July 24, 2024 |

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सभी शिक्षक ऐसे ही हो जाएं तो प्राइमरी स्कूल नजर आने लगेंगे कान्वेंट की तरह

Sachchi Baten

शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में……

जानिए चंदौली जिले के प्राथमिक विद्यालय प्रथम चकिया तथा उसके हेडमास्टर के बारे में

-राजेश कुमार पटेल पा चुके हैं राज्य शिक्षक पुरस्कार

-सरकारी प्राइमरी स्कूल में प्रोजेक्टर के माध्यम से चलती है स्मार्ट क्लास

-बच्चों की संख्या सवा छह सौ, सभी के लिए है बेंच-डेस्क

 

राजेश पटेल, चकिया (चंदौली)। काश ! सरकारी प्राइमरी स्कूलों के सभी अध्यापक राजेश कुमार पटेल जैसे हो जाएं तो ‘सरकारी स्कूल और सरकारी शिक्षक’ गौरव की अनूभूति कराने लगेंगे। चंदौली जिले में प्राथमिक विद्यालय चकिया प्रथम के परिसर में जाएंगे तो आप भी वाह, बोलने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। यहां के प्रधानाध्यपक ने जनसहभागिता की बदौलत इस विद्यालय को आदर्श विद्यालय के रूप में बदल दिया। इनके इसी समर्पण भाव के कारण राज्य सरकार ने राज्य शिक्षक पुरस्कार से नवाजा है।

राजेश कुमार पटेल की नियुक्ति इस स्कूल पर प्रधानाध्यापक के रूप में 2010 में हुई। उस समय विद्यालय की स्थिति काफी दयनीय थी। बच्चों की संख्या कम थी। पटेल ने ठान लिया कि इस स्कूल को जिले में नंबर एक बनाना है। विद्यालय का कायाकल्प करने के लिए सरकारी राशि के साथ ही खुद के वेतन से काम नहीं चला तो जनसहभागिता की अपील की। इनके समर्पण भाव को देखते हुए लोगों का जमकर सहयोग प्राप्त हुआ।

आज स्थिति यह है कि विद्यालय में बच्चों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस साल करीब सवा छह सौ बच्चे हैं। आश्चर्य यह है कि सभी को बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था है। पोजेक्टर के माध्यम से स्मार्ट क्लास चलती है। कंप्यूटर का ज्ञान दिया जाता है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर सेट हैं। बच्चों की लर्निंग आउट कम में उत्तरोत्तर वृद्धि दर्ज की जा रही है। पीटी में राज्य स्तर तक यहां की टीम जा चुकी है।

संगीत के लिए वाद्य यंत्रों की व्यवस्था है। कोई भी वीआइपी आता है तो स्वागत गान के लिए इसी विद्यालय के बच्चों को बुलाया जाता है। विद्यालय की बैंड पार्टी भी है। यह पार्टी जब किसी कार्यक्रम में सड़क पर निकलती है तो लोगों के पैरों में खुद-ब-खुद थिरकन आ जाती है।

इस विद्यालय की छवि प्राइवेट से अच्छी बन गई है। इसीलिए दूर-दराज के लोग भी बसों या निजी साधनों से अपने बच्चों को यहां भेजते हैं। साफ-सुथरा परिसर। हरे-भरे पेड़। रंगी-पुती दीवारें। शुद्ध पेयजल। स्वच्छ शौचालय। स्मार्ट क्लासेस। नियमित योग। रोजाना पीटी। स्काउट-गाईड। कब-बुलबुल। संगीत का प्रशिक्षण। मतलब बच्चों को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बनाया जाता है। राजेश ने सहयोगी शिक्षकों तथा आम जन के सहयोग से विद्यालय को ऐसा बना दिया है कि इसे नजीर के रूप में पेश किया जाता है।

विभिन्न सामाजिक संस्थाओं तथा राज्य सरकार के स्तर से विभिन्न पुरस्कार दिए गए हैं। इस प्रयास के प्रेरक राजेश कुमार पटेल को राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला है।

 

 


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