July 24, 2024 |

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Brecking News: बनारस से अब निर्दलीय लड़ेंगी किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी

Sachchi Baten

अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा अब टिकट देने से इनकार पर बोलीं हिमांगी सखी

-कहा, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य किसी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहीं, अपने समाज के लिए चुनाव में उतरने का किया फैसला

-श्राप देना उनका काम नहीं, वह तो सभी को दुआएं ही देती हैं

राजेश पटेल, वाराणसी (सच्ची बातें)। अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा अब टिकट देने से इनकार के बावजूद किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी बनारस से चुनाव लड़ेंगी। सच्ची बातें डॉट कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने के लिए चुनाव नहीं लड़ रही हैं। उन्होंने बुधवार को फोन पर बताया कि किन्नर समाज को आज भी उपेक्षित भाव से देखा जाता है। इस समाज के मान-प्रतिष्ठा के लिए उनका चुनाव लड़ना जरूरी है।

विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने बातचीत में कहा कि उनका कई अपना स्वार्थ नहीं है। वह तो अपने समाज के लिए चुनाव लड़ रही हैं। यह कहने पर कि अब तो आपका श्राप भी लगेगा, इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि श्राप वो लोग देते हैं, जिनका अपना कोई स्वार्थ होता है। वह तो दुआएं देने का काम करती हैं। सभी को दुआएं ही देती हैं। वह अपने समाज के कल्याण के लिए चुनाव मैदान में हैं। उनका विरोध न किसी सरकार से है और न आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से।

बता दें कि हिमांगी सखी विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हैं। इस बार के लोकसभा के चुनाव में अखिल भारत हिंदू महासभा ने उनको वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव में प्रत्याशी घोषित किया था। पर, अचानक महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने 15 अप्रैल को इनकी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। इस पर किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने अपने एक्स एकाउंट पर लिखा था कि उनके साथ धोखा किया गया है। उन्होंने कहा कि उनको अन्य पार्टियों का भी समर्थन है, लेकिन चुनाव निर्दलीय ही लड़ेंगी।

हिमांगी सखी ने बताया कि किन्नर समाज को उनका अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए वह चुनावी मैदान में उतरी हैं। प्रधानमंत्री का ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारा अच्छा है लेकिन ‘किन्नर बचाओ-किन्नर पढ़ाओ’ की आवश्यकता नहीं समझी गई। उनकी मांग है कि किन्नर समाज को भी नौकरियों व लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनावों में सीटें आरक्षित की जाएं ताकि उनका भी प्रतिनिधित्व सदनों में हो सके और उनकी समस्याओं और मांगों पर विचार किया जा सके।

कौन हैं हिमांगी सखी

पुरुष और महिला कथावाचक तो आपने कई देखे होंगे लेकिन किन्नर कथावाचक बहुत ही कम देखने को मिलती हैं। ऐसी ही एक किन्नर कथावाचक और भागवताचार्य हैं महामंडलेश्वर हिमांगी सखी। हिमांगी सखी विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हैं। महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति आकर्षण था। वह उनको अपना आराध्य मानती थीं। कृष्ण भक्ति की उनकी शुरुआत मुंबई के उनके घर के नजदीक बने इस्कॉन मंदिर से हुई। यहां उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में जाना। इसके बाद वह दिल्ली और वृंदावन गईं। अपने प्रथम गुरु से भी उनकी मुलाकात वृंदावन में हुई थी।

देश विदेश में करती हैं भागवत

भागवत कथा सुनाने की उनकी शुरुआत मॉरीशस से हुई। उन्होंने वहां अंग्रेजी में भागवत सुनाई। इस्कॉन मंदिर समिति द्वारा उन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और इसके बाद वह देश और विदेश में भागवत सुनाने के लिए जाती रहीं। स्पेन, बहरैन, सिंगापुर जैसे देशों के अलावा उन्होंने भारत के भी कई राज्यों में भागवत कथा का पाठ किया है। हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि 2019 में दी गई थी। यह उपाधि उन्हें नेपाल के पशुपतिनाथ पीठ के द्वारा दी गई थी। प्रयागराज में हुए कुंभ के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर गौरी शंकर महाराज ने भी उन्हें यह उपाधि दी थी।

 


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