July 24, 2024 |

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कन्या भ्रूण हत्या जघन्य पाप है -संत भरत गिरि

Sachchi Baten

गर्भाधान से लेकर अंतिम संस्कार तक का विधिवत पालन किया जाए-स्वामी धर्मराज महाराज

श्रीकृष्ण के बरही संस्कार पर हुई संगोष्ठी

मिर्जापुर (सच्ची बातें)। भगवान श्री कृष्ण के बरही संस्कार के अवसर परआयोजित धर्मसभा में जुटे साधु-संतों ने कहा कि सनातन संस्कृति में वर्णित संस्कारों को अपनाकर समाज का स्वरूप तेजस्वी किया जा सकता है। सनातन संस्कृति में वर्णित संस्कारों से विमुख होने के चलते सर्वत्र अराजकता का माहौल है । भारतीय ऋषियों महर्षियों द्वारा बताए गए मार्ग हर दृष्टि से लाभप्रद हैं, परन्तु पश्चिमी सभ्यता के अंध अनुकरण के चलते सनातन धर्म पर आघात हो रहा है। जबकि हमारा देश विश्वगुरु था। यदि सनातन संस्कृति में उल्लिखित षोडष संस्कारों का अनुपालन लोग करने लगे तो ऊर्जा का वह संचरण होगा कि पुनः भारत की स्थिति पहले जैसी हो जाएगी।

शनिवार, 16 सितंबर को ‘सनातन परंपरा में षोडश संस्कारों की महत्ता‘ विषय पर एक संगोष्ठी मिर्जापुर नगर से 20 किमी दूर बरकछा ग्राम में स्थित बालनाथ आश्रम में हुई। इस अवसर पर आश्रम के महंत स्वामी धर्मराज महराज ने कहा कि षोडष संस्कारों में गर्भाधान से लेकर अंतिम संस्कार तक शामिल है।

चूंकि प्रथम संस्कार सन्तानोत्पत्ति का है, इसलिए निषिद्ध तिथियों में पति-पत्नी का संबन्ध वर्जित किया गया था। इसमें एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, रविवार, विशेष पर्वों एवं ग्रहण आदि के साथ दिन के समय को विशेष रूप से वर्जित किया गया था। इसका कारण है कि इन दिनों खगोलीय प्रभाव विपरीत पड़ते हैं। इससे गर्भस्थ सन्तान का जीवन प्रभावित हो सकता है।

धर्मदास महराज ने कहा कि बरही, अन्नप्राशन, मुंडन आदि के लिए शुभमुहूर्त पर गौर करना ही चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के अंशावतार होने के कारण उनका रूप इतना तेजस्वी था कि करोड़ों कामदेव उनके रूप के आगे फीके थे। महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन विलक्षण है, अतः इसका संरक्षण प्रयत्नपूर्वक करना चाहिए।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते विंध्य सन्त मण्डल के अध्यक्ष भरत गिरि ने कन्या भ्रूण हत्या को जघन्य पाप बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले परिवार तथा सहयोग देने वाले चिकित्सक के परिवार को कभी न कभी दंड ईश्वर देता है। ऐसे लोगों को हत्यारा मानना चाहिए।

अन्य वक्ताओं में शिवनाथ महाराज, राधेदास महाराज, जनकन्दन महाराज आदि भी शामिल थे। धन्यवाद ज्ञापन मण्डल के कोतवाल तेजबली दास तथा संचालन सलिल पांडेय ने किया। इस अवसर पर भजन कीर्तन तथा सन्तों का भण्डारा भी आयोजित किया गया।


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