July 19, 2024 |

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राम मंदिर की सुरक्षा में चुनार की फौलादी मिट्टी की ईंटों की बन रही दीवार

Sachchi Baten

वर्ष 1989 में शिलापूजन कार्यक्रम के लिए पुरुषोत्तमपुर के पास प्रेम सिंह के भट्टे पर बनीं थी ‘राम’ मार्का ईंटें

-चुनार क्षेत्र के शेर कहे जाते थे बगही के बाबू प्रेम सिंह, परसोधा में लगता था दरबार

-पुत्रवधू अंजना सिंह रह चुकी हैं नरायनपुर ब्लॉक प्रमुख

राजेश पटेल, चुनार/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। आपको याद होगा अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन। विवादित ढांचे के विध्वंश के पहले गांव-गांव में शिलापूजन कार्यक्रम चलाया गया था। क्या आप जानते हैं कि मिर्जापुर में किस ईंट भट्ठे पर ‘राम’ लिखीं शिलाएं तैयार की गईं। भट्ठा मालिक का नाम था प्रेम सिंह। वहीं ईंटे आज अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर की सुरक्षा दीवार की नींव में लगाई जा रही हैं।

                                         चुनार क्षेत्र के शेर रहे बाबू प्रेम सिंह व उनकी पत्नी।

 

समझिए उस दौर को

केंद्र व प्रदेश में जनता दल की सरकारें थीं। वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री। समझ सकते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के प्रति केंद्र व प्रदेश की सरकारों का रुख क्या रहा होगा। बाबू प्रेम सिंह तो अब नहीं रहे, उनके सुपुत्र सुरेंद्र सिंह के मुताबिक उस दौर में विश्व हिंदू परिषद के गिरिधर लाल दबे और रामबुलावन सिंह राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई मिर्जापुर जनपद में कर रहे थे।

                                                   बाबू प्रेम सिंह के सुपुत्र सुरेंद्र सिंह।

 

शिलापूजन के लिए शिलाओं के बनाने की चिंता उनको सता रही थी। इन लोगों ने कई भट्ठा मालिकों से संपर्क किया, लेकिन सरकार का कोपभाजन बनने के डर से कोई तैयार नहीं हुआ। चूंकि बाबू प्रेम सिंह चौधरी चरण सिंह के अनुयायी थे। इनसे कहने में लोग हिचक रहे थे। जब कोई उपाय नहीं सूझा तो रामबुलावन सिंह और गिरधर लाल दबे ने परसोधा बाजार में प्रेम सिंह से मुलाकात की। शिलापूजन कार्यक्रम के लिए राम लिखी ईंटों को बनवाने का आग्रह किया। वैसे ईंट भट्ठा तो रामबुलावन सिंह का भी था, लेकिन उनके भट्ठे पर पुलिस प्रशासन की नजर थी।

बाबू प्रेम सिंह ने किसी अंजाम की परवाह किए बिना तुरंत हामी भर दी। राम मार्का ईंटें बनवाने के लिए दो सांचे बनवाए गए। इनकी लंबाई 10 इंच, चौड़ाई पांच इंच तथा मोटारी तीन इंच की थी। कई रातों में 5-6 हजार ईंटों का निर्माण हुआ। फिर किसी तरह से पकाया गया। ईंटों के तैयार होने के बाद उनको जिले के गावों में ले जाने की चुनौती बड़ी थी। पुलिस के पहरे को धता बताते हुए थोड़ी-थोड़ी ईंटों को भट्ठे से निकाला गया।

बता दें कि उस समय देश के दो लाख 75 हजार गांवों में शिलापूजन का कार्यक्रम कराया गया था। उस समय विश्व हिंदू परिषद के इस शिलापूजन कार्यक्रम के जमालपुर ब्लॉक के संयोजक महेंद्रनाथ सिंह ने बताया कि हर गांव में राम मार्का ईंटों को भेजना बहुत मुश्किल काम था, लेकिन किया गया। इसके माध्यम से अयोध्या में श्री राम का भव्य मंदिर बनाने के लिए माहौल तैयार किया गया था।

पूजित शिलाओं के उपयोग का रास्ता निकाला गया

बता दें कि शिला पूजन कार्यक्रम से लाखों कारसेवकों को राम मंदिर आंदोलन से भावनात्मक तौर पर जोड़ा गया था। अब जब राम मंदिर का निर्माण एलएंडटी और टीईएस जैसी नामी कंपनियां हाई तकनीक से कर रही हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट लाखों की संख्या में कार्यशाला में जमा राम शिलाओं का उपयोग निर्माण में कहां करें? यह समस्या बनी हुई थी।

बाद में इन पूजित शिलाओं को राम मंदिर के निर्माण में उपयोग करने का रास्ता खोज निकाला गया, जिसमें उन लाखों कारसेवकों और राम भक्तों का भावनात्मक जुड़ाव भी मंदिर से स्थाई तौर पर जुड़ा रहेगा। देश विदेश से विभिन्न भाषाओं में राम नाम अंकित शिलाओं को अब निर्माणाधीन भव्य राममंदिर की सुरक्षा में बन रही रिटेनिंग वाल की नींव में भर दिया जा रहा है।

इससे संदेश जाएगा कि मंदिर आंदोलन की पूजित शिलाओं को मंदिर की नींव से जोड़ कर इसमें समाहित कर दिया गया है। पूजित शिलाओं को मंदिर कार्यशाला में सुरक्षित रखा गया था। 1989 में देश के 2 लाख 75 हजार गांवों में शिलापूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कुल 55 देशों ने इस कार्यक्रम में भागीदारी की थी।

बाबू प्रेम सिंह के बारे में

बाबू प्रेम सिंह चुनार तहसील के नरायनपुर ब्लॉक के बगही गांव के निवासी थे। वह ईंट भट्ठे के व्यवसायी के साथ समाजसेवी भी थे। उनके दरवाजे से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। परसोधा बाजार में उनका दरबार लगता था। पास में ही रेलवे लाइन के किनारे उनका ईंट भट्ठा था। विरोधी विचारधारा वाले की भी मदद करते थे। चुनार क्षेत्र से चार बार विधायक रहे आजाद भारत के सबसे बड़े क्रांतिकारी यदुनाथ सिंह हर चुनाव में नामांकन करने के लिए पर्चा व जमानत राशि की रकम उनसे ही लेते थे। प्रेम सिंह उनको गाली भी देते थे और सहयोग भी। यह संयोग देखिए कि नामांकन में जितनी बार यदुनाथ सिंह ने प्रेम सिंह से पैसे लिए, उतनी बार उनकी जीत हुई। वह दो बार नरायनपुर ब्लॉक प्रमुख के लिए चुनाव भी लड़े, लेकिन जीतते-जीतते हार जाते थे। आरोप लगता था कि कांग्रेस सरकार के इशारे पर उनको हराया जा रहा है। एक बार तो खुद पं. लोकपति त्रिपाठी ने इनको हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। मतगणना के दौरान वह खुद पूरे समय तक मतगणना स्थल के पास बैठे रहे।

प्रेम सिंह की बहू अंजना सिंह बनीं ब्लॉक प्रमुख व बाद में जिला पंचायत सदस्य

बाद में प्रेम सिंह की बहू व सुरेंद्र सिंह की पत्नी अंजना सिंह जिला पंचायत सदस्य बनीं। इसके पहले 1995 से 2000 तक वह नरायनपुर ब्लॉक की प्रमुख भी रह चुकी हैं।

 


Sachchi Baten

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