July 19, 2024 |

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नींद न देखे ठांव-कुठांव, भूख न देखे जूठा भात, इश्क न जाने जात-कुजात

Sachchi Baten

“भूख त छूछ का, नींद त डासन का”

नींद व भूख का मनोविज्ञान

नींद न देखे ठांव-कुठांव, भूख न देखे जात-कुजात। भूख त छूछ का, नींद त डासन का। हिंदी की ये कहावतें ऐसे ही नहीं कही गई हैं। यदि जबरदस्त भूख लगी है तो नून – भात भी खूब अच्छा लगता है। कचकचा कर नींद आ रही है तो बिन बिस्तर भी खूब अच्छी नींद आती है। बहुत से लोग यह कहते मिल जाएंगे कि “जरा सा भी डिस्टर्बेंस हो, शोरगुल हो तो हमें नींद नहीं आती” और बहुत से लोग ऐसे भी हैं कि बिस्तर पर लेटे नहीं कि खर्राटें भरने लगते हैं।

एक जमाना वो भी था

कुआर (आश्विन) के महीने में जब खेतों में पानी रेंगाना पड़ता था तो आज भी वो मंजर याद है कि रात में नींद आने पर खेत की मेंड़ पर गमछा बिछा कर सो जाते थे। यह याद नहीं है कि मच्छर काटते थे कि नहीं। आज एक भी मच्छर मच्छरदानी में घुस जाय तो नींद नहीं आती।

इस साल हमारे इलाके मिर्जापुर जनपद और आसपास के जिलों में बहुत कम बारिश हुई है। इतनी कम कि सावन बीता गया और अभी खेतों की बोरिंग में पानी की सतह 20-22 फीट से ज्यादा नीचे ‌है। जिन सक्षम किसानों ने बड़ी बोरिंग करवाकर सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था कर ली है, वो अपने खेतों की सिंचाई कर पा रहे हैं।

बाकी किसानों में जो बहुत हिम्मती हैं, वो अपनी पुरानी बोरिंग के पास 8-10 फीट गहरा गड्ढा खोद कर एक पंम्पिंगसेट वहां लगा रहे हैं और रात – रात भर जाग रहे हैं। कोई साथी है तो पारी-पारा इस उमस भरी गर्मी वाली रातों में खेतों की मेंड़ पर या पास के बगीचे में सो जा रहे हैं। उन्हें नींद की समस्या नहीं है और न ही यह पता चल पा रहा है कि मच्छर काटते हैं या नहीं।

नींद की समस्या आमतौर पर खाते-पीते, सुख-सुविधा से अघाए हुए लोगों को है। अभी इस उम्र में भी नींद की समस्या फिलहाल नहीं है। वैसे भी जिनके पास रोज़मर्रा की जरूरतों से बहुत ज्यादा धन नहीं है, आमतौर पर उन्हें नींद की समस्या भी नहीं है।

वैसे बताना यह है कि नींद दो तरह की होती है 

पहला REM (Rapid Eye movement) Sleep ‘अर्ध निद्रा’, जिसमें आंख की पुतली तेजी से घूमती रहती है। अक्सर इस अवस्था में लोग सपने देखते हैं, कभी बहुत हसीन सपने भी देखते हैं, कभी बिस्तर पर पेशाब भी कर देते हैं और कभी-कभी डरावने सपने भी देखते हैं और पसीने-पसीने हो जाते हैं, चौंक कर जग जाते हैं। करवटें बदलते हैं। पेशाब करने जाते हैं। वैसे तो नियमित अंतराल पर ‘गहरी निद्रा’ के बाद छोटी सी ‘अर्ध निद्रा’ की स्थिति आती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

दूसरा NREM (Non rapid eye movement) Sleep ‘गहरी निद्रा’. पुतलियां स्थिर होती हैं। आदमी एकदम गहरी नींद में होता है. इसी को गांव देहात में कहते हैं कि “सुता – मुआ एक समान”। ‘गहरी निद्रा’ लगभग 1.5 घंटे की होती है।

हर गहरी निद्रा के बाद 10 – 15 मिनट की ‘अर्ध निद्रा’ का दौर आता है। अक्सर फिर से व्यक्ति गहरी निद्रा में चला जाता है। कभी-कभी अर्ध निद्रा लंबी खिंच जाती है। इसी अर्ध निद्रा में लोग सपने देखते हैं।

किसी-किसी दिन आप सुबह जागने पर देखते हैं कि बेडशीट का हुलिया एकदम बदला हुआ है। तकिया, इधर से उधर हो गई है। किसी ने लिखा है  – “बिस्तर की सिलवटों से महसूस हो रहा है,  कटी है रात बेचैनी में करवट बदल बदल के”।

यानि कि गहरी निद्रा नहीं आई। कुछ होमियोपैथिक चिकित्सकों का कहना है कि आदमी के सपने में जो बातें, घटनाएं आती हैं, वो उनकी मन:स्थिति को जानने का सबसे अच्छा तरीका हैं। मुजफ्फरपुर  के एक होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. बी.आर. कुमार फिज़िकल लक्षणों और मानसिक लक्षणों को मिलाकर ही दवा का निर्धारण करते थे।मानसिक लक्षणों को जानने के लिए  कुछ-कुछ रोगियों को एक पुस्तिका देते थे सपने लिखने के लिए। मुझे भी दिए थे।

सपने अक्सर भूल जाते हैं। लेकिन उनका कहना था कि आप अर्ध निद्रा में होते हैं, सपने आते हैं। सुबह जागने पर कुछ याद रहते हैं हल्का-सा, अक्सर सपने जल्दी ही भूल जाते हैं। उनका कहना था कि रात में जब सपने आएं, उसी समय आंखें बंद किए किए सपने को रिपीट कर दीजिये तो तुरंत नहीं भूलता और आप उसे लिख सकते हैं।

सपने तो सपने हैं, ये कब अपने हैं। सभी ज्यादा से ज्यादा धन दौलत कमाने, संग्रह करने में दिन रात लगे हैं। उसी अनुपात में नींद नहीं आने की समस्या है। कुछ लोगों को वास्तविक बीमारी भी है। कुछ शारीरिक श्रम करिए। मस्त रहिए। तभी अच्छी नींद आएगी और स्वस्थ रहिएगा।

-श्रीपति सिंह, एम फार्म, (बीएचयू)


Sachchi Baten

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