July 24, 2024 |

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विजन, विकास और विचारधारा की प्रतिबद्धता, पढ़िए विस्तार से…

Sachchi Baten

हमारा मिर्जापुर, हमारा विजन

नफा-नुकसान की चिंता नहीं, कायम रहे सामाजिक न्याय की विचारधारा

 

राजेश पटेल


आज की राजनीति संघर्ष की नहीं, शक्ति की है। शक्ति किसी की भी हो सकती है। धन की या बल की। संघर्ष में शक्ति नहीं होती। उसमें तो समर्पण होता है। कोई भी संघर्ष तभी सफल होता है, जब वह समर्पित भाव से किया जाता है। शक्ति में इतनी सामर्थ्य है कि वह समर्पण को भी दबा सकती है।

90 के दशक के पहले की राजनीति संघर्ष वाली थी। अब शक्ति वाली। कोई विचारधारा नहीं। सत्ता के लिए कुछ भी करेगा। लेकिन अभी उम्मीद की कुछ किरणें हैं। कुछ नेता हैं, जो वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं। उनको जनता का आशीर्वाद भी मिल रहा है। नफा-नुकसान की चिंता बिल्कुल नहीं। अपने मिशन, विजन और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। संघर्ष की राजनीति के फिर से लौटने की आशा को जीवित रखे हुए हैं।

 

 

उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो संसदीय क्षेत्र, पार्टी, संसद और मंत्रालय के कारण विदेश दौरों में बेहतर तालमेल का उदाहरण अनुप्रिया पटेल से अच्छा कोई नहीं हो सकता। बात सबसे संसदीय क्षेत्र की। श्रीमती पटेल मिर्जापुर संसदीय सीट से लगातार दूसरी बार चुनकर संसद में पहुंची हैं। उनके पास केंद्र सरकार में वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी है। अपनी पार्टी अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अनुप्रिया पटेल ही हैं।

 

 

संसदीय क्षेत्र में उनकी उपस्थिति को लेकर कहीं से भी कोई शिकायत नहीं है। मिर्जापुर का विजनरी विकास हो रहा है। सभी समाज के महापुरुषों का सम्मान, किसानों की चिंता, शिक्षा के केंद्र, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य, सिंचाई सहित हर क्षेत्र में मिर्जापुर में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। अभी हाल ही में एक विश्वविद्यालय की स्थापना को भी उत्तर प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली है।

 

                        मिर्जापुर में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण का निरीक्षण करतीं अनुप्रिया पटेल (फाइल फोटो)।

 

मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय की स्थापना तो श्रीमती पटेल के पहले कार्यकाल में हो चुकी है। मिर्जापुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना कराने के बाद अब एक और जिला स्तरीय पुरुष व महिला अस्पताल खोलने के लिए सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। अभी जो जिला अस्पताल था, वह मेडिकल कॉलेज के अधीन हो गया है।

 

विचारधारा 

अपना दल एस का मुख्य उद्देश्य हर क्षेत्र में सामाजिक न्याय की व्यवस्था को लागू कराना है। लिहाजा पार्टी अध्यक्ष की हैसियत से अनुप्रिया पटेल अपनी बात हर मंच पर मजबूती से उठाती रहती हैं। संसद हो या संसद के बाहर। उनके लिए कोई मायने नहीं है। कहीं भी वह पार्टी की विचारधारा को नहीं छोड़तीं। जातीय जनगणना, ओबीसी आरक्षण, न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और पत्रकारिता में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सहित ओबीसी के साथ हुए या हो रहे अन्याय के खिलाफ संसद में और संसद के बाहर आवाज लगातार उठा रही हैं। इसका उनको व्यक्तिगत रूप से नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। लेकिन विचारधारा को कायम रखने के लिए व्यक्तिगत नुकसान को तवज्जो नहीं देतीं।

 

 

2014 से लेकर 2019 तक संसद में एक सांसद के रूप में तथा राज्य मंत्री के रूप में दिए गए उनको भाषण, वक्तव्य आदि का गहन अध्ययन करने पर पता चलता है कि वह ओबीसी के हक के लिए आज की तारीख में सबसे ज्यादा मुखर नेता अनुप्रिया पटेल ही हैं। वह संसद में भी खुल कर बोलती हैं। ओबीसी के मुद्दों पर बोलते समय वह यह नहीं सोचतीं कि उनकी पार्टी सरकार का हिस्सा है।

कभी-कभी तो सरकार को आईना दिखाते हुए अंदर तक चुभने वाली बात बोल देती हैं। इसका खामियाजा उनको सांसद के दूसरे कार्यकाल में भुगतना पड़ रहा है। पहले मंत्री बनाने में आनाकानी, फिर जब भाजपा को खुद जरूरत महसूस हुई तो मजबूरी में मंत्री बनाया, वह भी राज्य मंत्री। जानकारों का कहना है कि यदि अनुप्रिया पटेल सामाजिक न्याय के लिए इतना मुखर नहीं होतीं तो 2019 के चुनाव बाद मंत्री बनने के लिए करीब दो साल का इंतजार नहीं करना पड़ता।

लेकिन उनको तो जैसे फर्क ही नहीं पड़ता। मंत्री रहें या न रहें। कोई चिंता नहीं। चिंता है तो सिर्फ ओबीसी के हक व अधिकार की। इसके लिए वह आज भी मुखर रहती हैं। अभी पार्टी के स्थापना दिवस पर चार नवंबर को उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना यही मोदी सरकार पूरे देश में कराएगी।

सभी जानते हैं कि केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना कराने से मना कर दिया है। इसके बावजूद अनुप्रिया पटेल ने यदि ऐसी बात कही तो अंदरखाने कुछ तो खिचड़ी पक रही है। अनुप्रिया पटेल ने नारी शक्ति वंदन विधेयक पर चर्चा के दौरान यह भी कहा था कि 33 फीसद महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग करने वाले कहीं से भी गलत नहीं हैं। जाहिर सी बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बात अच्छी नहीं लगी होगी। अब अच्छा लगे या खराब। ओबीसी की बात है तो अनुप्रिया पटेल बोलेंगी ही। नफा हो या नुकसान।

 

किसानों की चिंता

कौन सोच सकता था कि सहकारी समितियों पर किसानों को बैठने में हो रही दिक्कत को उनकी सांसद ने संज्ञान में लिया होगा। उन्होंने कहीं देखा कि समितियों पर किसान बैठने के लिए परेशान हैं। उन्होंने अपनी सांसद निधि से जनपद की 86 साधन सहकारी समितियों / सहकारी समितियों / क्षेत्रीय सहकारी समितियों और 25 सहकारी संघों पर किसानों को बैठने हेतु स्टेनलेस स्टील की कुर्सियों सहित विश्रामालय और रात्रि में स्थायी प्रकाश के लिए सोलर आधारित हाई मास्ट लाइट लगवाने के लिए धन आवंटित करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। किसानों के लिए चुनार में लॉजिस्टिक पार्क और निर्यात केंद्र की निर्माण हो रहा है। इससे मिर्जापुर ही नहीं, पूरे पूर्वांचल के किसान लाभान्वित होंगे। सिंचाई की योजनाओं पर भी काम हो रहा है। नरायनपुर पंप कैनाल के पानी को हुसेनपुर बीयर तक पहुंचा कर उससे गरई प्रणाली तथा जरगो कमांड की सिंचाई सुनिश्चित कराने के लिए निरंतर प्रयास हो रहा है।

 

सड़क परिवहन

 

 

मिर्जापुर जिला संभवतः पूरे उत्तर प्रदेश में अकेला होगा, जहां गंगा आर-पार करने के लिए पांच पक्के पुल हों। तीन अभी हैं। दो और की मंजूरी मिल चुकी है। टेंगरा मोड़ से हनुमना तक की सड़क फोरलेन बन चुकी है। राबर्ट्सगंज-मिर्जापुर मार्ग को भी फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। कई सड़कों का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण की योजना भी पास हो गई है। उम्मीद है कि सड़कों के मामले में मिर्जापुर जनपद का शहरी व ग्रामीण क्षेत्र निकट भविष्य में बदला-बदला सा नजर आएगा।

 

समय प्रबंधन

कहा जाता है कि जो व्यक्ति समय प्रबंधन ठीक से नहीं कर पाता, वह सफल नहीं होता। यह कहा जाए कि मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल को समय प्रबंधन में महारत हासिल है तो कोई गलत नहीं होगा। कितना समय व्यायाम करना है, कितना टाइम पढ़ना है। कब भोजन-नाश्ता करना है। सब कुछ तय है। तभी तो वह संसदीय क्षेत्र के साथ संसद और मंत्रालय के कार्यों तथा विदेश दौरों में तालमेल बैठा पाती हैं। तकरीबन हर शनिवार और रविवार को वह जब से सांसद चुनी गई हैं, तभी से अपने संसदीय क्षेत्र में मौजूद रहती हैं। इसके अलावा भी जब मौका मिलता है, दिल्ली से उड़कर मिर्जापुर आ ही जाती हैं। मांगलिक व शोक कार्यक्रमों में शिरकत करने के साथ ही जिला स्तरीय बैठकों के लिए समय का निर्धारण आसान काम नहीं है। जनता-जनार्दन से नियत समय पर मिलना जरूरी है। विकास कार्यों का निरीक्षण तो और महत्वपूर्ण है। समय-समय पर निरीक्षण के बिना न गुणवत्ता ठीक रहेगी, न तो समय से काम ही पूरा होगा।

 

 

संसद में उपस्थिति के मामले में भी उनकी बराबरी कुछ ही सांसद कर पाएंगे। संसद सत्र चलते समय रजिस्टर में हस्ताक्षर करने तथा मोबाइल के माध्यम से भी उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था है। इसमें श्रीमती पटेल किसी से कम नहीं हैं। मंत्री बनने के बाद संसद सत्र के दौरान उपस्थिति दर्ज कराने के लिए रजिस्टर में हस्ताक्षर या मोबाइल एप के प्रयोग की बाध्यता समाप्त हो जाती है। लोकसभा की वेबसाइट पर जाकर संसद सत्र के दौरान अनुप्रिया पटेल की उपस्थिति का विवरण देखेंगे तो मिर्जापुर के लोग फख्र महसूस करेंगे कि उनकी सांसद क्षेत्र के साथ ही वहां पर भी पूरा समय दे रही हैं, जहां के लिए उनको चुनकर भेजा गया है।

मंत्री बनने के बाद प्रश्नों के जवाब भी देने होते हैं। सांसद होने के नाते चर्चा में भाग लेना पड़ता है। प्रश्नों का जवाब देने या चर्चा के दौरान अपनी बात तार्किक ढंग से रखने के लिए अध्ययन जरूरी होता है। अपने संसदीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सोचना भी है। बिना सोच के मिर्जापुर का इस तरह से विकास नहीं हो पाता।

पूरे प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर सहित अन्य राज्यों में पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखनी है। बैठकों व रैलियों-सभाओं में उनकी उपस्थिति ऐसे ही नहीं हो जाती। इसके लिए टाइम मैनेजमेंट आवश्यक है। पार्टी के लिए भी समय देने का ही परिणाम है कि जब से उनके हाथ में जिम्मेदारी आई है, पार्टी का विकास द्रुत गति से हो रहा है। पार्टी को क्षेत्रीय दल का दर्जा दिलाने में उनकी मेहनत के साथ समय प्रबंधन का अहम योगदान है।

सामाजिक न्याय के लिए समर्पण के साथ संघर्ष जारी है। परिणाम भविष्य बताएगा।

 

 

 


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