरम पूरा किया गया है। मात्र दो दिन काम हुआ है। यदि ठीक से तली की सफाई की गई होती तो ये घास कहीं दिखती। बेहया को भी ठीक से नहीं काटा गया है।

 

असल में गड़बड़ी कहां है

पहली बात यह कि जून के आखिर में या जुलाई में किसी नदी या नाले की सफाई की योजना सफल नहीं हो सकती। पता नहीं कब पानी बरस जाए। लेकिन सिंचाई खंड चुनार के अधिशासी अभियंता से लेकर संबंधित अवर अभियंता की तिकड़ी ने लूट की इस योजना को बना दिया। यह तो अच्छा हुआ कि बिल्ली के भाग्य से छींका नहीं टूटा। मतलब बरसात नहीं हुई। गरई की सफाई कराने के लिए जो समय चुना गया, उस दौरान अक्सर बाढ़ की स्थिति रहती थी। इस वर्ष तो सूखा पड़ा है तो नदी भी सूखी है। इसीलिए अभियंताओं की बेहयाई उजागर हो रही है।

      नोनार  गांव के पास गरई की सफाई की हकीकत

 

किलोमीटर 54 से 58 तक की गरई की बेड क्लीयरेंस और बेहया कटाई के लिए टेंडर भरने की आखिरी तारीख 26 जून तय की गई थी। सभी जानते हैं कि 22 जून तक मानसून आ जाता है। दुर्भाग्य से इस साल नहीं आया। इसका फाइनेंसियल बिड 15 जुलाई को फाइनल हुआ। 15 जुलाई मानसून का पीक होता है। यदि मानसून की बरसात अच्छी हो जाती तो इसकी सफाई कैसे होती। इसका टेंडर करीब 29 लाख रुपये में फाइनल हुआ है। चार किलोमीटर में गरई की जितनी सफाई हुई है, इस पर कितना खर्च आया होगा। ग्रामीणों के अनुसार दो पोकलेन से मात्र दो दिन काम कराया गया। अंदाज लगाया जा सकता है कि कितनी लूट हुई है। इस टेंडर की निविदा संख्या 03/EE/23-24 है। 61 हजाार रुपये इसमें धरोहर के रूप में ठीकेदार से जमा करवाया गया है। आश्चर्य है कि फाइनेंसियल बिड फाइनल होने के पहले ही काम भी करा लिया गया।

 

इस कार्य के लिए छह लोगों ने भरा था टेंडर, चार टेक्निकल बिड में ही हो गए फेल

इस कार्य के लिए हनुमान प्रसाद मौर्या, कृष्णा कंस्ट्रक्शन, लालमनि मौर्या, प्रगति कंस्ट्रक्शन, रामप्यारे सिंह और श्रेया कंस्ट्रक्शन ने टेंंडर जमा किया था। इनमें हनुमान प्रसाद मौर्या व लालमनि मौर्या ही टेक्निकल बिड में पास किए गए। शेष को रिजेक्ट कर दिया गया। बता दें कि किलोमीटर 40 से 54 तक की सफाई का काम भी लालमनि मौर्या को ही मिला है।

 

स्टीमेट बनाने वाला सही या ठीकेदार

किलोमीटर 40 से 54 तक गरई की सफाई के लिए करीब 80 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया था। ठीकेदार लालमनि मौर्य ने कहा कि वह 33 लाख 21 हजार में ही मानक के अनुसार काम कर देगा। सवाल उठता है कि जिस कार्य का प्राक्कलन इजीनियर 80 लाख का बनाता हो, वह काम 33 लाख में ही हो जाए, यह कैसे संभव है। यदि संभव है तो कोई न कोई एक जरूर गलत है। यहां कौन गलत है, यह जांच के बाद ही पता चल सकता है।

 

काम के लिए समय का चुनाव ही मंशा पर संदेह उत्पन्न कर रहा है

बरसात में कहीं नदी-नाले की सफाई होती देखी है आपने। नहीं न। सिंचाई खंड चुनार में ही यह संभव है। क्योंकि चुनार तहसील के ही जमालपुर ब्लॉक के ओड़ी गांव के मूल निवासी स्वतंत्रदेव सिंह प्रदेश के सिंचाई मंत्री हैं। जुलाई माह में गरई जैसी नदी फुफकारते हुए अगल-बगल के गांवों में बाढ़ से तबाही मचाती है। इस साल की बात अलग है। अभियंताओं को भी यही उम्मीद रही होगी कि बरसात में गरई पूरे उफान केे साथ बहने लगेगी तो उसकी सफाई में किया गया उनका पाप भी बह जाएगा, लेकिन ऐसा हो न सका। धीरे-धीरे बेहयाई के पन्ने खुलने लगे हैं। नदी की तलहटी में वे बेहया खुद खड़े-खड़े गवाही दे रहे हैं कि उनको हटाने के लिए अभियंता बेहयाई की किस सीमा तक पहुंचे।

 

-कहानी अभी बाकी है। पढ़ते रहिए www.sachchibaten.com

 


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