July 24, 2024 |

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कर्पूरी को भारत रत्नः नीतीश का डर या उनको डराने की कोशिश?

Sachchi Baten

जननायक कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती 24 को

बिहार में सियासी अटकलें तेज, नीतीश कुमार पर टिकीं सभी की निगाहें

-चुनावी वर्ष में केंद्र सरकार का यह भारत रत्न सामाजिक न्याय का प्रतीक बनेगा

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। जननायक कर्पूरी ठाकुर की 24 जनवरी को 100वीं जयंती है। इसके एक दिन पहले उनको देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की सूचना राष्ट्रपति भवन से जारी कर दी गई। केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत पूरे देश में किया जा रहा है। इस स्वागत के बीच बिहार में 24 जनवरी को क्या होगा। नीतीश कुमार क्या नया करेंगे, इसको लेकर जितने मुंह, उतनी तरह की बातें हो रही हैं। बातें चाहे जो भी हों, लेकिन चुनावी वर्ष में यह भारत रत्न सामाजिक न्याय का प्रतीक बनेगा। इसमें कोई संशय नहीं है।

नीतीश कुमार जो भी करें, लेकिन यह तो मानना ही पड़ेगा कि नीतीश कुमार की ही तरह से नरेंद्र मोदी भी चौंकाने वाला फैसला लेने वाले हैं। इस मामले में दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। 19-20 का ही अंतर है। जनता दल यू 24 जनवरी को जननायक कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती के अवसर पर भव्य आयोजन कर रहा है। इसके पहले 23 जनवरी को नीतीश जी का अचानक राज्यपाल से मिलने जाना अटकलों को हवा दे रहा है। कहा तो गया कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति पर वार्ता हुई।

राष्ट्रीय जनता दल अलग से कर्पूरी जयंती का ऑयोजन कर रहा है। इसका उद्घाटन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव करेंगे। जननायक जद यू और राजद दोनों के लिए आदर्श हैं। नीतीश कुमार ने तो जननायक की ही प्रेरणा से बिहार में पूर्ण शराबबंदी भी की है। बता दें कि कर्पूरी ठाकुर जब 1977 में मुख्यमंत्री बने थे, उस दौरान उन्होंने शराबबंदी की थी।

हाल के दिनों में जिस तरह के राजनीतिक घटनाक्रम हुए, उससे राजनीति हलके में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कोई कह रहा है कि नीतीश कुमार विधानसभा को भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से कर सकते हैं। कहीं चर्चा है कि वह फिर से एनडीए में शामिल हो सकते हैं। कहीं यह भी चर्चा चल रही है कि वह तेजस्वी को सीएम की कुर्सी सौंपकर खुद केंद्र की राजनीति में सक्रिय भागीदारी करेंगे।

खैर, चर्चाओं का क्या। चर्चाएं तो होती रहती हैं। लेकिन असल में होता वही है, जिसकी चर्चा नहीं होती। जिसका आभास भी नहीं होता है। जैसे कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न का सम्मान दिया जाना। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अगले ही दिन समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की बात करने वाले कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीतीश कुमार द्वारा कराए गए जातीय गणना व आर्थिक सर्वे से काफी डरे हुए हैं। नीतीश ने यह साहसिक कार्य करके समाज के दबे-कुचले लोगों के दिलों में जगह बना ली है। इतना ही नहीं आरक्षण का दायरा भी बढ़ाने की घोषणा करके रही-सही कसर पूरी कर दी। लोकसभा चुनाव पर इसका असर पड़ना लाजमी है। लिहाजा नीतीश के इस मुद्दे को फुस्स करने के लिए कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने का मोदी सरकार का फैसला मास्टर स्ट्रोक जैसा है। मजबूरी में ही सही, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ठीक दूसरे दिन के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक ही कहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बात अच्छी तरह से मालूम है कि सिर्फ राममंदिर के सहारे 2024 के चुनाव को नहीं जीता जा सकता। हिंदुत्व के साथ सामाजिक न्याय को भी साथ लेकर चलना होगा। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। उन्होंने एक्स X पर लिखा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है। स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा। हम हमेशा से ही स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करते रहे हैं। वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है।

रही बात लालू प्रसाद यादव की तो कर्पूरी ठाकुर के मुद्दे पर एक्स X पर लिखा है कि मेरे राजनीतिक और वैचारिक गुरु स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न अब से बहुत पहले मिलना चाहिए था। हमने सदन से लेकर सड़क तक ये आवाज़ उठायी, लेकिन केंद्र सरकार तब जागी, जब सामाजिक सरोकार की मौजूदा बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना करवाई और आरक्षण का दायरा बहुजन हितार्थ बढ़ाया। डर ही सही, राजनीति को दलित बहुजन सरोकार पर आना ही होगा। तेजस्वी यादव ने एक्स X पर लिखा कि उनकी यह मांग पुरानी है। इसके लिए केंद्र सरकार को साधुवाद।

सामाजिक न्याय की विचारधारा की राजनीति करने वाली अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी केंद्र की मोदी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। अपना दल एस की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित तमाम नेताओं ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है।

 

 


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