July 24, 2024 |

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सिंचाई खंड चुनारः सरकारी राशि लूटने के लिए गरई ‘नदी’ को घोषित कर दिया ‘नाला’

Sachchi Baten

1999 में हुई सफाई के बोर्ड में लिखा है ‘नदी’, अब टेंडर में लिखा जाता है ‘नाला’

पूछने पर अधिशासी अभियंता का जवाब, बहस न करें

सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के गांव से होकर बहने वाली गरई नदी के साथ अभियंताओं का खेल

राजेश पटेल, जमालपुर (सच्ची बातें)। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के खेल निराले हैं। इसमें सिंचाई खंड चुनार सबसे आगे है। प्रदेश के सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के गांव से होकर बहने वाली गरई नदी को कब नाला घोषित कर दिया, किसी को पता ही नहीं चला।

 

दरअसल सारा खेल सरकारी लूट का है। 1999 में तत्कालीन सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह के प्रयास से नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित करके 653 लाख रुपये से नदी की सफाई कराई गई थी। इसका बोर्ड अभी भी बहुआर गांव के पास गरई नदी के पुल पर है। इस बोर्ड में गरई नदी लिखा गया है।

अभी बीते मई में गरई नदी में किलोमीटर 40 से 54 तक की सफाई के लिए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता द्वारा टेंडर आमंत्रित किया गया था। इसे विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित भी कराया गया था। इस टेंडर में साफ-साफ गरई नाला लिखा है। गरई नदी को नाला कब बनाया गया। यह प्रश्न जब सिंचाई खंड चुनार के अधिशासी अभियंता से सच्ची बातें डॉट कॉम ने किया तो उन्होंने कहा कि नदी और नाला दोनों है। और डिटेल जानकारी मांगी गई तो उन्होंने साफ कहा कि बहस न करें। उनकी कॉल रिकॉर्डिंग सच्ची बातें डॉट कॉम के पास है।

दरअसल नदी की सफाई और नाले की सफाई के नियमों में काफी अंतर है। नदी की सफाई बार-बार नहीं होती। नाले की हर साल करा सकते हैं। नालों की सफाई में ही सरकारी लूट की ज्यादा गुंजाइश होती है।

जैसे इसी बार गरई की जो सफाई हुई है, उसमें करीब 32 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। सफाई के नाम पर तलहटी की घास छीली गई है। बेहया काटे गए हैं। यदि खुदाई हुई होती तो तटबंधों पर मिट्टी दिखती। कहीं भी तटबंध पर मिट्टी नहीं है। तटबंध की मरम्मत ही नहीं कराई गई है। हसौली गांव के पास तटबंध पर जो मिट्टी दिख रही है, वह मनरेगा के तहत डलवाई गई है।

इस कार्य का निरीक्षण इलाके के विधायक अनुराग सिंह ने भी किया, लेकिन उनको भी अभियंताओं ने जो समझा दिया, वह समझ कर चले गए। दरअसल नाले की मरम्मत कराने में अभियंता दोनों हाथ से सरकारी धन लूटते हैं। जैसा इस बार गरई नदी के साथ हुआ। इसके पहले भी हुआ ही होगा। लूट की इस राशि में नीचे से ऊपर के अभियंता शामिल होते हैं, इसलिए शिकायतों का भी असर नहीं होता है।

यहांं इस खेल में माहिर सिंचाई खंड चुनार के सहायक अभियंता केके सिंह पर जिले के जनप्रतिनिधियों का वरदहस्त है। इसीलिए वह सिंचाई मंत्री के गांव से बहने वाली गरई नदी को नाला बनाने में जरा भी नहीं हिचके। स्वतंत्रदेव सिंह तो खुश हैं कि गरई नदी की सफाई हो जाने से बाढ़ के समय ठीक से जलनिकासी हो जाएगी। उनके गृह ब्लॉक जमालपुर को बाढ़ से राहत मिलेगी। लेकिन शायद ही उनको यह पता हो कि जिस नदी में उन्होंने तैराकी सीखी, वह सरकारी रिकॉर्ड में अब नाला बना दी गई है।

 

 

 

 


Sachchi Baten

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