July 16, 2024 |

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चंद्रयान मिशन और इसरो, आइए जानते हैं विस्तार से…

Sachchi Baten

120 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं इसरो ने

पहले ही प्रयास में 2013 में मंगलयान अभियान सफल हुआ था

 

श्रीपति सिंह

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जब पहली बार रूसी अंतरिक्ष यात्री ‘यूरी गगारिन’ ने अंतरिक्ष में कदम रखा था तो वो यह देख कर हैरान थे कि अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी, चंदा से भी ज्यादा चमकदार दिखती है। पृथ्वी चंदा से लगभग छः गुना ज्यादा बड़ी है और उसकी चमक उसी अनुपात में ज्यादा है। सूर्य की रोशनी सभी ग्रहों, उपग्रहों पर पड़ती है और फिर परावर्तित होती है।

अब जबकि अमेरिका वाले अंतरिक्ष यात्री चंदा पर चहलकदमी कर चुके हैं और हम भी वहां उतर चुके हैं तो देखना दिलचस्प होगा कि ‘करवा चौथ’ और ‘ईद के चांद’ पर इसका क्या असर होता है ? एक परिवर्तन तो हुआ है कि अब साहित्यकार किसी नायिका के सुंदर मुखड़े की तुलना चांद से नहीं करते और न ही दादी मांएं यह लोरी गाती हैं-
‘चंदा मामा आरे आवा बारे आवा, दूध कटोरी ले ले आवा, बचवा के मुंहवां में घुटुक’।

मंगल ग्रह सौर्य मंडल में चौथे स्थान पर है और सूरज से 14.2 करोड़ मील की दूरी पर है। पृथ्वी तीसरे स्थान पर.
पृथ्वी सौर मंडल का पांचवां सबसे बड़ा ग्रह है और सूरज से 9.3 करोड़ मील की दूरी पर है। हमें गर्व है कि 5 नवम्बर 2013 को हमने पहले प्रयास में ही अपने “मंगलयान अभियान MARS ORBITER MISSION” में सफलता हासिल की।
यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के ‘श्री हरिकोटा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र” से PSLV C-25 से किया गया और
24 सितम्बर 2014 को अपनी कक्षा में स्थापित हो गया। अब देखना यह है कि हमारी बेटियों की कुंडली से ‘मंगली दोष’ कब जाता है ?

एक नज़र इसरो पर डालना श्रेयस्कर होगा। स्कूल गए तभी न साहब बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ

इसरो (ISRO) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन Indian Space Research Organisation भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम के जनक के रूप में डाॅ. होमी जहांगीर भाभा को और अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक के रूप में डाॅ. विक्रम अम्बालाल साराभाई को याद किया जाता है।

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के विकास में वैज्ञानिक विचारों को तवज्जो दी। 15 अगस्त 1969 को “इसरो” की विधिवत स्थापना बेंगलूरू में डाॅ. विक्रम अम्बालाल साराभाई द्वारा की गई। बंगलुरु में ही इसरो का विशाल मुख्यालय है।

इसरो के 6 प्रमुख केन्द्र एवं 45 से अधिक अंतरिक्ष अनुसंधान इकाइयां कार्यरत हैं। कुल 17000 से अधिक कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं। इसरो के पहले अध्यक्ष डाॅ. विक्रम ए साराभाई थे। अब 11 वें अध्यक्ष डाॅ. एस सोमनाथ हैं, जिन्होंने 14 जनवरी 2022 से कार्यभार संभाला है। भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम की नींव 1947 में पड़ गई थी, जब डाॅ. विक्रम अम्बालाल साराभाई विदेश में अपनी शिक्षा प्राप्त कर भारत आए और अहमदाबाद में अपने प्रयासों से “भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला” PRL की शुरुआत की।

1954 में PRL के नये भवन का उद्घाटन प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा किया गया। 1961 में सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष अनुसंधान के शांतिपूर्ण उपयोग’ विषय को देश के “परमाणु उर्जा विभाग DAE” के अधिकार क्षेत्र में रखा गया। 1962 में “Indian National Committee for Research” की स्थापना की गई। 1962 में ही DAE ने डाॅ. साराभाई की अध्यक्षता में “भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति” INCOSPAR की स्थापना की गई।

1967 से ही भारत ने प्रक्षेपण के लिए अपने राकेट बनाने शुरू कर दिए थे। भारत का पहला यान SLV – 3 था। 1975 में भारत द्वारा विकसित पहले उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ का प्रक्षेपण रूसी कास्मोड्रोम से हुआ था। 2001 में इसरो ने अपने पहले GSLV “जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच वेहिकल” का सफल परीक्षण किया। 2007 में हमने अपने स्वदेशी “क्रायोजेनिक इंजन’ का सफल परीक्षण किया।

हमने अपने PSLV – C37 से एकबार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकार्ड बनाया. इस 104 में से 3 उपग्रह हमारे थे और 101 उपग्रह विभिन्न देशों के थे। इससे इसरो को भारी आमदनी हुई। 1975 में ‘आर्यभट्ट’ से लेकर 2022 में ‘EOS – 04’ तक कुल 47 वर्षों में इसरो ने लगातार सफलता के कीर्तिमान स्थापित किए हैं और कुल 120 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित किए जा चुके हैं।

 

 

लेखक परिचय- एम फार्म (बीएचयू), संयुक्त निदेशक उद्योग (से. नि.), बिहार सरकार। प्रबंध ट्रस्टी मॉं फूलझारी देवी ट्रस्ट लोढवां, जमालपुर, मिर्जापुर।


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