July 20, 2024 |

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भवन या कोई अन्य निर्माण कराने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है…

Sachchi Baten

एनजीटी का ऐतिहासिक फैसला, सोन नदी में यूपी से बिहार तक बालू खनन पर रोक

सोन घड़ियाल कॉरिडोर को वन्यजीव अभयारण्य बनाने का अभियान

पट्टाधारकों की बालू खनन से अवैध कमाई की भी होगी ED जांच

खेवबन्धा और कोरगी बालू साइड पर भी I.A. स्वीकृत

 

सोनभद्र (सच्ची बातें)। यदि आप भवन बनवाना चाहते हैं या कोई और निर्माण कराना चाहते हैं तो संभल जाएं। बालू के दाम आसमान पर चढ़ने वाले हैं। क्योंकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित अभिकरण) ने सोन नदी में उत्तर प्रदेश से बिहार तक बालू खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के डिहरी ऑन सोन तक सोन घड़ियाल कॉरीडोर को वन्यजीव अभयारण्य बनाने के अभिमत के साथ एनजीटी दिल्ली ने सोनभद्र के सोन नदी बालू खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। पट्टा धारकों की धारा-3 PMLA  Act के बालू खनन से हुई अवैध कमाई की जांच भी होगी। याचिकाकर्ता बिरसा मुंडा फाउण्डेशन की ओर से मुकदमा लड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक चौबे एवं संस्थान के अधिवक्ता विकाश शाक्य ने प्रेस से बातचीत में यह जानकारी दी।

शाक्य ने बताया कि बिरसा मुण्डा फाउण्डेशन की ओर से अधिकृत याची की ओर से एनजीटी दिल्ली में OA NO 818/2022 दिनांक 16 नवम्बर 2022 को सोन नदी में बालू के अवैध खनन करने सम्बन्धित याचिका सुधाकर पाण्डेय एसोशिएट्स एवं न्यू मिनरल्स इण्डिया के विरुद्ध दाखिल की गई थी। इस पर ज्वांइट कमेटी ने जाँच कर रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी, परन्तु अधिकृत याची ने याचिका व्यक्तिगत कारणों से याचिका को वापस ले लिया। अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने यह याचिका जनहित में होने की बहस की और याचिका को सो-मोटो एनजीटी ने आगे बढ़ा दिया।

उसके बाद बिरसा मुण्डा फाउण्डेशन की ऋतिशा गोड़ को अधिकृत करते हुए मध्य प्रदेश के सीधी से यूपी के सोनभद्र होते हुए बिहार के डिहरी ऑन सोन तक घड़ियाल, मगरमच्छ एवं कछुआ का अभयारण्य कॉरीडोर एवं कैमूर वन्यजीव अभयारण्य से लगे होने से जगह-जगह स्ट्रेच में बालू के खनन होने से पर्यावरण के भारी नुकसान हो रहा था। इसी मामले में IA (Intervention Application) याचिका सोन नदी में सम्पूर्ण एवं खेवबन्धा के बालू साइड जो नदियों के जंक्शन पर स्थित है, के विरुद्ध प्रस्तुत कर दी। इसी याचिका में सामाजिक न्याय ट्रस्ट की ओर से चौ. यशवन्त सिंह ने कोरगी-पिपरडीह कनहर नदी में अवैध खनन के सम्बन्ध में आइए दाखिल किया है। एनजीटी ने दोनों आइए को स्वीकार करते हुए 138 पेज का विस्तृत निर्णय गत 19 मई को सुनाया है।

उन्होंने बताया कि सोनभद्र में सोन नदी में बालू खनन को पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध करते हुये मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार तीनों राज्यों को निर्देश जारी किया है कि सोन नदी को अभयारण्य क्षेत्र में इको सेंसेटिव जोन का हिस्सा बनाये जाने पर विचार करें। संयुक्त जाँच कमेटी का पुनः गठन करते हुए सम्पूर्ण सोन नदी में सभी खनन क्षेत्रों की जाँच करने और रिपोर्ट एनजीटी को तीन माह में सौंपने का निर्देश दिया गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं सौपी जाती, तब तक खनन पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित रहेगा। एनजीटी ने पूर्व में लगाये गये जुर्माना 15 करोड़ 24 लाख को पुष्ट किया है। साथ ही पट्टाधारकों के आगे पीछे जो भी बालू के खनन में शामिल रहे हों और लाभ अर्जित किये हों, उनकी पीएमएलए एक्ट की धारा-3 के अन्तर्गत सम्पत्ति की जांच कराये जाने का भी आदेश दिया है।

अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने बताया की जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि सोन नदी में सभी बालू खनन साइडों को बन्द कर दिया जाय।

सोनभद्र नगर के एक निजी हॉल में प्रेस से बातचीत के दौरान IA याचिका कर्ता चौधरी यशवन्त सिंह, ऋतिशा गोड़ बिरसा मुण्डा फाउण्डेशन, महफूज खाँ, राजनन्दनी, पीयूसीएल के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह पटेल आदि उपस्थित रहे।


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