July 24, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

यूपी की 17 सीटें : 2019 में कांग्रेस की 13 पर हुई थी जमानत जब्त

Sachchi Baten

इस बार कांग्रेस को खुद को करना होगा ‘प्रूव’

– सपा ने कांग्रेस को दी हैं 17 लोकसभा सीटें

-पूर्व मंत्री, सांसद भी नहीं बचा पाए थे जमानत

– राम मंदिर लहर के चलते 2019 के मुकाबले विपक्ष को होगी अधिक मुश्किल

हरिमोहन विश्वकर्मा, लखनऊ। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश में प्रियंका गाँधी की मध्यस्थता के बाद गठबंधन तो हो गया है लेकिन कांग्रेस के सामने अब चुनौती है कि अपनी 17 सीटों पर वह खुद के जनाधार को सिद्ध करे।

देखा जाए तो राष्ट्रीय लोकदल के इंडिया गठबंधन से निकलने से कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ है और इसी के चलते समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को 80 में से 17 लोकसभा सीटें चुनाव लड़ने के लिए दी हैं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें से अधिकतर सीटों पर कांग्रेस का कोई खास जनाधार नजर नहीं आता है।

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 67 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और इनमें से कांग्रेस लगभग 63 सीटों पर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थी। कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी खुद अपने परिवार के गढ़ अमेठी में भी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे। सोनिया गांधी ही पार्टी की एकमात्र प्रत्याशी रहीं, जिन्होंने रायबरेली की अपनी सीट बचा ली, लेकिन जीत का अंतर भी 2014 के मुकाबले काफी कम हो गया था।

अब देखते हैं कि जिन 17 सीटों पर कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने जा रही है, वहां किन सीटों पर वह पिछली बार जमानत बचाने भी असफल रही थी। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जब कोई उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र में कुल पड़े वोट का 1/6 या 16.66% वोट नहीं जुटा पाता है तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है।

सपा ने इस बार कांग्रेस के लिए उप्र में जो सीटें छोड़ी हैं, वो है – अमेठी, रायबरेली, बांसगांव, फतेहपुर सीकरी, कानपुर, सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी, महाराजगंज, अमरोहा, झांसी, बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद, सीतापुर, देवरिया और बाराबंकी। कांग्रेस को अबकी बार उप्र में जो 17 सीटें गठबंधन के तहत मिली हैं, उनमें से कांग्रेस पिछली बार सिर्फ 4 सीटों पर जमानत बचा सकी थी, जिसमें रायबरेली, अमेठी, कानपुर और सहारनपुर थी।

सहारनपुर में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद की जमानत बहुत मुश्किल से बच पाई थी। वहीं बांसगांव में कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार ही नहीं उतारा था, लेकिन फतेहपुर सीकरी, प्रयागराज, वाराणसी, महाराजगंज, अमरोहा, झांसी, बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद, सीतापुर, देवरिया और बाराबंकी में कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

वाराणसी लोकसभा सीट पर कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को महज 14.38% वोट मिले थे। वहीं टीवी चैनलों पर दिखने वाली कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को तो महाजगंज में सिर्फ 5.91% वोट ही मिले थे। फतेहपुर सीकरी में पार्टी के स्टार प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद राज बब्बर भी मात्र 16.57% वोट जुटा पाए थे।

अमरोहा में तो कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 1.07% वोट मिले थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री और क्षेत्र में लोकप्रिय नेता माने जाने वाले प्रदीप जैन आदित्य को झांसी में 6.24% वोट ही मिल पाया और उनकी जमानत डूब गई। बुलंदशहर में 2.62%, गाजियाबाद में 7.34%, मथुरा में 2.54%, सीतापुर में 9.01%, बाराबंकी में 13.81% और देवरिया में 5.03% वोट ही कांग्रेस को मिल पाए थे।

देखा जाए तो 2019 के मुकाबले उप्र में विपक्ष के लिए स्थिति और विकट है क्योंकि भाजपा उप्र में 73+ लक्ष्य लेकर चल रही है और अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वातावरण टोटल राममय है, जो भाजपा के अनुकूल जाता है। ऐसे में केवल कांग्रेस नहीं, बल्कि सपा के लिए भी यह बड़ी चुनौती है।


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.