July 24, 2024 |

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राजेश पटेल की पुस्तक : ‘तू जमाना बदल’ की भूमिका प्रभातरंजन दीन की कलम से

अनुकरणीय यदुनाथ सिंह पर सराहनीय पुस्तक

Sachchi Baten

 

 

अनुकरणीय यदुनाथ सिंह पर सराहनीय पुस्तक : प्रभातरंजन दीन

 

मैंने जितना यदुनाथ सिंह जी के बारे में जाना है, उस दृष्टि से मैं उन्हें राजनीतिक व्यक्ति नहीं, उन्हें एक क्रांतिकारी व्यक्तित्व मानता हूं। ऐसा क्रांतिकारी जो देश-समाज में आर्थिक-सामाजिक समता और सम्मान की स्थापना के लिए आजीवन जूझता रहा हो, अपमानित और प्रताड़ित होता रहा हो, जेल जाता रहा हो, चुनाव जीतता रहा हो और जन प्रतिनिधि होने के मौलिक औचित्य को हर क्षण साबित करता रहा हो। ऐसा महापुरुष जो मध्यम और निम्न वर्ग को एकजुट कर ‘जमाना बदलने’ का जतन करता रहा हो लेकिन उस प्रयास में अपने अतीत के गौरव, संस्कृति और संस्कार को भूलता न हो… ऐसा व्यक्तित्व तो वाकई प्रणम्य है।

 

ऐसे महान व्यक्तित्व के योगदान और उनकी स्मृतियों को आने वाली नस्लें भुला न दें, इसके लिए लेखक-पत्रकार राजेश पटेल ने जो प्रयास किया है, उसे रेखांकित करता हुआ मैं कहता हूं कि राजेश पटेल का यह काम उन्हें लेखक और पत्रकार, इन दोनों पायदानों के काफी ऊपर स्थापित करता है। यदुनाथ सिंह का व्यक्तित्व समाज के लिए अनुकरणीय तो है ही। साथ ही, ऐसे महापुरुष के योगदान को रोचक कथानक की तरह पुस्तक के स्वरूप में पीढ़ियों के समक्ष प्रस्तुत करने का काम राजेश पटेल के उल्लेखनीय और प्रशंसनीय पात्र होने का उच्च स्थान देता है।

 

कुछ अखबारों में राजेश पटेल के साथ काम करने का मुझे मौका मिला है… और उस अनुभव से मैं हमेशा अभिभूत रहता हूं। आज के कृत्रिम और छद्मी माहौल में मिट्टी की सोंधी खुशबू वाले मौलिक विचार का व्यक्ति कहां मिलता है? खास तौर पर पत्रकारिता में तो मौलिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति का अकाल है। क्या ऐसा कोई पत्रकार आज आपको दिखता है जो कांस के फूल देख कर आने वाले मौसम के आकलन पर खबर लिख कर किसानों को सचेत करता हो? क्या ऐसा पत्रकार आपने देखा है जो मौसम की रिपोर्टिंग को मौसम के महाकवि घाघ और भड्डरी के दोहों के उदाहरण से तथ्यपूर्ण, प्रामाणिक और सांगीतिक बनाता हो?

 

क्या ऐसा पत्रकार आपने देखा है जो सरसों के खिले हुए खेत देख कर खिलखिलाता हो और झूम कर होने वाली बारिश के बाद धान की बुवाई पर झूमता हो? क्या ऐसा पत्रकार आपने देखा है जो नीरस राजनीतिक रिपोर्टिंग हो या क्राइम रिपोर्टिंग, समाज के हित का प्रिज्म उससे कहीं भी वंचित न होता हो?

 

…हां, मैंने ऐसा पत्रकार देखा है, जिसने मेरे साथ काम किया है, इसे ऐसे कहें कि जिसके साथ मैंने काम किया है। क्रांतिकारी यदुनाथ सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर संग्रहणीय पुस्तक की रचना, राजेश पटेल के इसी मौलिक और जमीनी स्वभाव का उत्पाद है। यह राजेश पटेल की ‘ग्रास रूट’ परख ही है जो आधुनिक भ्रष्ट अनैतिक राजनीतिक दौर में नेपथ्य में धकेल दिए गए यदुनाथ सिंह जैसे नायाब व्यक्तित्व को ढूंढ़ कर निकाल लेता है।

 

ऐसा व्यक्तित्व जो लोगों से यह अपील करता रहा हो कि जनवादी बनें लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी से न जुड़ें क्योंकि सारे राजनीतिक दल और उसके नेता सत्ता-लोलुप, चुनाव-केंद्रित, भ्रष्ट और स्वार्थी हो चुके हैं। जो नेता लोगों से देश को बदलने, भ्रष्टाचार को कुचलने और ईमानदारी पर चलने का आह्वान करता हो, ऐसे व्यक्तित्व को आज की शातिर राजनीति हाशिए पर धकेल ही देती है। लेकिन राजेश पटेल जैसा लेखक-पत्रकार उन्हें खोज कर समाज के सामने प्रतिमा की तरह स्थापित करने का प्रतिमान बना देता है… इसे मैं खास तौर पर रेखांकित करता हूं।

 

(आदरणीय श्री प्रभात रंजन दीन जी देश के फायर ब्रांड पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं। ये भी अपने उसूलों से डिगने वाले नहीं हैं। शायद इसीलिए इनकी किसी भी अखबार के प्रबंधन से ज्यादा दिन तक निभी नहीं। यह कहें कि दीन सर क्रांतिकारी पत्रकार हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश के बड़े अखबारों, न्यूज चैनलों में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं।)

 

 


Sachchi Baten

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