July 16, 2024 |

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युवाओं के आंदोलन के आगे झुकी सरकार, पुलिस भर्ती परीक्षा रद

Sachchi Baten

योगी सरकार ने दिया आदेश, छह माह के अंदर फिर से होगी परीक्षा

-परीक्षा के लिए परिवहन निगम की बसों में परीक्षार्थियों को मिलेगी निश्शुल्क सेवा

-पूर्ण शुचिता के साथ दोबारा परीक्षा कराने के निर्देश, पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ होगी कठोरतम कार्रवाई

 

लखनऊ (सच्ची बातें)। पेपर लीक के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

अब पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। यूपी की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। हाल में आयोजित हुए यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा को पेपर लीक होने की खबरों के बाद रद कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, छह माह के अंदर ही पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार पर हैं।

अब तक कई बड़ी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया साइट पर कहा कि आरक्षी नागरिक पुलिस के पदों पर चयन के लिए आयोजित परीक्षा-2023 को निरस्त करने तथा आगामी छह माह के भीतर ही पुन: परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते 17 और 18 फरवरी को आयोजित पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 को रद करते हुए अगले छह माह के अंदर पूरी शुचिता के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उक्त परीक्षा के संबंध में जारी एसटीएफ की जांच और अब तक की कार्रवाई की समीक्षा करते हुए शनिवार को मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने परीक्षा निरस्त करने का आदेश भी जारी कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, 17 और 18 फरवरी 2024 को सम्पन्न हुई पुलिस भर्ती परीक्षा के संबंध में प्राप्त तथ्यों एवं सूचनाओं के परीक्षण के आधार पर शासन द्वारा परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।

शासन ने भर्ती बोर्ड को यह निर्देश दिए है कि जिस भी स्तर पर लापरवाही बरती गई है उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शासन ने प्रकरण की जांच एसटीएफ से कराए जाने का फैसला लिया है, दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों अथवा संस्थाओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। शासन ने छह महीने के अंदर पूर्ण शुचिता के साथ फिर से परीक्षा आयोजित करने और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सेवा से अभ्यर्थियों को निश्शुल्क सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती के लिए 18 फरवरी को आयोजित परीक्षा के दौरान लखनऊ के कृष्णानगर स्थित एक स्कूल में परीक्षार्थी सत्य अमन कुमार के पास मिली सवालों के जवाब की पर्ची से पेपर लीक होने की आशंका जताई जा गई थी।
एफआईआर दर्ज कराने वाले इंस्पेक्टर ने भी तहरीर में सुनियोजित तरीके से पेपर लीक होने की बात लिखी थी। वहीं, परीक्षार्थी को सवालों के जवाब व्हाट्सएप पर भेजने वाले आरोपी नीरज को अब तक पुलिस नहीं पकड़ सकी है। आरोपी नीरज को प्रश्नों की जानकारी कहां से मिली, यह अहम सवाल अभी तक अनसुलझा है।
परीक्षा को रद करने के लिए प्रयागराज, लखनऊ और आगरा सहित पूरे उत्तर प्रदेश में युवाओं ने प्रदर्शन किया। उनमें खासा रोष देखा जा रहा है। समझा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के कारण सरकार युवाओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती।

Sachchi Baten

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