July 23, 2024 |

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मिर्जापुर जनपद को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की अनुप्रिया पटेल ने

Sachchi Baten

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मिर्जापुर में खेती की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया

मिर्जापुर (सच्ची बातें)। स्थानीय सांसद केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल में मिर्जापुर जनपद को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

21 सितंबर को लिखे पत्र में अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि इस वर्ष पूरे प्रदेश में औसत के कम बारिश हुई है। इसमें भी विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी से के मानसून से आच्छादित पूर्वी उत्तर प्रदेश का मानसून बेहद निराश करने वाला और अति निष्क्रिय रहा है। इस क्षेत्र में औसत से काफी कम वर्षा हुई है।

श्रीमती पटेल ने कहा है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की वर्षा आधारित खेती अति प्रभावित हुई है। हजारों हेक्टेयर खेत खाली पड़े  हैं। जो खेेती हुई है, वह भी सूखने के कगार पर है।

सांसद ने पत्र में लिखा है कि  सूखे से अति प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश में जो भी जनपद प्राकृतिक वर्षा से एकत्रित बांधों व बंधियों के जल पर आधारित पहाड़ी-पठारी जनपद हैं, वहां की स्थिति कम वर्षा के कारण अति दयनीय हो गयी है।

इसी प्रकार से मिर्जापुर जनपद में भी बांधों व बंधियों में एकत्रित वर्षा जल पर ही आधारित खेती होती है। खेती के अतिरिक्त भी अब पेयजल के लिए भी इन्हीं बाधों का सहारा लिया जा रहा है। मिर्जापुर में कम वर्षा के कारण खेती प्रभावित हुई है। पेयजल का भी संकट अभी से गहराना शुरू हो गया है।

खेती बर्बाद हो जाने से किसान मायूस हैं। भविष्य के प्रति चिंतित भी। लिहाजा मिर्जापुर जिला को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा जिले में विशेष राहत कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है। पेयजल संकट से निबटने के लिए भी स्थायी निदान की जरूरत है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किए जाने की जरूरत है।

बता दें कि मिर्जापुर जिले में अहरौरा, जरगो, मेजा, अपर खजुरी, लोअर खजुरी, सिरसी आदि बांध हैं। लेकिन इस साल अत्यंत कम बारिश के कारण कोई भी बांध भर नहीं सका है। कहने को तो ये जलाशय सिंचाई के लिए बनवाए गए थे, लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना को भी इन्हीं बांधों के सहारे चलाया जा रहा है।

बीते गर्मी में बांधों का पानी पाइप लाइनों टेस्टिंग में प्रचुर मात्रा में बहा दिया गया था, इसका असर धान की नर्सरी पर पड़ा था। बीच में कुछ बारिश हुई तो कुछ दिनों के लिए नहरों का संचालन किया गया, लेकिन टेल तक पानी पहुंचा ही नहीं और नहरों का संचालन बंद करना पड़ गया था। इसका मुख्य कारण पेयजल के लिए पानी को सुरक्षित रखना था।


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