July 24, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

भाजपा 400+ तो कांग्रेस 200 सीटें भी ढूंढने को दिख रही मज़बूर

Sachchi Baten

सच्ची बातें…

कांग्रेस के लिए अस्तित्व बचाने की लड़ाई है 2024 लोकसभा चुनाव

-2014 में 44 तो 2019 में मात्र 52 सीटें पा सकी पार्टी

-‘इंडिया’ के सहयोगियों से सीटें पाने को जद्दोजहद कर रहा कांग्रेस नेतृत्व

अनिल तिवारी, नई दिल्ली। 2024 के लोकसभा चुनाव का दंगल ‘आर-पार’ का नहीं, बल्कि ‘पार-पार’ का होता जा रहा है। विपक्षी गठबंधन जहां नेतृत्व की उठापटक से जूझ रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी यह मान कर काम कर रही है कि 2024 की जीत उसके लिए एक नए युग का द्वार खोलेगी, जो अगले एक दशक के लिए पार्टी को देश के राजनीतिक दलों की कतार में सबसे आगे खड़ा कर देगी।

यह लोकसभा चुनाव 2019 के आम चुनाव से इन मायनों में अलग होगा कि उस समय भी विपक्ष कमजोर ही था । फिर भी लोकसभा चुनाव के पहले हुए पांच विधानसभा चुनाव में विपक्ष को उत्तर भारत के तीन राज्यों में जीत की संजीवनी मिली थी। जीत से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे, जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दे पर कुछ अधिक मुखर थे, और चौकीदार चोर है का नारा लगा सत्ता प्रतिष्ठान को घेरने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन आज पांच राज्यों के चुनाव परिणाम बिल्कुल अलग स्थिति बयान कर रहे हैं।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली करारी हार के बाद देश की हिंदी पट्टी में कांग्रेस बैकफुट पर है। हालांकि चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ने की बात कह कर कांग्रेसी खुद को संतोष दे रहे हैं और अपनी पीठ भी थपथपा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई है कि हाल की हार ने कांग्रेस पार्टी को ऊर्जाहीन कर दिया है। ऐसे में गठबंधन करके चलना उसकी मजबूरी है। अब तो वह इस गठबंधन का नेतृत्व भी कर रही है, फिर भी हिंदी भाषी राज्यों में सहयोगियों के सामने उसे सीटों के लाले पड़ रहे हैं।

चुनाव तक इंडिया गठबंधन कायम भी रहता है तो उसका मुकाबला संगठित और शक्तिशाली भारतीय जनता पार्टी से होना है, जिसमें लीडर को लेकर कोई दुविधा नहीं है। भाजपा की धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक नीतियां भी स्पष्ट हैं। पार्टी देशवासियों को 2047 तक भारत को दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बनाने का सपना दिखा रही है।

राम मंदिर बन ही चुका है, अब उसका लक्ष्य पीओके को भारत में शामिल करने का है। जहां तक चुनावी रणनीति का प्रश्न है तो विपक्षी गठबंधन ने सही अर्थों में अभी तक कोई पहल नहीं की है। जबकि भारतीय जनता पार्टी अबकी बार 400 के पार, तीसरी बार मोदी सरकार जैसे नारों के साथ हर चुनौती को गंभीरता से ले रही है।

भाजपा ग्रामीण व शहरी गरीबों, महिलाओं, किसानों और दलितों को लक्षित ढंग से जोड़ने की लगातार कोशिश कर रही है। उधर विडंबना देखिये, आजाद भारत में पहली बार 18वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस 200 से भी कम लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अभिशप्त दिखाई दे रही है।

कांग्रेस आज इस स्थिति में भी नहीं है कि वह गठबंधन के सहयोगियों से 300 सीटें मांग सके। अब कांग्रेस की नई उम्मीद भारत जोड़ो न्याय यात्रा है। राहुल गांधी की अगुवाई में यात्रा जिन राज्यों से गुजरेगी, उन राज्यों की 345 संसदीय सीटों में से केवल 15 सीटों पर कांग्रेस के सांसद हैं। ऐसे में कई कांग्रेसी नेता ही राहुल की दूसरे चरण की यात्रा को निरर्थक और संसाधनों की कमी से जूझती पार्टी के लिए हानिकारक मान रहे हैं।

ऐसे में वास्तव में 2024 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई है। 2019 में भाजपा क़ी 303 सीटों के मुक़ाबले कांग्रेस केवल 52 सीटें जीती थी। जबकि 2014 में पार्टी को केवल 44 सीट मिली थी। अब भाजपा 400 सीटों का लक्ष्य साध कर चल रही है। अगर कांग्रेस लगातार तीसरी बार भी आधा सैकड़ा लोकसभा सीटों के आसपास सिमट गई तो पार्टी का बंटाधार सुनिश्चित सा है।


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.