July 23, 2024 |

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कबड्डी की एक बेहतरीन खिलाड़ी कैसे बनी साइकिलिस्ट?

Sachchi Baten

एशियन ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप 2024 में भारत के लिए सबसे अधिक 4 गोल्ड मेडल जीता है ज्योंति गड़ेरिया ने

-एक पैर से दिव्यांग हैं ज्योति गड़ेरिया

– आज के युवाओं के लिए मिशाल है साइकिलिस्ट ज्योति गड़ेरिया

-पैरा साइकिलिस्ट ज्योति गड़ेरिया के साथ पत्रकार डॉ. राजू पटेल की सच्ची बातें के लिए बातचीत

अदलहाट (मिर्जापुर)। बेहद गरीबी में पली-बढ़ी हैं ज्योति गड़ेरिया। महाराष्ट्र के भंडारा की पैरा साइक्लिंग खिलाड़ी ज्योति गड़ेरिया बेहद गरीब परिवार से आती हैं। उनका जन्म 29 नवंबर 1997 को महाराष्ट्र के डोंगर गांव में हुआ। उनके पिता राधे श्याम गड़ेरिया एक साधारण किसान हैं। मां उषा गडे़रिया व पिता समेत कुल सात लोग इस परिवार के सदस्य हैं। ज्योति की दो और बहनें और दो भाई हैं।

ज्योति अब उन युवा युवतियों के लिए एक मिशाल है, जिन्होंने जीवन के साथ संघर्ष किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। वर्ष 2016 ज्योति के लिए एक बहुत दुर्भाग्यवाला वर्ष था। जिसने जीवन के उम्मीदों को ही बदल दिया। कबड्डी की एक बेहतरीन खिलाड़ी से कैसे बनी साइक्लिंग खिलाड़ी। ज्योति से ‘सच्ची बातें’ के लिए पत्रकार डॉ. राजू पटेल ने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके प्रमुख अंश –

सवाल: किस चीज ने आपको साइक्लिंग की ओर प्रेरित किया? हमें अपने शुरुआती साइक्लिंग दिनों के बारे में बताएं?

जवाबः मुझे बचपन से ही साइक्लिंग का शौक रहा है। साइक्लिंग में ज्ञान और अभ्यास की कमी के कारण मेरे शुरुआती दिन बहुत कठिन थे। एक पैर से साइक्लिंग करना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था। कई लोगों की बात भी सुननी पड़ती थी।
इसके पहले मैं कबड्डी खेलती थी। सब जूनियर वर्ग में 3 बार महाराष्ट्र स्टेट के लिए खेल चुकी हूं। जिसमें तीसरा स्थान आया था। बाइक सड़क दुर्घटना ने मेरे जीवन को ही बदल दिया। इसमें मुझे अपना एक पैर गवाना पड़ा। वह बहुत मुस्किल भरा दौर था। इस दौरान एक खिलाड़ी के मानसिक तनाव को आप समझ सकते हैं कि उसके ऊपर इस घटना का कितना प्रभाव रहा होगा। इसके बाद मैं साइक्लिंग की ओर आगे बढ़ी। मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि मैं इस क्षेत्र में देश के लिए खेलूंगी। सन 2019 में साउथ कोरिया में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए पहली बार रोइंग (Rowing) में ब्रोंज मेडल जीता। उसके बाद हमने किसी चैंपियनशिप में भाग नहीं लिया। 2022 से एक नई शुरुआत की।

सवाल: कोई भाई-बहन (भाई-बहन)? यदि हाँ, तो क्या वे साइक्लिंग में समान रुचि रखते थे? आपका सबसे अधिक समर्थन किसने किया?

जवाबः हाँ, मेरी दो बहनें और दो भाई हैं। मेरे छोड़ सभी की रुचि पढ़ाई में रही है। मेरा पूरा परिवार मेरा सपोर्ट सिस्टम है, खासकर मेरे कोच जितेंद्र कुमार मेहता, जिन्होंने एक परिवार की तरह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

सवाल: बड़े होने के दौरान आपके साइक्लिंग में रोल मॉडल/प्रेरणा कौन थे?

जवाबः मैंने खुद पर भरोसा किया, मैं किसी को अपना रोल मॉडल नहीं मानती। मैंने स्वयं तय किया कि मुझे खुद अपना रास्ता तलाशना है। फिर गुरु द्रोण के रूप में कोच आदित्य जितेंद्र मेहता सर मिले और उन्होंने 2022 में हैदराबाद एकेडमी में मुझे दाखिला दिया। अगर हम कहें तो मेरे कोच ही मेरी प्रेरणा हैं। आज मैं जो हूं उन्हीं का आशीर्वाद है। मुझे प्रत्येक खेल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

सवाल:आपने साइक्लिंग के साथ-साथ अपनी पढ़ाई/शिक्षा/अन्य प्रतिबद्धताओं को कैसे पूरा किया?

जवाबः साइक्लिंग के साथ-साथ पढ़ाई का प्रबंध करना कठिन था, क्योंकि मुझे एक को प्राथमिकता पर रखना था।
12वीं की परीक्षा पास करने के बाद मैंने अपने खेल को प्राथमिकता देने का फैसला किया। स्नातक में प्रवेश लिया, लेकिन खेल के सामने उसे बीच में ही छोड़ना पड़ा। जिससे मुझे अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिला, जिससे निश्चित रूप से मुझे बहुत मदद मिली।

सवाल: आपको यह कब एहसास हुआ कि आपको साइक्लिंग के क्षेत्र में अपने कैरियर की शुरुआत करनी चाहिए?

जवाबः 2016 में दुर्घटना के बाद मैं हताश हो चुकी थी, मुझे सपोर्ट करने वाला कोई नहीं मिल रहा था। साइक्लिंग के क्षेत्र में मुझे कुछ भी पता नहीं था। एक दिन मैंने सोशल साइट पर इस खेल के बारे में कमेंट किया। इसके बाद आदित्य जितेंद्र कुमार मेहता सर ने मुझे साइक्लिंग एकेडमी में मुझे दाखिला दिलाया। तभी से उन्होंने किसी तरह मुझे कठिन चुनौतियों के बीच आगे बढ़ाने और जारी रखने की ऊर्जा दी। निरंतर अपने कैरियर को आगे बढ़ा रही हूं।

सवाल: आप कबड्डी की एक बेहतरीन खिलाड़ी थी, उस पल को आप कैसे बयां करेंगी।

जवाबः मैं उस पल को शब्दों में बयां नहीं कर सकती, यह मेरे लिए बहुत खास था। 18 वर्ष की आयु तक कबड्डी खेलना आज भी मेरी यादों में ताजा है। मैंने तीन बार स्टेट खेला और मेडल जीता। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था, जिससे मैं आज साइक्लिंग को अपना बेस्ट बना चुकी हूं।

सवाल: आप महाराष्ट्र से आती हैं। इन शहरों में महिला को लेकर आम धारणा क्या है?

जवाबः हां,मैं महाराष्ट्र से हूं, लेकिन जब तक आप सफल नहीं होते, कई लोग आप पर सवाल उठाते हैं। मैंने जब साइक्लिंग के क्षेत्र में एक कदम बढ़ाया तो मेरे ऊपर कई सवाल लोगों ने उठाए। ये कैसे खेलेगी? इसे यह सब नहीं करना चाहिए! इस दौर में एक महिला को यह सब नहीं करना चाहिए! दुर्घटना के कारण मुझे लोग बेजान समझ रहे थे। लेकिन देश के लिए मेडल जीतने पर सवाल उठाने वाले अब बधाई दे रहे है।

सवाल: आपके परिवार के सदस्य आपकी कामयाबी पर कितने खुश हैं कि अंतर्राष्ट्रीय साइक्लिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं?

जवाबः जी हां, मैं एक गरीब परिवार से आती हूं। मेरे पिता जी एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने दूसरों के खेतों में काम करके हमें नया जीवन दिया और बहन, भाइयों को शिक्षा के लिए हमेशा प्रेरित किया। मेरी कामयाबी पर मेरे पिता और घर के सभी सदस्य बेहद खुश हैं। क्योंकि यह कामयाबी मेरी नहीं, बल्कि खेत को चीरकर अन्न पैदा करने वाले किसानों की बेटियों की कामयाबी है। उन्होंने मेरा समर्थन करने, मुझे प्रेरित करने के लिए बहुत प्रयास किए थे। मुझे इस सपने को पूरा करते देखने के लिए हर समय मेरे साथ थे।

सवाल: एशियन ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में 4 गोल्ड मेडल जीतकर समग्र आत्मविश्वास बढ़ा होगा। आप कितनी उत्साहित हैं?

जवाबः हां,एशियन ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में 4 गोल्ड मेडल जीतने पर आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मुझे उम्मीद है जिस प्रकार मेरी तैयारी चल रही है, आगे भी यह जारी रहेगा।

सवाल: आपका अगला इवेंट कब है।

जवाबः जी,आगामी मार्च में ब्राजील में आयोजित होने वाली विश्व चैंपियनशिप 2024 में भाग ले रही हूं। आप सभी की दुआएं और खुद की मेहनत से मेरी हर कोशिश रहेगी देश के लिए मेडल जीतने की।


Sachchi Baten

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