July 24, 2024 |

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चर्चे दुनिया भर में, नाम पर बन चुकी फिल्में पर उसके गांव में नाम लेने से कतराते लोग

कुख्यात ठग नटवर लाल की कहानी, उसके सिवान जिला के रुइया बंगरा गांव के निवासियों की जुबानी

Sachchi Baten

 

आशुतोष कुमार अभय, सिवान (बिहार)। बिहार के सिवान जिले के रुइया बंगरा गांव में जन्मे मिथिलेश कुमार को महाठग नटवरलाल के रूप में जाना जाता है। एलएलबी करने के बाद वह ऐसा ठग बना कि पूरी दुनिया उसका लोहा मानने लगी। उसने ताजमहल, लालकिला से लेकर संसद भवन तक को बेच दिया था।

उसके जीवन पर बनी फिल्म ‘नटवरलाल’ में नटवर लाल की भूमिका सदी के महानायक अमिताभ ने निभाई थी। सिवान में उसके पड़ोस के गांव में ही भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म हुआ था। नटवरलाल ने राजेंद्र प्रसाद के हस्ताक्षर की नकल कर भी सभी को चौंका दिया था। उनकी मौत कहां और कब हुई, इसका भी रहस्य नहीं खुल सका। आज उसके गांव में कोई उसका नाम नहीं लेना चाहता।

गांव के लोगों को फर्क नहीं 

गांव के लोग उससे कतई नाराज नहीं हैं। यह भी नहीं कहते कि उसके कारण गांव का नाम बदनाम हुआ। सभी एक स्वर में कहते हैं कि नटवर लाल ने अमीरों को ठगा, उनसे लिए रुपये से किसी गरीब कन्या की शादी कराई तो किसी की अन्य तरीके से मदद की।

नटवर लाल का भरा-पूरा परिवार

वह शान-ओ-शौकत वाली जिंदगी जीने का कायल था, सो ठगी के रुपये से ऐश भी खूब की। उसके भाई गंगा प्रसाद गोपालगंज में रहते थे। नटवर लाल की पुत्री गीता के पति अशोक वर्मा एयरफोर्स में रडार अधिकारी हैं। दो नाती हैं, इनमें एक अपोलो में डॉक्टर तथा दूसरे इंजीनियर हैं।

अपुष्ट सूत्रों के अनुसार नटवर लाल का देहांत 70 वर्ष की अवस्था में रांची में 12 दिसम्बर 2010 में हुआ । हालांकि इसे कोई जान नहीं सका। सारा कार्यक्रम चोरी छिपे किया गया, क्योंकि वह जेल से भाग चुका था।

ठगी की कहानी लोगों की जुबानी

नटवर लाल सोने की अंगूठी का शौकीन था, दोनों हाथों में अंगूठियां पहनता था। स्मार्ट और नटखट। जब पटना में पढ़ता तो ट्यूशन भी पढ़ाता था। उसी क्रम में एक फैक्ट्री मालिक के बच्चों को भी ट्यूशन पढ़ाता, पर वह ट्यूशन फी नहीं देता था। मांगने पर परेशान करने लगा तो  उसे ठगने की योजना बनाई।

एक दिन नटवर लाल ने फैक्ट्री मालिक को कहा कि मेरा एक संबंधी कोलकाता में बड़ी फैक्ट्री का मालिक है। उससे आपको सस्ते में माल दिलवा देता हूं। वह तैयार हो गया । ब्रीफकेस में रुपये ले लिए और चल दिया। जब ये लोग कोलकाता पहुंचे तो कहा कि चलिए जीएम से बात करते हैं।

बोला कि ब्रीफकेस आप ले लें, मिथिलेश उर्फ नटवर लाल ब्रीफकेश लेकर आगे-आगे चलने लगा। फैक्ट्री मालिक से कहा कि आप कुर्सी पर बैठें, मैं जीएम को देखकर आता हूं। जीएम के ऑफिस में घुसा और पीछे से निकल गया। फैक्ट्री मालिक इंतजार करते-करते थक गया और अंत में घर लौट आया। यही से ठगी की शुरुआत हुई ।

नटवर लाल तर्क में भी माहिर था। एक बार छपरा में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ले जाया गया तो वहां कहा कि श्रीमान मेरा नाम मिथिलेश है। पुलिस ने नटवर लाल के नाम पर मुझको पकड़ा है, सो मुझे छोड़ दिया जाए, इस पर कोर्ट ने उसे छोड़ दिया।

एक बार किसी मिठाई वाले से जाकर बोला कि दो लाख लड्डू चाहिए एवं उसे कुछ रुपये एडवांस दे दिए । मिठाई वाले ने कहा कि आपका माल कल मिल जाएगा। अगले दिन नटवर लाल सोनार की दुकान पर गया। जिस शहर में जाता वहां के सबसे महंगे होटल में ठहरता। साथ में एक सुंदर औरत रखता था। उसका इस्तेमाल ठगने के लिए करता।

सोनार की दुकान पर महिला को लेकर पहुंचा एवं दुकानदार से बोला कि  मैडम को इनकी पसंद के गहने दो। दो लाख रुपये के गहने ले लिए एवं सोनार से बोला कि मुनीम को मेरे साथ गहने समेत भेजो। अमुक दुकान पर मेरे दो लाख रुपये रखे हुए हैं।

ये लोग मिठाई की दुकान पर गए तो नटवर लाल बोला कि मेरा दो लाख माल तैयार है। दुकानदार ने कहा, हुजूर गिनती हो रही है। आधे घंटे लगेंगे। नटवर लाल ने कहा कि सारा माल मुनीम जी को दे दीजिएगा । इस तरह वहां से गहने लेकर चल दिया। अब मुनीम व दुकानदार लड्डू लेकर रो रहे थे।

गांव के लोग कहते हैं कि हमलोग नटवर लाल के किस्सों को सुनकर बहुत ही रोमांचित होते हैं। देश-विदेश के कई ठगों के बारे में सुना और पढ़ा है, लेकिन मेरे गांव के मिथिलेश जैसा कोई नहीं हुआ। वह जीनियस थे।

नटवर लाल पढ़े-लिखे थे। किसी का भी हस्ताक्षर देखकर हूबहू कर देते थे। गांव वाले कहते हैं कि उन्होंने क्षेत्र में किसी को नही ठगा है। यह भी सुना है कि संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और ताजमहल तक को उन्होंने बेच दिया था। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी नटवर लाल द्वारा बनाए गए उनके हस्ताक्षर को देख चौंक गए थे।

 


Sachchi Baten

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