July 19, 2024 |

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चौधरी चरण सिंह को भारतरत्नः पीएम मोदी ने दिल जीत लिया जयंत चौधरी का

Sachchi Baten

कर्पूरी ठाकुर के बाद अब चौ. चरण सिंह को भारत रत्न

-राष्ट्रीय लोकदल का एनडीए में विलय का रास्ता साफ

-चौ. अजित सिंह की जयंती 12 फरवरी को जयंत कर सकते हैं एनडीए में शामिल होने की घोषणा

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। मोदी की माया के सामने एक-एक कर सभी नतमस्तक होते जा रहे हैं। जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा हुई तो नीतीश कुमार एनडीए के पाले में आ गए। अब किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा हुई तो राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी की भी भाषा बदल गई है। अटकलें तो पहले से ही लगाई जा रही थीं, लेकिन अब जयंत की पार्टी का एनडीए में शामिल होने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि चौधरी अजित सिंह की जयंती के दिन 12 फरवरी को इसका औपचारिक एलान किया जा सकता है।

कुछ ही देर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह को देश के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित करने की घोषणा अपने आधिकारिक एक्स X एकाउंट पर ट्वीट करके दी है। उन्होंने ट्वीट ने लिखा है कि- “हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।”

https://x.com/narendramodi/status/1755851282797961394?s=20

चुनावी साल है। एनडीए का “अबकी बार चार-सौ पार” का नारा जोर पकड़े है। यह सफल कैसे होगा। इसके लिए विपक्ष को समाप्त करना जरूरी है। उनके हाथ से मुद्दों को छीन लेने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। विपक्ष को कमजोर करने की हर कोशिश की जा रही है। हाल-फिलहाल तक जानी दुश्मन रहे लोगों को किसी न किसी बहाने लुभाकर अपने पाले में शामिल करने का सिलसिला जारी है।

अभी हाल ही में जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। इसके बाद विपक्ष को एकजुट करने की शुरुआत करने वाले नीतीश कुमार ही एनडीए में आ गए। दरअसल यह सब पहले से ही प्रायोजित था। नीतीश कुमार बार-बार कहते थे कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दिन या उसके आसपास किसी दिन बड़ा खेला होगा। खेला के पहले उन्होंने कर्पूरी ठाकुर की जन्म शताब्दी के अवसर पर अपनी ताकत को भी आजमाया था। इसमें वह सफल रहे। फिर सीएम पद से इस्तीफा देकर एनडीए में शामिल हुए और फिर सीएम पद की शपथ ले ली। नीतीश के एनडीए में आ जाने से भारतीय जनता पार्टी का काम बहुत आसान हो गया।

इधर करीब 15 दिन से राष्ट्रीय लोकदल से अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह को भी एनडीए में शामिल होने की बात उठ रही है। यह भी खबर सामने आई कि एनडीए में जयंत की पार्टी के लिए सीटों पर भी बात फाइनल हो चुकी है। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा से पुख्ता हो गया कि जयंत चौधरी विपक्षी गठबंधन इंडिया से अलग होकर एनडीए में जाने वाले हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस घोषणा ने जयंत चौधरी का दिल जीत लिया है। जयंत ने एक्स X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट के जवाब में लिखा है- “दिल जीत लिया!”।

https://x.com/jayantrld/status/1755854624295432305?s=20

जो व्यक्ति अपना दिल ही हार गया, वह कितने दिन तक जीतने वाले से अलग रह पाएगा। चर्चा है कि अब जयंत की रालोद को एनडीए में शामिल होने की औपचारिकता मात्र बची है। ज्यादा संभावना है कि चौ. अजित सिंह की जयंती के दिन 12 फरवरी को ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

हालांकि ट्विटर X पर जयंत चौधरी का वह बयान ट्रेंड कर रहा है, जिसमें उन्होंने जनवरी 2022 में कहा था – ‘मैं कोई चवन्नी हूं कि ऐसे पलट जाऊंगा’। एक ने तो कमेंट में लिखा है कि चवन्नी भी पलट गई।

https://x.com/shivayadav87/status/1755859330249703789?s=20

वैसे राजनीतिक कारण चाहे जो भी हों, चौ. चरण सिंह इसके हकदार थे। उनको भारत रत्न मिलने से भारत रत्न सम्मान सम्मानित होगा। चौधरी साहब एक किसान नेता थे। श्रद्धेय चौधरी चरण सिंह जी की बेटी डाक्टर ज्ञानवती सिंह ने एक जगह लिखा है “मैंने पिताजी को कभी सोते हुए नहीं देखा, …मैं जब रात्रि को सोने जाती थी तो पिताजी कुछ न कुछ पढ़ रहे होते थे और जब सुबह उठती थी तो पिताजी लोगों के खतों का जवाब लिखते रहते थे”!

चौधरी साहब कृषि अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ इसलिए थे क्योंकि वे अनवरत अध्ययन करते रहते थे, अध्ययन की वजह से उनमें वो समझ थी कि कैसे खेती एक लाभकारी व्यवसाय बन सकता है? तमाम विरोधों के बावजूद वे सत्ता के शिखर तक पहुँचे, पर अफसोस उन्हें काम करने का समय न मिल पाया…, यह पीड़ा उन्होंने एक जगह लिखकर जाहिर भी की है, …उन्होंने लिखा है “टूटू-फूटे झौंपड़े से आसमां की ओर निहारती वे आँखें, पर अफसोस मैं उनका दर्द दूर न कर पाया”!

चौधरी साहब को जब अचानक लकवा पड़ा था तथा वे जब अमेरिका में जिंदगी और मौत से जूंझ रहे थे, पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह उनसे मिलने अमेरिका गये तो चौधरी साहब बमुश्किल उनसे बात कर पाये थे, उन्होंने सिर्फ इतना कहा “वी.पी. किसान का क्या होगा?”, …मरते दम भी किसान के लिए इतनी तड़प…, इसी दर्द ने उन्हें किसान मसीहा बना दिया।

 

 


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