July 16, 2024 |

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बेटी और पत्नी ने दिया ऐसा दान, रविप्रकाश की बच गई जान

Sachchi Baten

बेटी वीणा ने दिया था लीवर, तो पत्नी सरिता ने दी किडनी

पिता ने बुढ़ौती की लाठी के लिए बेची जमीन और मकान तो बची रविप्रकाश की जान

राजेश कुमार दूबे, जमालपुर मिर्जापुर (सच्ची बातें)।  कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…इस तरह के तमाम  कहावतों व स्लोगन को सच साबित किया है क्षेत्र के बहुआर गांव की बिटिया वीणा उपाध्याय ने। इन्होंने पिता को लीवर तो पत्नी सरिता तिवारी ने किडनी दान कर ब्रह्मदेव उर्फ रविप्रकाश तिवारी के जीवन की खेवनहार बनी है। बीणा उपाध्याय अपने बीमार पिता ब्रह्मदेव तिवारी को एक जुलाई वर्ष 2016 को अपना लीवर देकर अनुपम मिसाल कायम की है।

             किडनी दान करने के बाद वेदांता अस्पताल में सरिता त्रिपाठी

 

इनके जज्बे को हर कोई आज भी सलाम करता है। जो बेटियो के लिए आज के समाज मे आदर्श साबित हो रही है। नतीजतन बेटी वीणा की तान पर रविप्रकाश की अर्धांगनी सरिता तिवारी को सावित्री बनना पड़ा।

गुरुग्राम के वेदांता अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण के बाद ब्रह्मदेव उर्फ रवि प्रकाश तिवारी

 

जिस तरह से सत्यवान के प्राण की रक्षा के लिए सावित्री ने यमराज के हाथों से प्राण छीन कर अपने पति की जान बचाई थी, ठीक उसी तरह का त्याग ब्रह्मदेव उर्फ रविप्रकाश तिवारी की पत्नी सरिता ने किया है।

बता दें कि शादी शुदा एवं दो बच्चियों की मां होने के बावजूद भी पुत्री वीणा ने अपने पिता के जीवन की खातिर खुद के जीवन की परवाह न करते हुए अपना लीवर दान कर दी थी। जब दूसरी बार ब्रह्मदेव उर्फ रविप्रकाश तिवारी बीमार पड़े तो चिकित्सकों ने किडनी खराब होना बताया। डायलिसीस बनारस के हेरिटेज हास्पीटल व मेदान्ता मेडिसीटी हास्पीटल गुरुग्राम में लगातार होता रहा।

सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी। जब यह खबर उनकी धर्मपत्नी सरिता तिवारी को लगी तो उन्होंने अपने सुहाग की रक्षा के लिए सरिता से सावित्री बनने के लिए तैयार हो गई। उन्होंने अपना किडनी अपने पति को तेरह जून को एक दान कर दिया।

जब-जब इलाज के लिए पैसे की आवश्यकता पड़ी तो पिता रविन्द्र नाथ तिवारी ने अपनी बुढ़ौती की लाठी अपने इकलौते बेटे बहुआर गांव के रविन्द्रालय के इकलौते चिराग रविप्रकाश तिवारी को सुरक्षित रखने व बेटे के जीवन की खातिर जोत की लबे रोड की जमीन बनारस में आलीशान मकान तक बेचने में जरा सा भी संकोच नहीं किया।

जमीन मकान बेच कर बेटे के इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च कर दिए। परिणामस्वरूप आज ब्रह्मदेव उर्फ रविप्रकाश तिवारी बेटी के लीवर व पत्नी सरिता के किडनी के सहारे मेडिसिटी हास्पीटल गुरूग्राम के नामी चिकित्सकों के टीम के द्वारा सफल आपरेशन के पश्चात जिंदगी की सरिता में गोता लगा रहे हैं।

विकास खंड जमालपुर के पूरब मे स्थित मिर्जापुर चन्दौली जनपद के सीमावर्ती गांव कंचनपुर मुड़हुआ गांव में मनीष उपाध्याय से ब्याही बहुआर की बेटी वीणा के पिता की तबियत वर्ष 2016 में खराब हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि लीवर डैमेज है। लीवर ट्रान्सप्लान्ट करना अति आवश्यक है।

ब्रह्मदेव मेदान्ता हिस्पीटल गुड़गाँव में भर्ती हो गए। जब लीवर दान करने की जानकारी ब्रह्मदेव की तीन बेटियों, दो बेटों व तमाम रिश्तेदारों को हुई तो लीवर ट्रान्सप्लान्ट करने के लिए सभी तैयार हो ही रहे थे कि बड़ी बेटी वीणा को जानकारी मिली कि पिता को तत्काल लीवर ट्रान्सप्लान्ट की आवश्यकता है।

तुरंत बुलंद जज्बे के साथ  पति मनीष उपाध्याय, ससुर श्रीपति उपाध्याय को साथ लेकर गुड़गाँव हास्पीटल पहुंच गईं। जहां चिकित्सकों से मिलकर पिता को अपना लीवर ट्रान्सप्लान्ट कर पिता की जिन्दगी को बचा ली। इस दौरान वीणा ने अपनी दो अबोध बेटियों का ख्याल भी नहीं किया और अपना बेटी होने का धर्म निभाई।

पत्नी सरिता पर गर्व है—
ब्रह्मदेव तिवारी उर्फ रविप्रकाश तिवारी ने बताया कि पत्नी सावित्री/सरिता की तरह हो, जिन्होंने सत्यवान/ब्रह्मदेव को यमराज के हाथों से छीन कर पति को जिन्दगी दी हो। जब वर्ष 2022 में किडनी खराब होने की जानकारी परिवार वालों को मिली तो सभी निराश हो गए कि अब क्या होगा। कौन देगा किडनी। तब अर्धांगिनी सरिता ने पति प्रेम की सरिता बहाई और कहा कि मैं अपने सुहाग की रक्षा के लिए अपनी किडनी दान करूंगी। पति के जीवन के लिए शरीर का एक एक अंश कट जाए कोई परवाह नहीं है।

मुझे किडनी देने के लिए जून 2022 में ही गुरुग्राम लेकर चली गई। लेकिन दुर्भाग्य ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। बेटी श्रेया तिवारी व बेटा वरुण प्रकाश तिवारी डेंगू बुखार की चपेट में आ गए। जिसके चलते आर्थिक तंगी आ गई। पुनः एक साल बाद पत्नी सरिता तिवारी ने अपनी एक किडनी 13 जून को अपने सुहाग को दान कर जान बचाई है। आज ब्रह्मदेव बेटी की लीवर व पत्नी की किडनी के सहारे जीवन जी रहें हैं ।

 


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