July 19, 2024 |

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पीडब्ल्यूडी के जिम्मेवारो! लाज है या नहीं? तीन साल से बन रहा है पुल

Sachchi Baten

जिले को लूट लिया पीडब्ल्यूडी वालों ने, अभियंताओंं ने….

-कारनामा निर्माण खंड-2 लोनिवि मिर्जापुर के जिम्मेवारों का

-प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने रपटा पर पुल बनाने की दिलवाई थी स्वीकृति

-घटिया सामग्री और निर्माण में देरी का जिले में सबसे अच्छा नमूना

-आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से खुलें भ्रष्टाचार की परतें

-एप्रोच रोड पक्का न बनने से बारिश ने बढ़ाई परेशानी, दो व चार पहिया वाहन वाले हलकान

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। राजनैतिक दृष्टि से मजबूत जिला मिर्जापुर में लोक निर्माण विभाग के अभियंतागण इतना बेलगाम कैसे? बेखौफ क्यों? किसी का डर नहीं। डर क्यों हो। कोई ईमानदारी से टोकने वाला भी तो नहीं है। कोई टोकता है तो उस कार्रवाई भी होती नहीं दिखती। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को आत्मसात करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रहते इस तरह का माहौल मिर्जापुर जिले में कैसे बना? खासकर पीडब्ल्यूडी में। पता नहीं। इतना पता है कि जमालपुर ब्लॉक में ओड़ी-देवरिल्ला मार्ग पर मुर्दहवा नाले का पुल तीन साल से ज्यादा समय से बन रहा है। अभी पूरा नहीं हुआ।

मिर्जापुर की राजनैतिक मजबूती- केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल जी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह जी, उत्तर प्रदेश सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल जी (तकनीकी रूप से नहीं), जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह जी, भाजपा काशी प्रांत अध्यक्ष दिलीप सिंह जी, सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य जी मिर्जापुर से ही ताल्लुक रखते हैं।

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कहानी विस्तार से…

इस पुल की स्वीकृति से शुरू करता हूं। तारीख तो ठीक से याद नहीं है। जाड़े का समय था। वर्ष 2021 में विधान परिषद सदस्य आशीष पटेल एक दिन गुप्त रूप से क्षेत्र भ्रमण के लिए रात में निकले। देर रात तक जमालपुर ब्लॉक की कई सड़कों पर चलकर उनकी स्थिति देखी। आवश्यकताओं को भी नोट करते गए। इसी क्रम में मुर्दहवा नाला पर रपटा से गुजरते समय उनका ध्यान इस पर गया। साथ चल रहे व्यक्ति ने बताया कि यहां पर पुल बनना क्यों जरूरी है। वह संतुष्ट हुए। अगले दिन ही उस समय के लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पत्र लिखा। एकाध महीने में ही स्वीकृति भी मिल गई। टेंडर की प्रक्रिया के बाद निर्माण भी शुरू हो गया।

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चौंकाने वाली स्टोरी तो अब है…

रपटा से सभी पाइपों को निकाल लिया गया। नाम का एक डायवर्जन बनाया गया। बरसात होने पर इससे आने-जाने वालों की परेशानी यहीं से शुरू हुई। ज्यादा बारिश होने पर डायवर्जन भी आने-जाने लायक नहीं रहता था। भभौरा, लोढ़वा, ओड़ी, देवरिल्ला, ढेबरा, गुलौरी, मनईं, मनउर, बनौली, डूही खुर्द, डूही कलॉ, चौकिया, जिनोदपुर आदि गांवों के लोगों का यह नियमित रास्ता है। ओड़ी व लोढ़वा गांव के कुछ लोगों की खेती भी भभौरा मौजा में है। इनको खेती के लिए नाला पार करके ही आना होता है। बरसात के दो सीजन बीत चुके हैं। किसानों की यह परेशानी लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 के अभियंताओं को समझ में नई आई। काम नहीं शुरू हुआ।

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अन्नदाता मंच के तत्वावधान में कई बार प्रदर्शन किया गया, लेकिन कोई हरकत नहीं। किसी तरह से रो-गाकर तीन साल में करीब एक करोड़ के इस पुल का निर्माण हुआ। लेकिन अभी भी एप्रोच रोड बाकी है। इस पर मिट्टी भी ऐसी डाली गई है, जो दलदली है। सूखा में ही दलदल था, बारिश होने पर क्या आलम है, फोटो में दिख रहा है।

बाइक सवार ज्यादा परेशान, कार वाले भी कोस रहे विभाग को

पुल के दोनों तरफ दलदली कीचड़ हो जाने से बाइक सवारों को ज्यादा परेशानी हो रही है। आवश्यकता पड़ने पर जब पैर जमीन पर लगाते हैं तो उनके जूते व पैंट दोनों कीचड़ से सन जाते हैं। कुछ तो गिर भी चुके हैं। साइकिल वाले तो पुल पर चढ़ने में रो दे रहे हैं। इसी कीचड़ में कहीं-कहीं बोल्डर भी हैं। ये छोटी कारों के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं। नाली बन गई है। न चाहने के बाद भी कार का पहिया नाली में चला ही जाता है। फिर से बोल्डर चैंबर पर चोट पहुंचाने का प्रयास करते हैं। चालक की सावधानी से कम चोट लगती है। लेकिन लगती जरूर है।

लोग पूछ रहे आखिर कब तक पूरा होगा इस छोटे से पुल का निर्माण

कैंसर से जंग जीतने वाले जीवट किसान नेता अन्नदाता मंच के संयोजक चौ. रमेश सिंह ने इस पुल के निर्माण में हो रही देर के खिलाफ समय-समय पर आवाज उठाई। कई बार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के चलते निर्माण में देर हो रही है। किसानों की समस्याओं से किसी को लेना-देना नहीं है। विभाग बताए कि किस कारण से एप्रोच रोड नहीं बन सका है। जबकि पुल का निर्माण पिछले वर्ष दिसंबर में ही पूरा हो गया था। एप्रोच रोड क्यों नहीं।

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का मिर्जापुर में कोई खौफ नहीं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं। अमल भी करते हैं, लेकिन मिर्जापुर में क्यों नहीं। इसका जवाब ढूंढा जा रहा है। यह कौन सी बाधा है, जो मुख्यमंत्री के संकल्प काे मिर्जापुर में पहुंचने से रोक रही है। लोक निर्माण विभाग की स्थिति सबसे बदहाल है। सड़क बनती ही नहीं, राशि खर्च हो जाती है। प्रांतीय खंड में भी इस तरह का खुलासा होने पर कार्रवाई हुई। लेकिन निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल बेखौफ हैं।

अन्य कार्यों में भ्रष्टाचार को दरकिनार कर दिया जाए तो सिर्फ मुर्दहवा पुल के निर्माण की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से जांच करा दी जाए तो दूध और पानी अलग-अलग हो जाएगा। समाजवेसी राम सिंह वागीश ने कहा कि इस पुल के निर्माण में धांधली व देरी की जांच कराने के लिए वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध करेंगे। वागीश में कहा कि एसई, चीफ आदि कहां है। इस पुल पर उनकी नजर क्यों नहीं जा रही है।

…फोटो मतुल्लाह अंसारी ने ली है।

 


Sachchi Baten

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