July 19, 2024 |

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कुश्ती संघ की समिति निलंबित कर भाजपा ने एक तीर से किए दो शिकार

Sachchi Baten

 पूर्वांचल में ब्रजभूषण के विद्रोह से नफा-नुकसान को ले तौला गया निर्णय

-पश्चिमी उप्र में जाटों की बढ़ती नाराजगी को रोकने की कोशिश

-पश्चिमी उप्र में मुस्लिम-किसान व दलित भाजपा से ख़फ़ा, जाटों की भी नाराजगी नहीं होती बर्दाश्त

हरिमोहन विश्वकर्मा, नई दिल्ली। खेल मंत्रालय द्वारा भारतीय कुश्ती संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह सहित पूरी कार्यकारिणी को निलंबित कराकर केन्द्र सरकार ने एक तीर से दो निशाने साध लिए हैं।

दरअसल, लोकसभा चुनाव को देखते हुए अब केन्द्र सरकार पश्चिमी बेल्ट के जाटों को नाराज नहीं करना चाहती। भारतीय कुश्ती संघ का हाल ही में चुनाव हुआ था, जिसमें बाहुबली भाजपा सांसद व कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण समर्थक संजय सिंह बबलू और पहलवान रह चुकीं अनीता श्योराण अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे।

अनीता श्योराण चुनाव हार गईं और संजय सिंह डब्लूएफआइ का नया अध्यक्ष बने थे। इस निर्वाचन के विरोध में ओलम्पियन पहलवान बजरंग पुनिया ने खिलाड़ियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए खेलों में जीते गए पदक वापस कर अपना विरोध जता दिया था।

याद रहे ब्रजभूषण पर ओलम्पियन पहलवानों ने खिलाड़ियों के यौन शोषण के आरोप लगाए थे और लम्बे समय तक धरना प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार पूरे मामले में ब्रजभूषण शरण पर कोई गंभीर कार्रवाई करती नहीं दिखी। इसीलिए कुश्ती संघ के नए पदाधिकारियों के निलंबन पर खेल मंत्रालय के कदम को साहसी और निर्णायक कहा जा सकता है, लेकिन इस कदम के पीछे भाजपा सरकार की मज़बूरी भी साफ़ झलक रही है।

भाजपा का मानना है कि पहले ही वह पूर्वांचल के बाहुबली भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के कारण बहुत अधिक जोखिम ले चुकी है और अब इससे अधिक जोखिम लेना पार्टी के लिए खतरा बन सकता है। ब्रजभूषण शरण सिंह कुश्ती संघ के निलंबन को लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर अपना विरोध भी जता चुके हैं और राजनीति से संन्यास लेने की बात भी उनके विरोध का पहला कदम है, लेकिन अब ऐसा लगता नहीं है कि सरकार ब्रजभूषण शरण के आगे झुकेगी।

संजय सिंह डब्ल्यूएफआइ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी हैं। 21 दिसंबर 2023 को हुए भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव में संजय कुमार सिंह का मुकाबला कॉमन वेल्थ गेम में गोल्ड मेडल जीत चुकी अनीता श्योराण से था। अनीता महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ गवाह भी हैं। अनीता को बृजभूषण के खिलाफ धरना देने वाले पहलवानों का समर्थन प्राप्त था।

अध्यक्ष पद के चुनाव में संजय सिंह ने अनीता को 33 वोटों से हराया। संजय सिंह को 40 वोट मिले, जबकि अनीता श्योराण को केवल 7 वोट मिले थे। अध्यक्ष चुने जाने के बाद संजय सिंह ने कहा था कि अब कुश्ती के लिए कैंप आयोजित किए जाएंगे। जिनको कुश्ती करनी है, वो कुश्ती कर रहे हैं, जो राजनीति करना चाहते हैं, वे राजनीति करें। ”

संजय सिंह का इशारा बृजभूषण शरण सिंह के ऊपर महिला खिलाड़ियों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़े विवाद की ओर था। बजरंग पुनिया और बाकी पहलवानों का मानना है कि सरकार इतना कुछ होने के बाद भी ब्रजभूषण को पहलवानों और कुश्ती की कीमत पर पनाह दे रही है, इसीलिए पदक वापसी का सिलसिला चालू हुआ।

सरकार के निर्णय से अब पहलवान प्रसन्न तो हैं, लेकिन अब भी वे ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रभावी कदम की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुनिया ने कुश्ती संघ के निलंबन के बाद पदक वापसी का निर्णय भी वापस ले लिया है। दरअसल, केन्द्र सरकार के इस निर्णय के पीछे खेलों से ज्यादा पार्टी की भलाई नज़र आ रही है।

कुश्ती और ब्रजभूषण सिंह के खिलाफ आंदोलन में अधिकतर जाट समुदाय ही हैं, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निर्णायक वोट बैंक हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश के एक बड़े जाट नेता सत्यपाल मलिक भी पार्टी के खिलाफ जहर उगल रहे हैं तो उस क्षेत्र के किसान भी भाजपा सरकार के खिलाफ लम्बे समय से आंदोलित हैं।

अब पहलवान आंदोलन से भाजपा सरकार के खिलाफ एक और बड़ा वर्ग तैयार हो रहा था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना अलग वोट बैंक रखने वाली पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने हाल में मुस्लिम महिलाओं के हिज़ाब लगाने का समर्थन किया है। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बड़ी मुस्लिम आबादी है, जो जयंत चौधरी के बयान से प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में बड़े जोखिम की पृष्ठभूमि तैयार होती दिख रही थी। भाजपा ने कुश्ती संघ के निलंबन से एक तीर से दो निशाने साध लिए हैं।


Sachchi Baten

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