July 20, 2024 |

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दिल्ली बॉर्डर पर ही नहीं, मिर्जापुर में भी किसान हैं धरना पर

Sachchi Baten

अहरौरा टोल प्लाजा हटाने की है मांग, 52 दिनों में मिला आश्वासन से ज्यादा कुछ नहीं

-जिलाधिकारी की संस्तुति भी बेकार, किसान अड़े लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई

राजेश पटेल, अहरौरा/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। जनाब! दिल्ली-पंजाब सीमा पर ही नहीं, मिर्जापुर और सोनभद्र की सीमा के पास भी किसानों का एक धरना चल रहा है। फर्क इतना है कि वहां दिल्ली में प्रवेश करना चाहते हैं, यहां स्थानीय लोगों की सड़क पर आवाजाही मुफ्त कराना चाहते हैं।

बात हो रही है अहरौरा टोल प्लाजा की। भारतीय किसान यूनियन के नेता इसे अवैध करार देते हुए हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए बीडीओ, एसडीएम, जिलाधिकारी, कमिश्नर सभी के दरवाजे खटखटाए, लेकिन राहत नहीं मिली। पूर्व जिलाधिकारी ने जरूर किसानों की मांग को समझा और टोल प्लाजा पर मिर्जापुर नंबर यूपी 63 वाले छोटे वाहनों से टैक्स न लेने का आदेश जारी किया। लेकिन, एक दिन भी उनका आदेश नहीं चला।

इसके बाद भारतीय किसान यूनियन ने 26 अक्टूबर 2923 से टोल प्लाजा के पास ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। यह धरना पांच नवंबर 2023 को तब स्थगित किया गया, जब एडीएम वित्त एवं राजस्व सूर्य प्रताप शुक्ला ने धरना स्थल पर आकर आश्वासन दिया कि 20 दिन में इस समस्या का हल निकाल लिया जाएगा। किसानों ने इस शर्त पर धरना स्थगित किया था कि यदि 20 दिन में हल निकलता तो फिर से धरना शुरू किया जाएगा।

20 दिन बीत गए। 26 नवंबर को फिर धरना शुरू कर दिया गया। इस बार धरना एक 27 दिसंबर तक चला। फिर से वही आश्वासन। प्रशासन द्वारा समय मांगा गया। किसानों ने दिया। फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात। इस बार 19 फरवरी से फिर धरना शुरू कर दिया गया है। इस बीच किसानों ने जिला मुख्यालय पर ट्रैक्टर मार्च निकाल कर प्रदर्शन भी किया।

किसानों का कहना है कि ट्रैफिक लीकेज बंद करने के नाम पर यहां टोल प्लाजा लगाया गया। अब पुरुषोत्तमपुर में टोल प्लाजा बन जाने से लीकेज बंद हो गया। लिहाजा इसे हटाया जाए। टोल प्रबंधक का कहना है कि टोल प्लाजा भले ही दो स्थानों फत्तेपुर तथा अहरौरा में है, लेकिन टैक्स एक पर ही देना होता है। इस पर किसानों का कहना है कि बनारस से आने वालों के लिए तो यह ठीक है, इसमें पिस रहे हैं स्थानीय। निर्धारित टोल मुक्त परिधि के दायरे में आने के बावजूद टोल टैक्स देना पड़ रहा है। यह मान लिया जाए कि बनारस की ओर से आने वाला जो वाहन फत्तेपुर में टोल टैक्स अदा नही किया, वह स्थानीय है। यानि अगल-बगल से ही फोरलेन पर आया होगा।

किसानों की यह बात जायज है। इसे अधिकारी भी मानते हैं। लेकिन पता नहीं कहां से दबाव है कि टोल की वसूली बदस्तूर जारी है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि लड़ाई अंतिम दम तक लड़ी जाएगी। अहरौरा से अवैध टोल प्लाजा को हटाना होगा। यदि प्रशासन इस मांग को नहीं मानता तो इसका साइड इफेक्ट आने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। धरना पर भाकियू के जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, महेंद्र सिंह, गुलाब यादव, अमरनाथ, कल्लू यादव, पारस अग्रहरि, चंदन मौर्य, मनीष यादव, सुजीत, रिजवान उर्फ बबलू, बाबूलाल, बमबम सिंह चौहान, कमला मौर्या, अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह, वीरेंद्र सिंह आदि बारी-बारी से बैठते हैं। मौसम कैसा भी हो, किसान रात-दिन धरना स्थल पर डटे हैं।

 


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