July 20, 2024 |

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अहरौरा का टोल प्लाजा सही है या गलत, बताए जिला प्रशासन

Sachchi Baten

सत्ता पक्ष के लिए महंगा साबित हो सकता है किसानों का धरना

-लगातार एक माह हो गए धरना पर बैठे, नहीं टूट रही तंत्र की तंद्रा

-वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर अहरौरा में अवैध टोल प्लाजा का कर रहे विरोध

अहरौरा/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। बीस किलोमीटर के अंदर दो टोल प्लाजा हो सकते हैं क्या। नियमतः ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन मिर्जापुर है। यहां सब संभव है। जिला प्रशासन काे धन्यवाद देना चाहिए कि उसने एक माह से किसानों के धरना में पुलिस का खलल नहीं डाला। किसान खुद थक जाएंगे।

वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के फोरलेन बनते समय डीपीआर में फत्तेपुर टोल प्लाजा बनना था। वह बना भी। हालांकि स्थानीय लोगों को टोल से मुक्त करने के लिए उस समय भी आंदोलन किया गया था, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

अब करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर अहरौरा वनस्थली महाविद्यालय के पास एक और टोल प्लाजा बना दिया गया है। इसके लिए लीकेज को बहाना बनाया गया। बात भी सही थी। तमाम वाहन अहरौरा से जमुई होते हुए बनारस की ओर निकल जाते थे। अब तो पुरुषोत्तमपुर में भी टोल प्लाजा बन गया है, लिहाजा लीकेज की समस्या पूरी तरह से समाप्त हो गई। इसी के साथ अहरौरा के टोल प्लाजा की भी प्रासंगिकता खत्म हो गई। फिर भी यहां वसूली जारी है।

इसी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन की जिला इकाई ने गत 26 अक्टूबर को टोल प्लाजा के पास ही बेमियादी धरना शुरू किया। पांच नवंबर को एडीएम धरना स्थल पर पहुंचे और समस्या के समाधान के लिए 20 दिनों का समय मांगते हुए धरना स्थगित करने का अनुरोध किया। नियत तिथि तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 20 दिन बाद 26 नवंबर से फिर धरना शुरू कर दिया गया। जो अभी तक जारी है। इस दौरान बारिश हुई। भीषण ठंड पड़ रही है। किसान रात-दिन डटे हुए हैैं।

इसका दुःखद पहलू यह है कि धरना-2 के एक माह हो गए। जिला प्रशासन से न कोई अधिकारी वार्ता करने पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि। वैसे जहां पर धरना चल रहा है और टोल प्लाजा जहां है, वह स्थल मड़िहान विधानसभा में आता है। यहां के विधायक रमाशंकर पटेल हैं। जो योगी-1 सरकार में विद्युत राज्य मंत्री भी थे। उन्होंने भी आते-जाते किसानों का हालचाल नहीं लिया।

जिला  प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के उपेक्षात्मक रवैये से परेशान किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। 25 दिसंबर को धरना स्थल पर ही बैठक कर 27 दिसंबर को टोल प्लाजा तक मार्च निकालने का निर्णय लिया गया। उस दिन क्षेत्र के हजारों किसान मार्च में शामिल होंगे।

यह सब तो ठीक है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सरकार और जनप्रतिनिधि किसानों को क्या समझ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि किसान सागर की तरह शांत रहता है, लेकिन जब उसमें हलचल होती है तो ज्वार भांटा आता है। किसान हनुमान है, जिस दिन उसे अपनी ताकत का अहसास होगा, किसान विरोधियों की लंका का जलना तय है। किसान तालाब के ठहरे हुए पानी जैसा है, कंकड़ फेंकने पर लहरें उठने लगती हैं।

अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने कहा कि किसानों का सिर्फ यही कहना है कि सरकार की ओर से बताया जाए कि उनकी मांग गलत है या सही। यदि मांग गलत है तो किसान माफी मांग लेंगे। सही है तो टोल प्लाजा को हटाया जाए।

25 दिसंबर को धरना स्थल पर हुई बैठक में भारतीय किसान यूनियन के  प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह किसान, जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, मंडल अध्यक्ष अनिल सिंह, जिला महासचिव वीरेंद्र सिंह, अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह सहित काफी संख्या में किसान उपस्थित थे।


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