July 23, 2024 |

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विधानसभा उपचुनाव-2023 : रिंकी जीतीं तो बनेगा ऐसा रिकॉर्ड जो टूटेगा नहीं जल्दी, आप भी जानिए उस रिकॉर्ड को

Sachchi Baten

 

 

राहुल कोल ने ही छानबे से लगातार दो बार विधायक चुने जाने का रचा है इतिहास

 

भाईलाल कोल भी बने हैं दो बार विधायक, लेकिन लगातार नहीं

 

अपना दल एस के विधायक राहुल प्रकाश कोल के निधन के चलते छानबे विधानसभा के लिए हो रहा है उपचुनाव

 

राहुल की पत्नी रिंकी हैं मैदान में, जीतीं तो बनेगा ऐसा रिकॉर्ड जो जल्दी टूटेगा नहीं

 

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें) । मिर्जापुर जनपद की छानबे विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहा है। तिथियां घोषित हो चुकी हैं। विधायक राहुल प्रकाश कोल के निधन के कारण यह सीट रिक्त हुई है। उनको कैंसर हो गया था। राहुल अपना दल एस पार्टी से विधायक थे। यह कहा जाए कि वर्ष 1980 के बाद के वे सबसे लोकप्रिय विधायक  थे, तो कोर्ई गलत नहीं होगा।

 

 

  • अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल कैंसर से जूझ रहे विधायक राहुल प्रकाश कोल का कुशल-क्षेम पूछतीं। (फाइल फोटो)

 

इसका प्रमाण छानबे की जनता द्वारा राहुल को लगातार दूसरी बार विधानसभा में भेजना है। इनके अलावा 1980 के बाद कोई विधायक लगातार दूसरी बार नहीं जीत सका है। भाई लाल कोल भी 1980 के बाद इस सीट से दो बार विधायक चुने गए, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार नहीं था। पहली बार 1996 में जीते थे। फिर 2012 में। मतलब दोबारा विधायक बनने के लिए उनको 16 साल का इंतजार करना पड़ा था।

 

 

  • निधन के बाद अंत्येष्टि के समय अंतिम विदाई देतीं अनुप्रिया पटेल

 

चुनावी प्रक्रिया 1951-52 से देश में शुरू हुई थी। पहले कुछ चुनावों तक इस सीट का नाम छानबे था भी नहीं। मिर्जापुर दक्षिणी था। पहले व दूसरे चुनाव में यहां से दो-दो विधायक चुने गए। दोनों बार कांग्रेस से अजीज इमाम व रामकिशुन विधायक चुने गए थे। इन दोनों चुनावों की खासियत यह थी कि एक भी मत अवैध नहीं पाए गए थे।

 

 

1962 के चुनाव में छानबे विधानसभा का नाम कंतित साउथ पड़ा। उस समय कांग्रेस के बेचन राम ने जनसंघ के रामनिहोर राय को हराया था। 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ के एस ब्रह्माश्रम ने कांग्रेस के अजीज इमाम को हरा दिया था। 1969 में उपचुनाव की नौबत आ गई। इसमें कांग्रेस के राजा श्रीनिवास प्रसाद सिंह जीते थे और भारतीय जनसंघ के एस ब्रह्मानंद शास्त्री हारे थे।

 

 

1974 के चुनाव में इस सीट का नाम छानबे हो गया और यह अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई। इस चुनाव में कांग्रेस के पुरुषोत्तम दास ने भारतीय जनसंघ के रामनिहोर राम को हराया था। पुरुषोत्तम दास एक बार नहीं, लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीते। विपरीत परिस्थितियों में भी। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी की लहर के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार पुरुषोत्तम दास ने जनता पार्टी के जोखन राम को हरा दिया था। 1980 के चुनाव में पुरुषोत्तम दास ने जीत की हैट्रिक लगाई।

 

1985 के चुनाव में कांग्रेस के भगवती प्रसाद छानबे के विधायक चुने गए। 1989 में जनता दल की लहर में इस पार्टी के उम्मीदवार कालीचरण ने कांग्रेस के भगवती प्रसाद को धूल चटा दी।  1991 के चुनाव में जनता दल के ही दुलारे लाल जीते तथा बीएसपी के श्रीराम भारती दूसरे स्थान पर थे।

 

1993 के चुनाव में बीएसपी के श्रीराम भारती विधायक चुन लिए गए। इन्होंने भाजपा के राजेश कुमार भारती को हराया था।  1996 में भारतीय जनताा पार्टी ने भाईलाल को प्रत्याशी बनाया और वह जीत भी गए। समाजवादी पार्टी के भगवती प्रसाद हार गए।  2002 के चुनाव में बीएसपी से पकौड़ी लाल कोल विधायक चुने गए। सपा के भगवती प्रसाद को फिर मुंह की खानी पड़ी थी। 2007 में बीएसपी के सूर्यभान ने नीला झंडा लहरा दिया। सपा के श्रीराम भारती को जनता ने पसंद नहीं किया।

 

2012 में समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे भाईलाल कोल को फिर इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का मौका मतदाताओं ने दिया। लेकिन अगले ही चुनाव 2017 में अपना दल एस पार्टी के उम्मीदवार राहुल प्रकाश कोल को जनता में भारी बहुमत सेे विधानसभा में भेजा। 2022 के चुनाव में भी जनता ने उनमें ही विश्वास व्यक्त किया। लेकिन, इस बार वे ज्यादा दिन तक जनता के लिए कम नहीं कर सके। क्रूर कैंसर 2023 की शुरुआत में उनको निगल गया। इसके कारण इस क्षेत्र में उप चुुनाव की नौबत आ गई।

 

अपना दल एस पार्टी इस उपचुनाव में राहुल प्रकाश कोल की पत्नी रिंकी को उम्मीदवार बनाएगी।  रिंकी को यह आश्वस्त किया गया है। इसलिए रिंकी मैदान में कूद चुकी हैं। अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा न होने से सभी संशय में हैं। इसलिए अभी तक का जनसंपर्क रिंकी का ही सबसे मजबूत दिख रहा है। उनके साथ पति राहुल की लोकप्रियता है और उनके द्वारा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों की पूंजी है। राहुल के निधन से उपजी सहानुभूति की लहर ज्वार-भांटा का रूप ले रही है। देखना है कि रिंकी राहुल के विकास कार्यों की पूंजी, उनकी लोकप्रियता तथा सहानुभूति की लहर को अपने पक्ष में कैसे मोड़ती हैं।

(आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से हैं)

 


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1 Comment
  1. Sachchi Baten

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