July 16, 2024 |

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सरदार पर जारी सिक्कों में सिर्फ दो रुपये वाले को चलन में लाया गया

Sachchi Baten

सरकार की उदासीनताः सौ, पचास व 10 रुपये के सिक्कों को बाहर रखा चलन से

भारत रत्न से सम्मानित करने में भी निधन के बाद लग गए 41 साल

 मिर्जापुर (सच्ची बातें)। कांग्रेसी पता नहीं क्यों सरदार पटेल के व्यक्तित्व से डरते थे। तभी को निधन के बाद उनको भारत रत्न का सम्मान देने में 41 साल लगा दिए। जबकि यह सम्मान उनको बहुत पहले ही दे दिया जाना चाहिए था। और तो और 1996 में सरदार पटेल पर 100, 50, 10 और दो रुपये के स्मारक सिक्के जारी किए गए। इनमें से मात्र दो रुपये वाले को ही चलन में लाया गया। सौ, पचास और दस रुपये के सिक्कों चलन में नहीं लाया गया।

31 अक्तूबर जो भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवम गृह मंत्री वल्लभ भाई झाबेर भाई पटेल 31 अक्तूबर 1875 – 15 दिसंबर 1950 ) का जन्म दिन है, इसे देश में ” राष्ट्रीय एकता दिवस ” के रूप में मनाया जाता है।

वल्लभ भाई पटेल को उनकी प्रशासनिक क्षमता एवम दृढ़ निश्चयी गुण के चलते लौह पुरुष कहा जाता था। 1928 में ‘बारदोली सत्याग्रह ‘ में किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व करने पर उन्हें ” सरदार ” कहा जाने लगा।

आज का भारत उन्हीं की देन है। अंगेजों ने भारत को आजाद करते वक्त 565 राजे रजवाड़े एवं लगभग 1000 जमींदार जो खुद को राजा ही समझते थे, को आजाद कर दिया था। भारत दो टुकड़े में बंट गया था। इन राजे रजवाड़ों को ये ऑप्शन दिया गया था कि वे भारत या पाकिस्तान या फिर स्वतंत्र रहें। कितनी विषम परिस्थिति रही होगी इसे समझा जा सकता है।

व्यक्तिगत तौर पर सरदार पटेल ने सभी राजे रजवाड़ों से बात एवं पत्राचार किया। इनमें एक पत्र धनबाद के आनंद हेरिटेज गैलरी में भी सुरक्षित है, जिसे जिसे जोधपुर के महाराजाधिराज हनुवंत सिंह जी ने 20 जून 1950 को उप प्रधानमंत्री श्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को लिखी थी ।

धनबाद स्थित आनन्द हेरिटेज गैलरी एतिहासिक दस्तावेजों के संग्रह का एक शानदार संग्रहालय है , यहां प्रायः सभी राजे रजवाड़ों के यादगार स्वरूप कोर्ट स्टांप पेपर संग्रहित हैं।

इन्हें 1991 में मरणोपरांत ‘ भारत रत्न ‘ के सम्मान से सम्मानित किया गया था । समय समय पर भारतीय डाक विभाग द्वारा इन पर डाक टिकट जारी किया गया।

 अमरेंद्र आनंद

आनंद हेरिटेज गैलरी धनबाद के संस्थापक अमरेंद्र आनंद ने बताया कि 1996 में भारतीय टकसाल ने इन पर स्मारक सिक्कों की शृंखला निकली । एक सेट में 100,  50,  10 एवं दो  रुपये तथा दूसरे में 100, 50, एवं 10 रुपये के सिक्के थे। इनमें से दो रुपये वाले स्मारक सिक्के आम प्रचलन के लिए जारी किए गए। ये सभी सिक्के उनके संग्रह में हैं।


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