July 20, 2024 |

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बहदुरीपुर-डंवक मार्गः  मौत की डगर बन चुकी है यह सड़क

Sachchi Baten

गड्ढे बन गए हैं जानलेवा, नहर में भी गिरने का डर

-हाल ही में जिनोदपुर में गड्ढे में गिरने से ट्रैक्टर की चपेट में आ गया था एक बच्चा, चली गई जान

 

जमालपुर/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक में एक सड़क मौत की डगर बन चुकी है। इस पर चलना जान को जोखिम में डालने के बराबर है। इस सड़क को ओडीआर (अदर डिस्ट्रिक्ट रोड) का दर्जा मिल चुका है। मतलब एक जिले से दूसरे जिले को जोड़ने वाली सड़क। बात हो रही है बहदुरीपुर-डंवक मार्ग की।

इस सड़क के किनारे-किनारे भभौरा तक नहर भी है। स्थान-स्थान पर दोनों तरफ सड़क कट गई है। बीच में गड्ढे भी बन गए हैं। ये गड्ढे ऐसे-वैसे नहीं हैं। जानलेवा हैं। सड़क किनारे कटने के कारण नहर में भी गिरने का डर बना रहता है।

अभी गत तीन नवंबर को जिनोदपुर गांव के पास इसी रोड पर एक दुर्घटना हुई थी। हुआ यूं कि एक ट्रैक्टर आ रहा था। बगल से मोपेड सवार निकला। गड्ढा पड़ने से वह गिर पड़ा। मोपेड पर पीछे बैठा एक बच्चा गिर पड़ा और वह ट्रैक्टर ट्राली के चक्के के नीचे आ गया। नतीजा, मौके पर ही मौत हो गई।

उसका नाम विकास था। चौकिया गांव का रहने वाला था। उम्र करीब सात वर्ष थी। कक्षा दो में पढ़ता था। वह बड़ा होता तो पता नहीं क्या बनता। वह अभी कुछ भी नहीं थी, इसलिए कुछ भी बन सकता था। इंजीनियर, आइएएस, आइपीएस, पीसीएस, पीपीएस, नेता। कुछ भी बन सकता था। लेकिन एक अदद गड्डे के कारण उसकी जान चली गई।

                             गत तीन नवंबर को ट्रैक्टर की चपेट में आने से मृत विकास (फाइल फोटो)।

 

आश्चर्य की बात यह है कि इसकी मौत के लिए जवाबदेह भी कोई नहीं है। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ली। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को कोई मतलब ही नहीं है। कोई उसके दरवाजे तक भी संवेदना व्यक्त करने नहीं गया।

यह घटना तो दिन में ही हुई। रात में यह सड़क और खतरनाक हो जाती है। जमालपुर थाना की पुलिस की मिलीभगत से अवैध रूप से तोड़े गई गिट्टी, बोल्डर आदि को लेकर ट्रैक्टर यमराज की तरह चलते हैं। कुछ ट्रकनुमा वाहन भी होते हैं, जिनपर नंबर प्लेट भी नहीं होता। इनकी लाइट से बाइक वालों की आंखें चौंधिया जाती हैं। पास लेते समय किनारे से कटी सड़क से नहर में गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है।

आधा नवंबर बीत गया। इस मार्ग की मरम्मत कब होगी, पता नहीं। गड्ढे कब भरे जाएंगे, कोई बताने वाला नहीं है। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता देवपाल को किसी आम आदमी का फोन ही रिसीव करना मुनासिब नहीं समझते। जब विभाग का मुखिया ही ऐसा है तो नीचे के सहायक अभियंता और अवर अभियंता भी उन्हीं का अनुसरण करते हुए फोन नहीं उठाते।

अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह के नेतृत्व में एक दिन इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन विभाग के अभियंताओं के कानों तक उनकी आवाज या तो पहुंची नहीं, पहुंची भी तो अनसुनी कर दी गई।

चौधरी रमेश सिंह ने सवाल किया कि आखिर खून की प्यासी इस सड़क पर गिरकर लोग कब तक घायल होते रहेंगे। कब तक जानें जाती रहेंगी। उन्होंने इसके लिए शीघ्र ही बड़े धरना प्रदर्शन की बात कही है।

 

 


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