July 24, 2024 |

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मौसम #Weather : घाघ की मानें तो संंवत् 2082 यानि 2025-26 में पड़ेगा भीषण अकाल

Sachchi Baten

 

पांच मंगल होए फगुनी पूस पांच शनि होय, घाघ कहैं सुन भड्डरी खेत में बीज न डाले कोय

 

कृषि सीजन 2002-2003 में भी यही संयोग बना था, नतीजा भीषण अकाल पड़ा था

 

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातेंं) । घाघ की मानें तो संवत् 2082 (वर्ष 2025-26) में भीषण अकाल पड़ेगा। यह संवत् 15  मार्च 2025 से शुरू होगा। तीन मार्च 2026 को समाप्त होगा। इस संवत् में पौष में पांच शनिवार व फागुन में पांच मंगलवार पड़ रहे हैं। महाकवि कृषि पंडित घाघ की कहावत है- पांच मंगल होए फगुनी पूस पांच शनि होय, घाघ कहैं सुन भड्डरी खेत में बीज न डाले कोय। इस कहावत के अनुसार तो कृषि सीजन 2025-26 में तो भयंकर अकाल के ही संकेत हैं। अभी तक तो घाघ की कहावतें खरी ही उतरी हैं, मौसम विभाग की भविष्यवाणी भले सच साबित न हो।

 

संवत् 2082 में पौष का महीना पांच दिसंबर 2025 से तीन जनवरी 2026 तक है। इस दौरान छह दिसंबर, 13 दिसंबर, 20 दिसंबर, 27 दिसंबर 2025 तथा तीन जनवरी 2026 को शनिवार पड़ रहे हैं। इसी तरह से फागुन का महीना दो फरवरी 2026 से शुरू होकर तीन मार्च 2026 तक है। इस दौरान तीन फरवरी, 10 फरवरी, 17 फरवरी, 24 फरवरी तथा तीन मार्च को 2026 को मंगलवार पड़ रहे हैं। यह संयोग कई वर्षों पर देखने को मिलता है।

 

इसके पहले 2002-2003 में भी इस तरह के संयोग में पड़ा था अकाल

इसके पहले इसी तरह का संयोग कृषि सीजन 2002-2003 में था। उस साल भी भीषण अकाल पड़ा था। मुंहनोचवा का आतंक भी उसी साल था। उस साल पौष महीना 20 दिसंबर 2002 से शुरू होकर 18 जनवरी 2003 तक था। इस दौरान 21 दिसंबर 2002, 28 दिसंबर 2002, चार जनवरी 2003, 11 जनवरी 2003 तथा 18 जनवरी 2003 को शनिवार था।

 

इसी तरह से फागुन का महीना 17 फरवरी 2003 से 18 मार्च 2003 तक था। इस दौरान 18 फरवरी, 25 फरवरी, चार मार्च, 11 मार्च तथा 18 मार्च को मंगलवार पड़े थे। कहने का मतलब उस साल भी संवत् 2059 में पौष में पांच शनिवार तथा फागुन में पांच मंगलवार पड़े थे। यह संवत् 29 मार्च 2002 से शुरू हुआ था। 18 मार्च 2003 को समाप्त हुआ था। 19 मार्च 2003 को नए संवत्सर 2060 की शुरुआत हो गई थी।

 

मुंहनोचवा का आतंक

आपको पता होगा कि उस साल कितना भीषण अकाल पड़ा था। बहुत से किसान तो खेतों में बीज तक नहीं डाल सके थे। तालाब सूखे ही रह गए थे। मछलियों का प्रजनन प्रभावित होने से इनका उत्पादन कम हुआ था। और तो और, गर्मी जनित बीमारियों को लोग मुंहनोचवा समझ बैठे थे। मुंहनोचवा को लेकर उड़ने वाली अफवाहों के कारण प्रशासन की काफी फजीहत हुई थी।

 

आने वाले खरीफ सीजन में भी कम बारिश की आशंका

अभी जो खेती का सीजन 2023-24 आने वाला है, उसमें भी कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि इसी संवत्सर में चैत में काफी बरसात हो चुकी है। घाघ ने कहा है कि जै बूंद चैत परै, सहस्त्र बूंद सावन हरै। इसका मतलब यह है कि चैत में जितनी बरसात होगी, उसका हजारवां हिस्सा ही सावन में बारिश होगी। कुल मिलाकर घाघ की कहावतों को मानते हैं तो आने वाला खेती का सीजन 2023-2024 तथा 2025-2026 किसानों के लिए परेशानी खड़ा करने वाला है।

 

घाघ ऐसे व्यक्ति थे, जो खेती-किसानी, मौसम, आचार-विचार, आहार-विहार आदि के प्रकांड विद्वान थे। उनकी कहावतों के आधार पर उत्तर भारत के किसान खेती करते हैं। उनकी कहावतें ही बता देती हैं कि बारिश होगी या नहीं।

 


Sachchi Baten

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