July 16, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

BHU : हॉस्टल आवंटन में ही भेदभाव नहीं, आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रवेश से रोकने की भी शातिराना साजिश, पढ़िए डिटेल में…

Sachchi Baten

 

खेला हो जा रहा है, किसी को आभास भी नहीं हो पा रहा है इतनी बड़ी साजिश का

-सीट लॉक करने के नाम पर धोखाधड़ी, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का सबसे ज्यादा नुकसान

-पेड सीट वालों को भी पहुंच रहा है वित्तीय नुकसान

राजेश पटेल, वाराणसी (सच्ची बातें)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया में इस बार सीट लॉक करने के नाम पर आरक्षित वर्ग के छात्रों के खिलाफ बड़ी साजिश चल रही है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का हो रहा है। पेड सीट के अभ्यर्थियों को वित्तीय नुकसान पहुंच रहा है। विश्वविद्यालय में स्नातक की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। परास्नातक की जारी है। यदि यही सिस्टम जारी रहा तो आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों का बड़ा नुकसान होना तय है।

 

विश्वविद्यालय के सूत्रों ने ही बताया कि इन अभी तक की स्नातक की प्रवेश प्रक्रिया में भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार आरक्षण के नियमों का पालन किया गया। परास्नातक की पहले चरण काउंसेलिंग में भी पालन किया गया। दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अनियमितता का यह खेला शुरू हो गया।

 

कैसे हो रहा है खेला

बताया गया कि अभ्यर्थियों का सीट लॉक करने (FROZEN) का विकल्प ऑनलाइन दिया गया है। अगर किसी अभ्यर्थी को अपनी पसंद के अनुसार प्रवेश विकल्प मिलता है तो वह अपनी सीट ऑनलाइन सिस्टम से लॉक कर देता है। इसी में गड़बड़ी है। विषय के साथ ही ऑटोमेटिकली उसकी कैटेगरी (आरक्षण श्रेणी) भी लॉक हो जा रही है। इसके कारण उसकी प्रोन्नति उसी विषय के सामान्य वर्ग में सीट खाली रहने के बावजूद नहीं हो पा रही है।

 

वह अपने आरक्षित वर्ग में ही प्रवेश ले पा रहा है। इसके कारण प्रवेश के अगले चक्र में उसी विषय में सामान्य वर्ग की मेरिट में आने पर भी उसके सामान्य वर्ग में प्रवेश न दिलाकर आरक्षित वर्ग में ही प्रवेश कराया जा रहा है। उससे कम योग्यता वाले छात्र को उससे ऊपर सामान्य वर्ग में प्रवेश दिला दिया जा रहा है। परिणामस्वरूप आरक्षित वर्ग की सीटें सामान्य वर्ग से पहले भर जा रही हैं।

 

यही खेला पेड सीट के अभ्यर्थियों के साथ भी हो रहा है। यदि कोई अभ्यर्थी (सामान्य या आरक्षित) भुगतान सीट (PAID SEAT) अपनी पसंद का विषय मिल जाने पर वह लॉक कर दे रहा है तो वह हमेशा इसी सीट पर बना रहेगा। जबकि उससे कम योग्यता वाला अभ्यर्थी उसी विषय में फ्री सीट उपलब्ध होने पर प्रवेश पा जा रहा है।

 

इस अनियमितता की शिकायत भी विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। उल्टे नसीहत दे दी गई कि जैसे हो रहा है, वैसे ही करना है। अभ्यर्थी ने खुद ही अपनी सीट लॉक की है। जबकि अभ्यर्थी ने अपनी पसंद का विद्यालय व विषय मिलने पर लॉक किया है। इसके साथ आरक्षण कैटेगरी अपने आप लॉक हो गई।

 

दरअसल यह खेला बहुत ही शातिराना तरीके से किया गया है। सॉफ्टवेयर ही ऐसा है कि विषय और कॉलेज लॉक करते समय कैटेगरी अपने आप लॉक हो जा रही है। जिस कैटेगरी में उसे प्रवेश मिला है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान यह है कि संबंधित विषय तथा कॉलेज में सामान्य वर्ग में मेरिट रहते हुए भी वह अपनी आरक्षित श्रेणी में ही रहने को विवश है। इसके कारण कम मेरिट वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित रह जा रहे हैं।

 

बता दें कि बीएचयू के हॉस्टल आवंटन में आरक्षण के नियमों का पालन न होने के कारण ओबीसी के छात्र आंदोलित हैं। इसको लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस भी दिया था।


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.