July 23, 2024 |

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अहरौरा बांधः पेयजल ही प्राथमिकता है सरकार की, सिंचाई नहीं

Sachchi Baten

मिर्जापुर के बांधों की स्थिति…

हर घर नल-जल योजना के लिए पानी सुरक्षित रखने का आदेश

-अहरौरा बांध में पानी 331 फीट, चार फीट और भरने पर ही खुलेंगी नहरें

-बांध में अभी कुल 7.5  मिलियन क्यूबिक मीटर पानी, छह मिलियन क्यूबिक मीटर सुरक्षित रखने के निर्देश

राजेश पटेल, जमालपुर (सच्ची बातें)। मिर्जापुर जनपद का धान का कटोरा कहने जाने वाले जमालपुर ब्लॉक में  सूखे की स्थिति तो है ही, रही सही कसर हर घर नल-जल योजना ने पूरी कर दी। सरकारी आदेश है कि पहले इस योजना के लिए बांध में छह मिलियन क्यूसेक मीटर पानी  सुरक्षित रखा जाए। इससे ज्यादा होगा, तभी सिंचाई के लिए गरई प्रणाली की नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।

आधिकारिक आंकड़े के अनुसार 7 जुलाई की शाम तक अहरौरा बांध में 331 फीट पानी भर चुका है। इसकी क्षमता 360 फीट है। सरकारी आदेश है कि नल-जल योजना के लिए 320 फीट पानी सुरक्षित रखना है। इस आदेश ने सिंचाई विभाग के हाथ बांध दिए हैं। फिर भी विभाग के एक जिम्मेदार ने बताया कि इधर तेजी से पानी बढ़ रहा है। दो दिन में ही दो फीट बढ़ा है। 335 फीट होने पर वे नहरों व नदी में पानी देना शुरू कर देंगे। सूत्र ने बताया कि 335 फीट पानी होने पर विभाग सभी नहरों को एक बार दस दिन के लिए चला सकेगा। हालांकि लखनिया दरी से पर्याप्त पानी बांध में जा रहा है। शीघ्र ही 335 फीट होने की उम्मीद है।

बीते फरवरी में डीएम कार्यालय से सिंचाई विभाग के सभी कार्यालयों में एक आदेश भेजा गया था। इसमें कहा गया है कि मानिकपुर पेयजल परियोजना के तहत 63 राजस्व ग्राम लिए गए हैं। इन गांवों में कुल मिलाकर 11235 घरों में पेयजल की पाइप पहुंचाई गई है। इसके लिए बांध से 13.77 मिलयन लीटर प्रतिदिन पानी चाहिए। लिहाजा पर्याप्त जल की उपलब्धता बांध में रखी जाए। इसी तरह से जरगो बांध स 84 मिलियन लीटर प्रतिदिन नल-जल के लिए पानी चाहिए। अदवा से 44.88 एलएलडी, बेलन से 47.70 एमएलडी, डोंगिया से 27.46 एमएलडी, सिरसी से 33,  खजुरी से 21 तथा डेखुआ डैम से 8.88 मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी नल-जल विभाग को चाहिए।

देखिए फोटो..

इस हिसाब से पानी सुरक्षित रखने के बाद ही सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता हो सकेगी। इसके बाद भी कई इसको लेकर कुछ पत्र आए। सिंचाई विभाग के अभियंता लाचार हैं। विभाग का कहना है कि छह मिलियन घन मीटर पानी सुरक्षित रखने का आदेश है। सूखा पड़ा है। इसके लिए कम से कम तीन मिलियन घन मीटर तो सुरक्षित रखा ही जाएगा। अभी 7.5 मिलियन घन मीटर पानी है। इसमें से मिलियन घन मीटर पानी को छोड़ दिया जाए तो 4.5 मिलियन घनमीटर ही पानी बच रहा है। इससे नदी, और सभी नहरों का संचालन प्रेसर के साथ संभव ही नहीं है। लिहाजा 5 फीट पानी और बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है। सीधी भाषा में समझें तो 320 फीट पानी नल-जल योजना के लिए सुरक्षित रखना है। अभी 331 फीट ही है। 335 फीट हो जाए तो सिंचाई के लिए 10 दिन के लिए पानी छोड़ा जा सकेगा।

किसान परेशान हैं। उनकी समझ में ही नहीं आ रहा है कि क्या करें। हाल के कुछ दिनों से रिमझिम होने से सूखने से बची धान की नर्सरी में कुछ जान आने लगी है। रोपाई की तो अभी कल्पना ही नहीं कर सकते। जबकि रोपाई का अंतिम समय 15 अगस्त माना जाता है। सात-आठ दिन और शेष बचे हैं। यदि बांध के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश नहीं हुई तो पांच फीट पानी बढ़ना दूर की कौड़ी होगी। चौकिया माइनर से जुड़े बहादुरपुर, भाईपुर, जिनोदपुर, चौकिया, सहिजनी, मनऊर, डूही कलॉ-खुर्द, ढेबरा, मुड़हुआ, भभौरा, बनौली, देवरिल्ला, गुलौरी, गौरी, चरगोड़ा में धान की रोपाई नाम मात्र की हो सकी है। जिसके पास सबमर्सिबल पंप हैं, वही कुछ रोपाई कर पा रही है। विद्युत चालित मोनोब्लॉक व डीजल इंजन इस साल फेल हैं।

जरगो कमांड की भी यही स्थिति है। इस क्षेत्र के किसानों को तो कभी इस तरह के संकट की उम्मीद ही नहीं थी, इसीलिए सिंचाई के लिए नहर के अलावा कोई वैकल्पिक उपाय कभी सोचा नहीं।

हालांकि नल-जल योजना के कारण सिंचाई प्रभावित होने की आशंका से जिले की सांसद व केंद्र में मंत्री अनुप्रिया पटेल, जिलाधिकारी  सहित सभी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया। किसान संगठनों ने कई बार इस बाबत ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आज किसान अपनी तकदीर पर रो रहा है। कोई आंसू पोंछने वाला भी नहीं है।


Sachchi Baten

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