July 23, 2024 |

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आरक्षण और प्रतिनिधित्व के अलावा अन्य मामलों में हिंदू एकता जारी है

Sachchi Baten

ग्राम पंचायत अधिकारी के बाद आई टेस्टिंग ऑफिसर की नियुक्ति में आरक्षण का गला घोंटा गया

भाजपा सरकार द्वारा ओबीसी, एससी, एसटी के अधिकारों पर डाका डालने का भारतीय ओबीसी महासभा ने किया विरोध

लखनऊ (सच्ची बातें) ।  ग्राम्य विकास अधिकारी (वीडीओ) पद पर ओबीसी, एसटी की हकमारी के बाद आई टेस्टिंग ऑफिसर पद के लिए भी भर्ती में ओबीसी, एससी, एसटी की हकमारी का विज्ञापन जारी किया गया है। भारतीय ओबीसी महासभा द्वारा इसका विरोध किया गया है।

महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता लौटन राम निषाद ने कहा है कि नेत्र परीक्षण अधिकारी पद के नियुक्ति विज्ञापन संख्या-06/2023 में 157 पदों के विज्ञापन में ओबीसी, एससी, एसटी के लिए उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली का अनुपालन न कर खुलेआम हकमारी की गयी है। नेत्र परीक्षण अधिकारी के 157 पदों में ओबीसी को 42 पदों के सापेक्ष 30, एससी को 32/23 पदों के सापेक्ष शून्य और एसटी को 3 पदों के सापेक्ष 2 पद ही आरक्षित किया गया है।

जबकि ईडब्ल्यूएस को 15 के सापेक्ष पूरा का पूरा 15 और सामान्य को 62/63 के सापेक्ष 110 पद देकर आरक्षित वर्ग की हकमारी की गयी है। उन्होंने कहा कि जबसे भाजपा की सरकार बनी है, खुलेआम ओबीसी, एससी, एसटी की हकमारी की जा रही है और ओबीसी, एससी, एसटी हिन्दू बनने में परेशान हैं।

ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में ओबीसी, एसटी कोटे की खुलेआम हकमारी के बाद नेत्र परीक्षण अधिकारी भर्ती विज्ञापन में ओबीसी, एसटी को आरक्षण नियमावली को दरकिनार कर कम और एससी को 33 सीटों की बजाय शून्य कर दिया गया है।

निषाद ने कहा कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा देकर वंचित वर्ग के कोटे की खुलेआम हकमारी कर रही है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारी के यूपीएसएसएससी के विज्ञापन संख्या-01/ परीक्षा/2023 के अनुसार 1468 में उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली के अनुसार ओबीसी को 396 के सापेक्ष मात्र 139 पद आरक्षित कर 257 पदों की हकमारी की गयी।

एसटी को 59 पदों के सापेक्ष मात्र 27 पद आरक्षित कर 22 पदों की डकैती की गयी। दूसरी तरफ सामान्य वर्ग को 734 पद देने की बजाय 849 पद आरक्षित कर 115 पदों का फायदा पहुंचाया गया और ईडब्ल्यूएस को 147 की बजाय मात्र 117 पद आरक्षित कर 30 पदों की हकमारी के साथ एससी को 308 की बजाय 356 पद पर यानि 48 पद अतिरिक्त दिया गया।

उन्होंने कहा कि जहां ओबीसी के 257 और एसटी के 22 पदों की डकैती की गयी, वही सामान्य वर्ग को 734 की बजाय 849 पद आरक्षित कर 115 अतिरिक्त पद दिया गया।
निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश आयुष विभाग द्वारा विज्ञापित 611 आयुष डॉक्टरों की रिक्तियां जिसके आवेदन लोक सेवा आयोग द्वारा 2 सितंबर 2022 तक स्वीकार किया, के क्रम में आरक्षित श्रेणियों की सीटों में सामान्य-435(71.2%), ईडब्ल्यूएस- 61(10%),ओबीसी 58 (9.49%),एससी को 29 (4.74%) और एसटी को 28 (4.58%) दिया गया, जो उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली के प्रतिकूल है।

यह इस बात को स्पष्ट करता है कि सामान्य एवं ईडब्ल्यूएस को मिलाकर 81.2% जबकि ओबीसी को 9.49% एवं एससी को 4.74 तथा एसटी को 4.58% सीटें आरक्षित हैं। पिछड़ों, वंचितों के वोट पर सरकार बनाने वाली भाजपा सरकार दलितों पिछड़ों का आरक्षण काटकर सारी सीटें सामान्य वर्ग को परोस रही है।

आखिर दलित-पिछड़े, आदिवासी भाजपा के आरक्षण विरोधी चेहरे को कब समझेंगे। छत्तीसगढ़ में ओबीसी को 27% आरक्षण दिए जाने के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में आदित्य तिवारी, कुणाल शुक्ला, पुनेश्वरनाथ मिश्रा, पुष्पा पांडेय, स्नेहिल दुबे, अखिल मिश्रा, गरिमा तिवारी का ही नाम शामिल है। ओबीसी, एससी, एसटी सिर्फ वोट के लिए हिन्दू होते हैं, संवैधानिक अधिकारों के लिए नहीं।

आरक्षण और प्रतिनिधित्व के अलावा अन्य मामलों में हिंदू एकता जारी है।


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