July 24, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

पिता ने रामेश्वरम में सपना देखा, बेटा ने बनारस में किया साकार

Sachchi Baten

इतिहास लिखना होगा, नहीं तो पीढ़ियां भुला देंगी

समाज के सहयोग से खड़ा कर दिया भव्य सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास

-मिर्जापुर जिला के जमालपुर ब्लॉक के ओड़ी गांव के निवासी थे डॉ. बलिराम सिंह

-समाज के उत्थान के लिए किया अपना पूरा जीवन समर्पित

राजेश पटेल, जमालपुर, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। डॉ. बलिराम सिंह अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने रामेश्वरम ले गए थे। वहीं पर उनके पिताजी ने एक सपना देखा। काश, बनारस में भी अपने समाज के रात्रि विश्राम के लिए एक स्थान होता। चूंकि सपना जागृत अवस्था में देखा था। वे बुजुर्ग हो चुके थे। इसलिए इसे साकार करने की जिम्मेदारी बेटे डॉ. बलिराम सिंह ने ली। बनारस आते ही उसे साकार करने की कोशिशें शुरू कर दीं। आज डॉ. बलिराम सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वाराणसी के तेलियाबाग में स्थित सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास समाज के प्रति उनके योगदार की जीवंत गवाही दे रहा है।

डॉ. बलिराम सिंह मिर्जापुर जिला के जमालपुर ब्लॉक के ओड़ी गांव के निवासी थे। उनका जन्म एक किसान परिवार में जनवरी 1930 में हुआ था। पिता अशर्फी सिंह माता का नाम अलियारी देवी था। परिवार में संपन्नता थी। सो बनारस में भी घर पहले से ही था। लहुराबीर के चौराहे पर उनका चौधरी मेडिकल स्टोर आज भी है।

डॉ. बलिराम सिंह के सुपुत्र मनोज सिंह ने बताया कि रामेश्वरम में रुकने के लिए धर्मशाला की अच्छी व्यवस्था थी। दादा जी ने ही उस समय चर्चा की थी कि हमारे जमालपुर क्षेत्र से भी काफी लोग खरीददारी करने, दवा कराने, पढ़ने या अन्य कार्य से अक्सर बनारस आते-जाते रहते हैं। रुकने की कोई व्यवस्था न होने से सभी को काफी परेशानी होती है। उस समय सड़क व गंगा पर पुल न होने से बनारस जाने में काफी समय लग जाता था। उसी दिन लौटना भी पड़ता था। क्योंकि रात्रि विश्वाम के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसा ही धर्मशाला बनारस में भी बनना चाहिए।

पिताजी की बात को डॉ. बलिराम सिंह ने गांठ बांध लिया। ठान लिया कि बनारस में भी भव्य धर्मशाला बनेगा। वहां से लौटते ही इस पर कार्य शुरू कर दिया। समाज के लोगों से सहयोग लेकर पहले तेलियाबाग में जमीन खरीदी। फिर 1960 में सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवासी की आधारशिला रखी गई। उस समय बाबतपुर के रामखेलावन सेठ मुरब्बा वाले तथा भदावल की धनपत्ती देवी ने शिलान्यास किया था। इसके बाद धीरे-धीरे लोग आगे आते गए और कमरे बनने लगे।

डॉ. बलिराम सिंह ने इसमें सभी का सहयोग लिया, जो करना चाहते थे। वह आजीवन इस संस्था के अध्यक्ष भी रहे। मंत्री बदलते रहे। सामाजिक कार्यों को देखते हुए डॉ. बलिराम सिंह को अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा का अध्यक्ष भी चुना गया। इस पद पर वह लंबे समय तक रहे। महासभा की मासिक पत्रिका कूर्म क्षत्रिय जागरण का संपादन भी डॉ. बलिराम सिंह ने लंबे समय तक किया। सिर्फ बनारस क्यों, मिर्जापुर जिला के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल विंध्याचल धाम में भी सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास का भव्य निर्माण इनकी ही प्रेरणा से संभव हो सका। यही कारण है कि कालांतर में डॉ. बलिराम सिंह को पूर्वांचल का लौह पुरुष कहा जाने लगा। आठ नवंबर 2020 को इस महामानव ने आखिरी सांस ली।

 

 


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.