July 16, 2024 |

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मुंहनोचवा : 2002 में दिन का चैन व रातों की नींद चुरा ली थी इसने

Sachchi Baten

समय-समय पर विभिन्न अफवाहों से काफी परेशान हुए हैं लोग

कभी काला बंदर, कभी चोटीकटवा की अफवाह उड़ी देश में

बच्चा चोरी की अफवाह ने तो कई निर्दोषों की जान तक ले ली

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। समय-समय पर फैली अफवाहों ने देश को काफी परेशान किया है। इनके ही चलते कई लोगों की जान भी चली गई। आम जनता से लेकर प्रशासन तक परेशान रहा है। आइए आज आपको बताते हैं इक्कीसवीं सदी की कुछ चर्चित अफवाहों के बारे में…

साल 2002। भयंकर सूखा पड़ा था। उमस व गर्मी भी चरम पर थी। इसी बीच जुलाई माह में लोगों के शरीर पर अचानक निशान बनने शुरू गए। लग रहा था कि किसी ने नाखून, ब्लेड या नुकीले चोंच से चोट मारी है। एक, दो के बाद इस तरह की घटनाएं आम हो गईं।

अब अफवाह फैलनी शुरू हो गई कि यह मुंहनोचवा है, जो रात में छतों पर सोए लोगों पर हमला बोलता है, फिर अचानक से गायब हो जाता है। कई लोगों ने इसे देखने का भी दावा किया। अलग-अलग लोगों ने उसकी बनावट को अलग-अलग तरीके से बताना शुरू किया था। एक कामन बात यह रही कि वह चमकता है।

अब आकाश में या पेड़ों पर चमकती चीजों की शामत आ गई। आकाश में यदि कोई तारा भी इधर से उधर जा रहा था, तो लोग मुंहनोचवा ही बताते थे। पेड़ों पर फंसी पतंगें प्रकाश पड़ने पर रात में चमकती थीं तो वहां भीड़ इकट्ठी हो जाती थी।

आलम यह हो गया था कि रात में किसी का कहीं आना-जाना मुश्किल हो गया था। शहर से लेकर गांवों में तक रात में लोगों ने टोली बनाकर पहरा देना शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि कार से कुछ लोग आते हैं, मुंहनोचवा को छोड़ देते हैं। फिर उसे लेकर वापस लौट जाते हैं। इसके कारण कार से तो रात में यात्रा करना बंद सा ही हो गया था।

कुछ स्थानों पर रात में कार से आने वालों के साथ मारपीट की घटना हुई तो प्रशासन भी हरकत में आ गया था। पुलिस व प्रशासन की गश्त रात में बढ़ा दी गई थी। हर आने-जाने वाले की सघन जांच होती थी। और तो और, प्रशासन के लोग भी मुंहनोचवा के अस्तित्व को नकारते नहीं थे। मिर्जापुर जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में तो इसकी आड़ में सोए हुए एक व्यक्ति की हत्या भी कर दी गई थी। पूरे यूपी में तो कई हत्याएं हुईं। करीब दो महीने के बाद मुंहनोचवा कहां चला गया। इसका आज तक पता नहीं चला। यह अच्छा रहा कि आज की तरह उस समय सोशल मीडिया नहीं था, नहीं तो कई स्थानों पर दंगे हो जाते।

मंकी मैन

इसी तरह से इसके एक साल पहले ही 2001 में दिल्‍ली में काला बंदर या मंकी मैन का आतंक रहा। इसकी शुरुआत दिल्‍ली के यमुना पार में हुई। खौफ इतना कि लोग घरों को छोड़-छोड़कर भाग गए। आतंक के साए में लोग घरों में दुबक जाते। बताया गया कि बंदर जैसा दिखने वाला आदमी या काला बंदर झपटकर हमला करता है। इसके लोहे के पंजे हैं, इसके पैरों में स्प्रिंग लगी है। यह आदमी को मार डालता है।

सिलबट्टे वाली बुढ़िया
मई 2015 में हरियाणा के किसी गांव से एक अफवाह ने जोर पकड़ा और यूपी, राजस्‍थान चपेट में आ गए। खबर उड़ी एक बुढ़िया रात में घरों में आकर सिल बट्टे में छेद करती है। घरों में आवाज आती है। कोई देख ले तो मार डालती है। इस खौफ में महिलाओं ने घरों से सिलबट्टे बाहर निकालकर फेंक दिए। घरों के बाहर दीवारों पर मेहंदी और हल्‍दी के थापे लगाए गए। कई महीनों तक दहशत का आलम रहा।

नानी खिलाएगी दूध जलेबी
नानी खिलाएगी स्‍टील की बाल्‍टी में दूध और जलेबी. वरना मर जाएंगे नाती-पोते, बेटी के यहां हो जाएगा अनिष्‍ट। ऐसी खबर को सुनते ही नानियां दौड़ पड़ीं और 2014 की ये सबसे बड़ी अफवाह बन गई। बच्‍चों की सलामती को लेकर नानियां भारी दहशत में आ गईं। इस अफवाह ने हरियाणा के रेवाड़ी, तावडू से शुरू होकर यूपी, राजस्‍थान और दिल्‍ली में पैर पसारे।

चोटी कटवा
राजस्‍थान में बीकानेर के नोखा से एक अफवाह उड़ी कि एक महिला की चोटी कट गई। अफवाह बढ़ते-बढ़ते हरियाणा के हिसार, मेवात, गुरुग्राम, पलवल, पुन्‍हाना होते हुए दिल्‍ली, यूपी, बिहार, झारखंड आदि प्रदेशों में फैल गई। इसमें दावा किया जाता था कि महिलाओं की चोटी अपने आप कट कर गिर जाती है। तमाम महिलाएं अपनी कटी हुई चोटी को दिखाती भी थीं।

1976 में फैली एक अफवाह के चलते बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया था अभिभावकों ने

उस समय देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी। परिवार नियोजन का कार्यक्रम तेजी पर था। उसी समय एक अफवाह फैली कि कुछ सरकारी लोग स्कूलों में आकर बच्चों को कोई इंजेक्शन दे रहे हैं। इससे बच्चों की मौत हो जा रही है। उस समय न मोबाइल  था, न सोशल मिडिया। फिर भी अफवाह तेजी से फैली। लोग तो यहां तक कहते थे कि उन्होंने अपने सामने देखा है कि फलां स्कूल में सूई लगाई गई और इतने बच्चों की मौत हो गई।

 

नोट. कवर फोटो साभार theLallantop


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