July 23, 2024 |

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इस खबर के बारे में गोदी मीडिया चर्चा नहीं करेगा, देखिए देश के विकास की हकीकत

Sachchi Baten

बंगलादेश से भी पिछड़ गया भारत

 

कुमार दुर्गेश


भारत की मीडिया भारतीय जनता का दुश्मन बन गया है। मीडिया का काम सच दिखाना होता है किंतु वह सच दिखाने की जगह जनता का ध्यान भटकाने के लिए कभी चीन, कभी किम जोंग उन तो कभी दुबई के शेखों की सनक दिखाता है। पाकिस्तान के टूटने की बेसिर पैर की कहानी और हिंदू मुस्लिम पर डिबेट दिखाता है। विपक्ष का मजाक उड़ाते हुए रोज टूटने की घोषणा करता है।

जब इससे भी उसे उसका पेट नहीं भरता है तो वह अंजू नसरुल्ला, सीमा हैदर और सचिन के  प्यार पर रोज स्टोरी दिखाता है। लेकिन यह कहानी भी जनता का ध्यान भटकाने के लिए कम पड़ जातीी है तो मिथिलेश भाटी जैसी महिलाओं को लेकर एक सप्ताह तक कार्यक्रम करता है, जो सिर्फ एक व्यक्ति के कद काठी को लप्पू और झिंगुर जैसा लड़का कह कर मजाक उड़ाती है।

उस महिला की इसी उपलब्धि पर टीवी वाले उसके घर तक पहुंच जाते हैं और उसे अपने स्टूडियो तक भी ले आते हैं। किंतु कभी आपने सोचा है कि इसके साथ ही आपके देश में क्या हो रहा है? देश की जनता की तकलीफे क्यों नहीं दिखाई जा रही है?

यह वह मीडिया है, जो आपको बताता है कि पूरे देश में दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। अमेरिका जर्मनी फ्रांस सभी नरेंद्र मोदी का लोहा मान रहे हैं। लेकिन इसने आपको कभी नहीं बताया कि सत्ता पक्ष के लोग जिस भारत को विश्व का सुपर पावर बनाने की मुनादी कर रहे हैं, वह भारत असल में अपने पड़ोसी राज्य बांग्लादेश से ही बुरी तरह से कई मानकों पर पिछड़ गया है। बांग्लादेश के लोगों की रहन सहन पढ़ाई की व्यवस्था भारतीयों से बेहतर है।

मीडिया यह नहीं बतायेगा कि बांग्लादेश आपसे शिशु मृत्यु दर में 21.556% हासिल कर भारत (26.619) से बेहतर स्थिति में है। बंगलादेश में महिलाओं के कामकाज में भागीदारी 42% है। जबकि भारत में 29% है। पांच साल तक के बच्चों में बांग्लादेश में कुपोषण दर 22% जबकि भारत में 31.7% है।

बांग्लादेश भारत से बेहतर स्थिति प्रजनन दर में हासिल कर लिया है। बंगलादेश में फर्टिलिटी रेट 2.0% जबकि भारत में 2.05% है।स्वास्थ्य पर जीडीपी के अनुपात में बांग्लादेश का खर्च 2.63% जबकि भारत का खर्च 2.02% हैं। अमेरिका और ब्रिटेन या यूरोप के किसी भी देश को छोड़ दीजिए। हम बांग्लादेश को भी नहीं पछाड़ पा रहे हैं ।

किंतु आपका ध्यान इस तरफ नहीं जाए, इसके लिए वो रोज आपका ध्यान भटकाता है। आप सोचिए कि भारतीय मीडिया आपका दुश्मन है या मित्र।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लेखक कुमार दुर्गेश सामाजिक चिंतक हैं।


Sachchi Baten

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