July 19, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

इलेक्टोरल बांडः चुनावी चंदे की जानकारी देने में एसबीआइ की टालमटोल

Sachchi Baten

एसबीआइ ने जानकारी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा

-सुप्रीम कोर्ट ने दिया था छह मार्च तक का समय

-राहुल गांधी का आरोप-नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है

 

नई दिल्ली (सच्ची बातें)। भारतीय स्टेट बैंक की बात यदि मान ली गई तो लोकसभा चुनाव के पहले देश को नहीं पता चल सकेगा कि इलेक्टोरल बांड के माध्यम से पार्टियों को किसने चंदा दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी शेयर करने के लिए 30 जून तक का समय मांगा है।

SBI ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर कहा है कि सभी बॉन्ड खरीद से जानकारी जुटाने और उसे मैच कराने में लंबा समय लगेगा। 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दे दिया था। साथ ही तत्काल प्रभाव से नए इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने पर भी रोक लगा दी गई थी।

SBI को बॉन्ड खरीद-बिक्री से जुड़ी जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग के पास जमा करने को कहा गया था। इसमें 12 अप्रैल 2019 के बाद से जारी इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर जानकारी जुटाने का आदेश था। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वो 13 मार्च तक इस जानकारी को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करे। इसमें सभी बॉन्ड की खरीद की तारीख, खरीदने वालों का नाम और रकम की जानकारी देनी है। साथ ही इसके जरिये किन राजनीतिक दलों को पैसे मिले, ये जानकारी भी दी जाएगी।

SBI ने क्या दलील दी है?

अब जानकारी जमा करने की तारीख से दो दिन पहले एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अपने आवेदन में बैंक ने बताया कि 12 अप्रैल 2019 से 15 फरवरी 2024 के बीच 22, 217 इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किये गए थे।

एसबीआई की ओर से उसके अधिवक्ता अधिवक्ता संजय कपूर ने कोर्ट में बताया कि इसमें ‘कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां’ हैं। उन्होंने कहा कि दानदाताओं की पहचान गुमनाम रहे, इसके लिए काफी उपाय किए गए हैं। चुनावी बांड की “डिकोडिंग” और दानकर्ता का दान से मिलान करना एक जटिल प्रक्रिया होगी। यहां की गई खरीदारी का विवरण शाखाओं को किसी एक स्थान पर केंद्रीय रूप से बनाए नहीं रखा जाता है। दो अलग-अलग फाइलो में दर्ज किया जाता था।.ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दाताओं की गुमनामी सुरक्षित रहेगी।

कोर्ट को बताया कि बैंक के अलग-अलग ब्रांच से इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद से जुड़ी जानकारियां, मसलन – खरीदने वाले का नाम, जारी करने की तारीख, जगह यानी ब्रांच, बॉन्ड की रकम, बॉन्ड नंबर – इन सबकी डिटेल्स किसी एक जगह पर नहीं है।

बैंक ने कोर्ट को बताया कि अलग-अलग ब्रांच से बॉन्ड की बिक्री के बाद उसे सीलबंद लिफाफे में मुंबई SBI मुख्यालय में जमा किया गया था। दो अलग स्टोर में इलेक्टोरल बॉन्ड के करीब 44,000 ऐसे बंडल रखे हुए हैं। इसलिए इसको डिकोड करने और उसे मिलान कर सही जानकारी देने के लिए 6 मार्च की डेडलाइन काफी नहीं है।

राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

एसबीआई की इस अपील पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल ने लिखा,

“जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड का सच जानना देशवासियों का हक है, तब SBI क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी सार्वजनिक न हो पाए? एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है। देश की हर स्वतंत्र संस्था ‘मोडानी परिवार’ बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है। चुनाव से पहले मोदी के ‘असली चेहरे’ को छिपाने का यह ‘अंतिम प्रयास’ है।”

https://x.com/RahulGandhi/status/1764675264171102582?s=20


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

3 Comments
  1. CompanyRegistar.com says

    Hello

    This will greatly impact your page rank, the more increased directories your company is listed

    in, locally or globally, the greater your back links you have and the better you rank in Google – Yahoo – Bing.

    Never has it been easier to promote your site

    Just a few inputs and our program willl do the rest. No more struggling about CAPTCHAs – email

    verification or manual link building.

    We’ve automed everything that we could have to make submitting your domain a

    breeze.

    See your website on the first page.

    We will register your domain to numerous directories and give you a detailed

    report on the status of each submission. Although we have automated the submission process to

    a large extent, some of the submissions may require manual mail validation which could cause a slight

    delay.

    Making your life simpler

    CompanyRegistar.com

  2. Elliot Hoyt says

    A local store or a multinational chain, we build mobile Apps at crazy prices. We convert your website into an App.

    Android ($50)
    iOS ($50)

    Get your free consultation here:

    https://forms.gle/hbayvMrG3N7u2Rbu9

  3. Deandre Rayner says

    Hi,

    This is crazy, we are building mobile Apps for $50.

    Get your iOS and Android App!

    Why are we doing this? Well, we are building a lot for cheap.

    Visit us https://pcxleads.com/welcome.php?domain=sachchibaten.com

Leave A Reply

Your email address will not be published.