July 24, 2024 |

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मिर्जापुर आएं बाद में, रघुराज प्रताप सिंह जी! पहले इसे देख लीजिए

Sachchi Baten

मिर्जापुर की सामाजिक समरसता ऐसी कि कोई नहीं कह सकता कि फलां के गढ़ में फलां जाति का सांसद नहीं हो सकता

-कुंडा में संगम लाल ने कह दिया कि राजाओं के गढ़ में तेली सांसद नहीं बन सकता

-मिर्जापुर में हर जाति के लोग चाहते हैंं अनुप्रिया पटेल की जीत की हैट्रिक

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। खबर बाद में पढ़िएगा। पहले इस वीडियो को देख लीजिए। माजरा समझ में आ जाएगा।

मतदाताओं से अनुप्रिया पटेल के पक्ष में कप-प्लेट निशान  पर वोट देने की अपील कर रहे शख्स का नाम सुजीत सिंह है। कुर्मी नहीं हैं। ओबीसी या एससी/एसटी भी नहीं है। ग्राम प्रधान भी नहीं हैं, कि इनको डराया-धमकाया गया हो इस तरह से प्रचार प्रसार करने के लिए। सुजीत सिंह उर्फ बिल्लू मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक में हनुमानपुर के निवासी हैं। सिकंदरपुर ग्राम पंचायत में हनुमानपुर भी है। सुजीत की जाति से भी पर्दा अब उठा ही देता हूं। भूमिहार।

मिर्जापुर जिले की सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण तो सुजीत ही हैं। कुर्मी बाहुल्य ग्राम पंचायत से प्रधान रहे हैं। ग्राम प्रधान संघ जमालपुर के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। जबकि अधिकतर प्रधान ओबीसी और एससी के ही होते हैं।

कुंडा के पूर्व नरेश की मौजूदा पीढ़ी को समझना चाहिए कि यहां आकर सुजीत जैसों को क्या समझाएंगे। इनके जैसे ब्राह्मण, ठाकुर और भूमिहार जाति के हजारों युवा अनुप्रिया पटेल में ही मिर्जापुर का भविष्य देख रहे हैं। इसीलिए 43 डिग्री से ज्यादा के तापमान में भी गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर इसी तरह से समझा रहे हैं, जैसे सुजीत सिंह।

मिर्जापुर जनपद ऐसा जिला है, जहां अपनी-अपनी जाति पर गर्व तो सभी करते हैं, लेकिन किसी द्वारा किसी की आलोचना नहीं की जाती। जाति के लेकर झगड़े नहीं होते। एक-दूसरे के सुख-दुःख में शामिल होते हैं। सामाजिक उत्सवों में हाथ बंटाते हैं। मिर्जापुर में राजा का रौब नहीं चलता। यहां प्रेम से दिल जीता जाता है। काशी नरेश से लोग इतना प्रेम करते थे कि जब भी उनकी सवारी मिर्जापुर जिले से होकर गुजरती थी तो लोग अभिवादन में हर-हर महादेव का जयकारा लगाते थे। यह डर नहीं, प्यार था। आज भी रामनगर की एक महीने तक चलने वाली रामलीला के दौरान राजा और आम आदमी के स्नेह के देखा जा सकता है।

मिर्जापुर की मिट्टी ही ऐसी है कि यहां दबंगई अंकुरित होने के पहले ही सूख जाती है। अकोढ़ी-बिरोही के भी लोग हैं, जो अपनी मूंछ के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। लेकिन मूंछ की लड़ाई कभी इस तरह की नहीं होती कि मर्यादाएं टूट जाएं। भाईचारा खत्म हो जाए। एक बार जमालपुर ब्लॉक में गलती हुई थी। इसमें पछतावा के सिवा कुछ नहीं मिला।

मिर्जापुर जिले में ब्राह्मण और ठाकुर परिवार में 90 प्रतिशत से ज्यादा घरों में अनुप्रिया पटेल का व्यक्तिगत संबंध है। ऐसे घरों के सभी सदस्यों से मिल चुकी हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी पहचानते हैं। कुंडा से आकर लोग इस संबंध को कैसे तोड़ देंगे। जमालपुर ब्लॉक के चरगोड़ा गांव निवासी महेंद्र नाथ सिंह (राजपूत) कहते हैं- सुनिए उन्हीं को…

रघुराज प्रताप सिंह, आपने देख लिया कि यहां राजपूत से लेकर भूमिहार तक किस तरह के सुविचार रखते हैं। यहां कोई कह ही नहीं सकता कि फलां के गढ़ में फलां सांसद नहीं  हो सकता। आपके प्रतापगढ़ में तो संगम लाल ने रुंधे गले से कह दिया कि राजाओं के गढ़ में तेली सांसद नहीं बन सकता। मिर्जापुर के लोगों की सलाह है कि यदि आप जनता को मालिक समझने लगे हैं तो पहले संगम लाल गुप्ता ने जो कहा, उस परसेप्शन के समाप्त करने के लिए कार्य करें। लगे कि प्रतापगढ़ में सामंतवाद नहीं चलता। अब कैसा राजा और कैसी प्रजा। प्रतापगढ़ में भी लोग जाग चुके हैं। मिर्जापुर तो मां विंध्यवासिनी की नगरी है। चुनार गढ़  है। गंगा हैं। धान का कटोरा है। विंध्य पर्वत शृंंखला सिर उठा कर खड़ा है। पता है आपको मिर्जापुर जिला में गंगा आर-पार करने के लिए आने वाले दिनों में पांच पुल होंगे। ऐसा कोई जिला खोजने से भी नहीं मिलेगा। जब जो गंगा के दो किनारों को आपस में मिलाने के लिए इतना प्रयास करता हो, उसे कौन समाज नहीं चाहेगा। अनुप्रिया पटेल सामाजिक न्याय की जिस विरासत को लेकर मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं, वह डॉ. सोनेलाल पटेल की देन है। और, डॉ. सोनेलाल पटेल को आप भलीभांति जानते हैं। प्रतापगढ़ जिले के मेडिकल कॉलेज का भी नाम डॉ. सोनेलाल पटेल के नाम पर है।

 


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