July 24, 2024 |

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दरिया से निकलकर नेकी आ गई खुर्शीद की मदद करने, पूरी कहानी पढ़िए…

Sachchi Baten

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों

 

राजेश पटेल, चुनार (सच्ची बातें)। कहावत है न कि नेकी कर दरिया में डाल। यह भी सच है  कि जरूरत पड़ने पर दरिया से निकल कर नेकी मदद करने आ जाती है। चुनार में इसे साक्षात देखा जा रहा है।

पढ़िए पूरी कहानी…

चुनार जंक्शन पर व उसके इर्द आप एक युवक को अक्सर देखते होंगे। वह झारखंंड के किसी जिले का रहने वाला है। इस दुनिया में उसका कोई नहीं है। लेकिन, यह कहने  भर के लिए है। वह सभी को अपना मानता हैै तथा सभी अपना मानते हैं। उसे लोग थोड़ी सी मंद बुद्धि का मानते हैं। लेकिन वह जो नेकी का काम करता है, उस तरह की नेकी कम लोग ही करते हैं।

इस नेकी के बदले वह उसका कोई स्वार्थ नहीं होता। दरअसल वह रेलवे लाइन पर घायल लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करता है। मृत लावारिश शवों की पैकिंग, उसे पोस्टमार्टम हाउस तक भेजने तथा वहां से आने पर अंत्येष्टि में अहम भूमिका निभाता है। वह किसी से कुछ मांंगता भी नहीं। कोई जो कुछ भी दे देता है, सिर माथे चढ़ाकर रख लेता है।

उसके नेकी के इस कार्य  की सभी सराहना करते हैं। वह तो नेकी कर दरिया में डाल देता है। कितने लोगों को वह अस्पताल पहुंचाया, कितने लावारिश शवों की अंत्येष्टि कराई, उसे ठीक से याद भी नहीं है। लेकिन नेकी को याद है कि खुर्शीद ने क्या किया है। इसीलिए जब खुर्शीद  को जरूरत पड़ी तो दरिया से निकलकर नेकी उसकी मदद करने आ गई।

घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है। बुधवार/गुरुवार 5 व 6 अक्टूबर की रात चुनार रेलवे क्रॉसिंग के पास वह एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया। खुर्शीद का यहां पर या कहीं पर कोई अपना नहीं है। लेकिन घटनास्थल के पाास में ही रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार राजीव कुमार ओझा को सूचना मिली तो सबसे पहले वह उसकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने जीआरपी इंचार्ज राजेश कुमार सिंह और आपीएफ के पोस्ट कमांडर सालिक के माध्यम से खुर्शीद को एपेक्स अस्पताल  ले जाने का इंतजाम किया।

एपेक्स से उसे मंडलीय अस्पताल मिर्जापुर रेफर कर दिया गया। चूंकि चोट ज्यादा थी, सो उसे वहां से भी ट्रामा सेंटर बीेएचयू रेफर किया गया। राजीव कुमार ओझा नेे ट्रामा सेंटर बीएचयू के सीएमओ डॉ. रामअवतार विश्वकर्मा से उसकी मदद करने का निवेदन किया। डॉ. विश्वकर्मा ने पूरी बात सुनी तो उन्होंने भी ऐसे इंसान की मदद करनेे की ठानी। उसे भर्ती कराकर उपचार की व्यवस्था कर दी। डॉ. विश्वकर्मा के अनुसार खुर्शीद खतरे से बाहर है। वह खुद उसकी दवा आदि  के इंतजाम में व्यक्तिगत रुचि लेंंगे। उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी। हो गई न साबित कि नेकी दरिया से निकल कर खुर्शीद की मदद करने आ गई।

 

 


Sachchi Baten

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